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Showing posts from June, 2014

न नींद टूटती है न भरम : गीत चतुर्वेदी की नई कविताएं


तुम इतनी दूर पहुंच चुकी हो स्मृति की दृष्टि से भी ओझल कि अब तुम्हारा चेहरा नहीं पहचान सकता
तुम्हें सिर्फ़ एक चेहरे से याद भी नहीं कर सकता
इस तरह बनता है अतीत से हमारा रिश्ता कि जिन चीज़ों को देख तुम्हारी याद आती है वे चीज़ें तुम्हारे चले जाने के बाद वजूद में आई थीं
बस एक रेखाचित्र है सर्द सुबह का एक आकृति है बिंदुओं से बनी हुई आज एक आंख है कल एक दृश्य दोनों के बीच धुंधला-सा एक ध है
कोहरे का नक़ाब तुम पर फबता है                                          * * * समाधि