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सपने में पिया पानी: कुछ कविताएं

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(हिन्दी के प्रमुख युवा कवियों में से एक समर्थ वाशिष्ठ का पहला हिन्दी कविता संग्रह "सपने में पिया पानी" नाम से दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन से छप कर आया। आगे संग्रह से कुछ चुनी हुई कविताएं और संग्रह पर कवि-वक्तव्य दिया जा रहा है।)

अपनी पहली कविता-पुस्तक के बारे में...मेरी कविता हिन्दी में शुरू नहीं हुई थी। बाईस साल की उम्र तक मैं लगभग पूरी तरह भारतीय अंग्रेज़ी में लिखता रहा। छपा भी, संग्रह भी आए। फिर महसूस हुआ कि कविता भाषा की प्रयोगशाला तभी बन सकती है जब उस भाषा में लिखा जाये जिसे गढ़ने की पूरी आज़ादी हो। हिन्दी की तरफ रुझान होने का कारण एक और भी रहा। कविता को मैंने हमेशा अपने जीवन में ईमानदारी से एक बेहद ज़रूरी जगह दी, बिना किसी अपेक्षा। यही ईमानदारी थी कि ग्यारह साल पहले जब मैंने अंग्रेज़ी में एक ख़ास तरह के तकनीकी लेखन को अपना पेशा बनाया, तो दोबारा अंग्रेज़ी में मुझसे कविता न हुई। मेरी कविता ने फिर हिन्दी में ही विस्तार पाया।
पिछले पंद्रह बरस के दौरान लिखी गईं कविताओं से बना यह संग्रह अब आपके सामने है। 
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