Posts

Showing posts from August, 2015

चार नई कविताएं : कुॅंवर नारयण

Image
नया सपना
समय की बरबादी है उस गुत्थी को सुलझाने की कोशिश  जो बेहद उलझ गई हो...
इससे अच्छा है एक नयी गॉंठ डालें  और शुरू करें बुनना  कोई नया सपना ***
आहट का उजाला
बिल्कुल अॅंधेरा था कि अचानक
उसके आने की आहट का उजाला                                सुनाई दिया 
जैसे सन्नाटे में  दूर से आती  किसी संगीत की ध्वनि 
अॅंधेरे में किसी  माचिस की तीली जलाई  ***
आवाज़ें
यह आवाज़  लोहे की चट्टानों पर  चुम्बक के जूते पहन कर  दोड़ने की आवाज़ नहीं है 
यह कोलाहल और चिल्लाहटें  दो सेनाओं के टकराने की आवाज़ है,
यह आवाज़  चट्टानों के टूटने की भी नहीं है  घुटनों के टूटने की आवाज़ है
जो लड़ कर पाना चाहते थे शान्ति यह कराह उनकी निराशा की आवाज़ है,
जो कभी एक बसी बसाई बस्ती थी  यह उजाड़ उसकी सहमी हुई आवाज़ है,
बधाई उन्हें जो सो रहे बेख़बर नींद और देख रहे कोई मीठा सपना, यह आवाज़ उनके खर्राटों की आवाज़ है,
कुछ आवाज़ें जिनसे बनते हैं  हमारे अन्त:करण इतनी सांकेतिक और आंतरिक होती है  कि उनके न रहने पर ही  हम जान पाते हैं कि वे थीं  सूक्ष्म कड़ियों की तरह  आदमी से आदमी को जोड़ती हुई अदृश्य श्रृंखलाऍं
जब वे नहीं रहतीं तो भरी भीड़ में भी  आदमी अकेला होता चला जाता…

कला का आलोक : 8 : वामन केंद्रे : व्योमेश शुक्ल

Image
वामन केंद्रे समकालीन भारतीय रंगकर्म की ऐसी प्रतिनिधि शख्सियत हैं जिसे लेकर बहुत से दावे किए जा सकते हैं. वह जितने लोकप्रिय हैं उतने ही भरोसेमंद भी. उनका शिल्प अपनी ही अभिरुचि की कैद में रहने से इनकार करता आया है. आमतौर पर बड़े रचनात्मक मन कुछ ख़ास साँचों और खानों में स्थिर हो जाते हैं और वहीं से पहचाने जाने लगते हैं - शक्ति ही उनकी सीमा बन जाती है. वामन के साथ ऐसा नहीं है. उनके नाटकों की अंतर्वस्तु का यथार्थ हर बार एक अप्रत्याशित अभिनव स्तर पर हमें विचलित करता है. उनके नाटकों का जीवन-संगीत, उद्बोधन और उसी में निहित गंभीर मनोरंजन की पेशकश हमेशा एक अनोखा अनुभव दे जाती है. महाकवि भास के क्लैसिकल संस्कृत आख्यान से लेकर देवदासियों और हिजड़ों की ज़िंदगी तक फैली उनकी दृष्टि के भूगोल में दर्शक आसानी से उनके सामाजिक-राजनीतिक ठिकाने की तलाश कर सकते हैं. तथ्य यह भी है कि वह रंगमंच की दुनिया के लगभग सभी पुरस्कारों और सम्मानों से अलंकृत हैं, लेकिन हिंदी और मराठी भाषी जनमानस से मिले अथाह स्नेह और स्वीकृति की निधि के आगे यह तथ्य ही है. अभावग्रस्त मराठवाड़ा के इस अनोखे किसान कामगार कलाकार के साथ हुई नीचे …