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सबद की नई फिल्म




इस फिल्म को आप यहां देख सकते हैं :

मैं आऊंगा


फिल्म में इस्तेमाल किए गए हिस्से कवि-कथाकार गीत चतुर्वेदी के शीघ्र-प्रकाश्य उपन्यास 'रानीखेत एक्सप्रेस' से चुने गए हैं, जिसे लेखक ने फिल्म में स्वयं स्वरबद्ध किया है।
***


{ फिल्म मोबाइल कैमरे (गूगल नेक्सस) से शूट की गई है। } 

Comments

Unknown said…
गंभीर प्रयत्नसाध्य पवित्रता. प्रतिरचना.

व्योमेश शुक्ल
sarita sharma said…
यह उपन्यास का अंतिम अंश लगता है. सुनते हुए मुझे 'डॉक्टर कोटनिस की अमर कहानी' का एक दृश्य याद आ रहा है. वर्तमान में अतीत प्रेम की स्मृति बन कर मौजूद है. जीवन से चले गए लोग हमेशा आसपास बने रहते हैं.
मन की गहराई तक उतरती पंक्तियाँ …सचमुच जानेवाले इसी तरह आया करते हैं ....... शुभकामनाएँ
Amrita Bera said…
Excellent.
Manjit Handa said…
it is lovely.
Ruby Abidi said…
Very nice simile's simple but having a stark effect .
anupama sharma said…
बहुत ही बढ़िया प्रयास। गंभीर आवाज़। ये स्मृतियाँ ही जीवन जीने का संबल बनती है। 'मैं तुम्हारे पास एक आवाज़ की तरह आऊँगा।' कई बार ये उम्मीद बहुत ज़रूरी हो जाती है। उपन्यास की प्रतीक्षा में। शुभकामनाएँ।
जिंदगी के रेगिस्तान पर पसरा इंतज़ार और उगती कोंपलें जैसे दो शब्द 'मैं आऊंगा'.
Kamayani Kansal said…
Very nice!
Amit Mishra said…
अद्भुत........गीत जी के एक-एक शब्द मोती है तो विजुअलाइजेशन भी लाजवाब है। कब आ रहा है रानीखेत एक्सप्रेस.....कहां से ले सकते हैं... सूचना दीजिएगा।
बढ़िया.. हमेशा की तरह ...

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