मरियम उस्मानी की डायरी



।। कितनी छोटी हैं मेरी बाहें, संसार का एक हिस्सा समेटती हूँ, तो दूसरा छूट जाता है ।।


(ज़िंदगी और अनुभव में धीरे-धीरे बड़ी हो रही मरियम का गद्य कविता जैसी सुंदरता से सम्पन्न है।उसमें एक सर्जनात्मक असावधानी है, जो दरअसल कवियों के लिए अनिवार्य है। यह देखना दिलचस्प होगा कि बमुश्किल बीस पार मरियम जब कभी कविता लिखेगी, तो उसका रूपाकार कैसा होगा। फ़िलहाल मरियम की डायरी के टुकड़े पढ़िए। यह कहीं भी प्रकाशित होने का मरियम के लिए पहला अवसर है।)
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आवाज़
जब तक यह पता हो कि आवाज़ किस दिशा से आ रही है, उससे छूटा जा सकता है। लेकिन जब वह इस तरह आए कि उसकी दिशा बताना कठिन हो, तो सब दिशाएँ उससे लिपट कानों से टकराने लगती हैं...फिर वह आवाज़ घेर लेती है !
*

नृत्य
नृत्य में मन की उमंग, उत्साह और उदासी को देह में उतर कर अभिव्यक्त होना था। लेकिन वे देह से ऐसे भाव उपजाना चाहते थे जिसके अंकुर भीतर की ओर फूटें।
यह अलग नृत्य था, अंगों की थिरकन से होता हुआ मन की सतह पर लहराने को अकुलाता !
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एक अबोध क्रूरता

किसी आँख से गिर कर बच जाने के बाद अपनी दृष्टि से उतरना होगा। जैसे मृत्युदंड के लायक़ किसी जुर्म के बाद रिहाई की भीख झोली में आ गई हो। किसी की आँख से गिरना सबसे ऊँचे शिखर से गिरना है।
किसी हृदय में डूबकर बच जाने पर अपनी बची हुई शर्म में डूब जाना होगा क्योंकि मन की रेत पर चल कर नदी में समा जाने की चाह दुर्भाग्य से नष्ट हो गई है। यह बहुत गहराई से ऊपरी सतह पर उछाल दिया जाना है।
ध्यान रखना जब बद्दुआओं के मरहम की ज़रूरत हो, तब कोई हथेली पर शुभेच्छा के फूल रख जाता है, तो वह एक अबोध क्रूरता करता है !
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क़बूल की कहानी एक

अगर कोई मन की सारी नमी इकट्ठा कर ईश्वर से प्रार्थना करता है और वह पूरी हो जाती है, तो सच जानो, इसमें ईश्वर का कुछ भी कमाल नहीं है। कमाल उस शख़्स का है, जिसने अपनी इबादत पर भरोसा किया।
जब भी कुछ सुंदर घटित होता है ,व्यक्ति ख़ुद पर रहमत करता है। तभी तो अलग-अलग आस्था वालों के पास दुआ क़बूल होने की एक-सी कहानियाँ हैं !
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आग

मैं ठिठुरती हथेलियों को ताप देती हूँ, पर ज़रा-सी लापरवाही पर दामन पकड़ सकती हूँ!
मिट्टी पकती है मेरे अलाव में और मैं कामनाओं की शाख़ पर ज़ख़्म की मानिंद पकती हूँ!
पश्चाताप की लपटों में उठती हूँ, क्रोध में गिरती-धंसती हूँ!
सब मुझमें शोक जलाते हैं, मैं शोक से लिपटी जलती हूँ!
मेरे भीतर सुलगती है एक-एक पंखुड़ी, अधखिली, अधजली !
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रात

मैं बस डर और ख़तरों की इबारत नहीं, चाँद की देह पर लिखा दाग़दार इतिहास हूँ। उसके दीवानों की पुकार से छलनी है मेरा कलेजा ! मुझमें हादसे रुकते रहे हैं सदियों से और उससे अधिक ऐसी अजीब वारदात जिसमें कोई किसी पर हमला नहीं करता!

आसमान और धरती के बीच थकान की तरह पसरी मैं, देखती हूँ यह बदलता हुआ समय।

अब मेरी मौजूदगी में भी खुले रहते हैं बाज़ार, मुझ पर व्यंग्य करती हैं जगमगाती सड़कें, अलबत्ता कुछ लोग अब भी सितारों को लतीफ़े सुनाते हैं !

मेरी हथेली पर जन्मती हैं उदासी की बूढ़ी धुनें और हवाओं को अपने तारों में उलझा देती हैं। हाय, फिर भी मैं इतनी गहरा न सकी आज तक कि सूरज मेरे हृदय में डूबकर उगना भूल जाए!
मैं रात हूँ ...कितनी छोटी हैं मेरी बाहें, संसार का एक हिस्सा समेटती हूँ, तो दूसरा छूट जाता है।
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Comments

Gautam Yogendra said…
Mariyam को शुभकामनाएँ.. वाक़ई कमाल लिखा है
Sudhanshu Gupt said…
वाकई शानदार है मरियम की डायरी, उम्मीद जगाती है कि उनकी बांहे बड़ी हों गी और उनमें पूरा संसार समा सकेगा, शुभकामनाएं!
Kuldip Kaur said…
Best wishes for her...
Sushil Goswami said…
यह अविश्सनीय है !
वाह्ह! धन्यवाद इनसे परिचय करवाने के लिए..
और इनका धन्यवाद इतनी खूबसूरती से रोशनी की बारिश का अनुवाद करने का.
Ajanta Deo said…
ध्यान रखना जब बद्दुआओं के मरहम की ज़रूरत हो, तब कोई हथेली पर शुभेच्छा के फूल रख जाता है, तो वह एक अबोध क्रूरता करता है !

ये आवाज़ दूर तक जाएगी ,मरियम की आवाज़
Anita Manda said…
बहुत सुंदर !
वाह...बहुत सुंदर।
बहुत असरदार
शानदार लिखा। शुभकामनाएँ मरियम
Parul Pukhraaj said…
बहुत बढ़िया
Pratima Gautam said…
Bahot sundar pyari mariyum bilkul tumhari tarah
Anurag Dubey said…
कमाल👌
#मरियम के साथ साथ Anurag Vats जी का धन्यवाद
Swapnil Kumar said…
कुछ अलग सा..नूतन.😊
Mariyam न केवल अच्छा लिखती है बल्कि अच्छा पढ़ती भी है, उर्दू के अल्फाज तो एकदम खनक उठते हैं इसके और सबसे बड़ी...बेहद खूबसूरत इंसान है ये
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Sujata Sharma said…
आप मेरी मित्र हैं और मैंने आपकी इस खूबसूरत पोस्ट को शेयर कर के आपको जोड़ने की कोशिश कर रही हूं।
तुम्हें लाख दुआएँ... कलम की नोक पर जैसे सूरज की उजली किरणें टिकी हों.. रह-रह कर शब्दों की कौंध दिखती है Mariyam 😍
Aman Tripathi said…
मरियम को असावधान होकर नहीं पढ़ा जा सकता. उनका लिखा सजगता से पढ़ना माँगता है.
All the imagery is so Marquezesque that it seems these are scattered parts of a major masterpiece, congrats to Mariam for amazing work and you Anurag for curating such exceptional content, though Geet of course is the staple in house genius. Cheers to you all !
Sagar Kumar said…
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Sagar Kumar said…
आपको शुभकामनाएँ 💐. बहुत खुशी हुई । लिखे पर बोलने के लायक नही । सिर्फ शुभकामनाएँ दे दूँ । सौभाग्य है !
abhishek shukla said…
बहुत अच्छा लिखा है
अपनी दोस्त से सुना था आपके बारे में वाकई सच ही कहा था उसने।
तुम्हे यहाँ देख कर पढ़ कर अच्छा लगा, बहुत ख़ुशी हुवी... खुश रहो लिखती रहो.... मेरी नेक दुवाए हमेशा तुम्हारे साथ है

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