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जयशंकर के जर्नल्स : कुछ पढ़ते हुए


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चर्चित हिंदी कहानीकार जयशंकर के अनछपे जर्नल्स, जो १९८० के वर्षों में लिखे गए, से यह चयन तैयार किया गया हैइनमें मौसम, मूड्स, लोगों और उनसे मैत्री-मुलाकातों के अलावा शहर के दौरों, कस्बे का उदास जीवन और गाँधी के सेवाग्राम की शांति भी हैलेकिन जो बात सबसे ज्यादा आकर्षित करती है वह है, इन दिनों में जब खुद जयशंकर बतौर कहानीकार शुरू हो रहे थे, उनकी पुस्तकों और फिल्मों के साथ संगतआज के समय में जब रूचि के इन मरकज, यानी किताबों और फिल्मों, को बहुत आसानी से खोजना-पाना हमारे लिए संभव है, जयशंकर का इतना उद्यम करके पढ़ना और उससे अनमोल नबेरना, अचरज से भर देता हैसबद पर आप इससे पहले भी उनके जर्नल्स से एक चयन पढ़ चुके हैंहम आगे भी उनके जर्नल्स देते रहेंगेसाथ में दी गई तस्वीर माइक स्टिलकी की है। ]



प्रेम के ज्वर के उतरने के बाद, हम अपने आपको अत्यधिक नंगेपन के साथ देख पाते हैं : उन दिनों की रोशनी में ( जब हम प्रेम कर रहे होते हैं ) अपना self एक दयनीय, हारा हुआ और अनाथ व्यक्तित्व लिए लौटता है --कभी-कभी ऐसा, उस सुरक्षित जीवन के न मिल पाने से होता है, जिसकी आकांक्षा हम प्रेम करते हुए, साथ रखे हुए थे। क्या हमें प्रेमी के साथ-साथ उस सुरक्षा की भी आकांक्षा होती है ( संभवतः हम उस सुरक्षा से भी प्रेम कर रहे होते हैं ) जो हमें उसके साथ, स्थाई रूप से बस जाने में मिलती है ? -- Marguerite Duras के उपन्यास The Lover पढ़ते हुए, इन सभी मुद्दों पर सोचता रहा -- प्रेम और यातना के अनिवार्य अंतर्संबंध की ईसाइयत की अवधारणा पर सोचता रहा --बहुत पहले पढ़ा हुआ इतालवी लेखक पावेसी का वाक्य जेहन में कौंधा -- Life is pain and the enjoyment of love is an anaesthetic.
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ज्वायस की कहानी -The Dead- प्रेम के मेलंकलिक विजडम, प्रेम के सौंदर्य, रहस्य और सुख की पहचान कराने वाली कहानी है। कुछ कहानियां दुःख के बारे में होती हैं, कुछ कहानियां सुख के विषय में, परन्तु कुछ कहानियां होती हैं, जो एक विराट सत्य से हमारा परिचय कराती हैं --ज्वायस की यह कहानी प्रेम के सत्य को खोजती हुई ऐसी ही एक कहानी है। गेब्रियल की पत्नी जिस युवक और सर्दियों की रात के बारे में बताती है, उसे पढ़ते हुए मन में कितनी पवित्र स्मृति जन्म लेती है !
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Carson mc cullers का उपन्यास The member of the wedding पढ़ कर समाप्त किया। इसे पढ़ते हुए मैंने अपने लिए एक और अनिवार्य, आत्मीय और असाधारण लेखक को खोजने का सुख पाया। पहली नज़र में एकदम सपाट गद्य, किन्तु भीतर ही भीतर एक तरह की कलात्मक जटिलता लिए हुए। दिल्ली में एक शाम निर्मल जी ने इस लेखिका को पढ़ने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि इनका एक उपन्यास पढ़ने के बाद ही मुझमें ''लाल टीन की छत'' लिखने का विचार आया था।
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आयरिश लेखक Frank O' Corner की कहानियां साधारण परिवेश की असाधारण सच्चाइयों को गहरी कलात्मकता के साथ खोलती हैं। अपने कुत्ते की मृत्यु पर मास का आग्रह लिए हुए पादरी से मिलने वाली बुढ़िया, ईश्वर के अस्तित्व पर चिंतित कैथलिक लड़का, मोपांसा पर मुग्ध वेश्या के पास गए हुए बुद्धिजीवी का जीवन --ये कहानियां चेखव की उन उदास कहानियों की ओर ले जाती हैं जिन्हें मैं बरसों से पढ़ता रहा हूँ।
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तोलस्तोय की कहानी The death of Ivan Ilyitch का अंतिम हिस्सा पढ़ते हुए आँखें डबडबा गईं। इवान इलिच का अपने जीवन के अधूरेपन से साक्षात्कार, अपनी असफलता की गहरी पीड़ा, बचपन की मासूम स्मृतियों में उसका लौटना --बरबस ही तोल्स्तोय के लेखन की गहरी मानवीयता के प्रति श्रद्धा जगाता है। हाल ही में उनकी कहानी What men live by भी पढ़ी। इन दिनों उन कहानियों को सिलसिलेवार ढंग से पढ़ने की सोच रहा हूँ, जिन्होंने समय-समय पर मुझको प्रभावित किया है --इसी के तहत तुर्गनेव की First Love और दोस्तोयेवस्की की White Nights भी पढ़ गया।
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अपने प्रिय पांच शब्दों को याद करते हुए उन्हें अलग-अलग ढंग से व्यवस्थित करता हूँ : प्रकृति , प्रार्थना, प्रतीक्षा, प्रेम और प्रवास। क्या ही अच्छा होता, मैं इन शब्दों के साथ-साथ ''प्रूस्त'' को भी याद करता, रख पाता।
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मिलेना को लिखे गए काफ्का के पत्रों को पढ़ता रहा। बहुत दिनों पहले उनके फेलिस को लिखे गए पत्रों की पुस्तक पढ़ी थी। हाल ही में Conversations with Kafka पढ़ते हुए उनकी पर्सनल रायटिंग को पढ़ने की इच्छा का विस्तार हुआ और मैंने उनकी डायरी व पत्रों को पढ़ना शुरू किया। जिस लेखक के लेखन में बीसवीं शताब्दी के यूरोप के मनुष्य की हताशा का इतना truthful vision दिखाई देता है, वह अपने जीवन में भी अपनी घनघोर यातना और उसकी नियति को पहचानने की कोशिशें करता रहा था। मिलेना के साथ अपने संबंधों के गहरे होने की प्रक्रिया में जितने भी बाधक तत्व थे, वे उन्हें कितनी क्रूरता के साथ देखते थे और कितनी सहृदयता के साथ, मिलेना को लिखते थे !
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ज्वायग का उपन्यास Beware of pity पढ़ रहा हूँ। उनके इस मार्मिक उपन्यास को पढ़ना एक अवर्णनीय और काव्यात्मक अनुभव में उतरना है। उनकी कहानियों की तरह, इस उपन्यास में गहरी मानवीयता और उनकी असाधारण अंतर्दृष्टि बांधती है। हालाँकि बाहर के मौसम का संताप, ज्वायग के उपन्यास को पढ़ने के सुख से धुलता रहता है।
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अपने निबंधों की पुस्तक Less than one में ब्रॉडस्की ने निष्कासन के दिनों के बारे में लिखते हुए अपने बूढ़े माँ-बाप को उन दो कव्वों को देख याद किया है जो एक पराये देश के मकान में रहते हुए उन्हें करीब के एक पेड़ पर अक्सर मिल जाते थे।
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Isaac Bashevis Singer का उपन्यास Enemies --हरमन नाम के यहूदी घोस्ट रायटर के जीवन के अतीत और वर्तमान का अंतर्द्वंद्व -- सिंगर के गद्य का मोहक विस्तार और उनके पात्रों की ट्रेजिक परिस्थितियां, उनके मेटाफिजिकल प्रश्नों का तनाव और उनके राजनैतिक अनुभवों की पीड़ा...उनका यह उपन्यास भी उनकी दूसरी पुस्तकों की तरह पठनीय और मर्मस्पर्शी लगा। वे जिस तरह अपने परिवेश, अपने पात्र और अपनी भाषा का अंतर्संबंध क्रिएट करते हैं, वह इधर के समकालीन लेखन में Rare होता जा रहा है।
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क्राइम एंड पनिशमेंट में जब रसकोलनिकोव सोनिया के घर में पहली बार जाता है और उन दोनों के बीच संवाद होता है, वह दृश्य मुझे हमेशा ही बांधता रहा है। रसकोलनिकोव का यह कथन कि I did not bow down to you, I bowed down to all the suffering of 'humanity'...दोस्तोयेवस्की की रचनाओं के मर्म की तरफ ले जाता है।
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Comments

Rukaiya said…
कुछ कहानियां दुःख के बारे में होती हैं, कुछ कहानियां सुख के विषय में, परन्तु कुछ कहानियां होती हैं, जो एक विराट सत्य से हमारा परिचय कराती हैं --.... yahi ahsas is post ko padhne pe ho raha hai. behtreen ..
sarita sharma said…
साहित्यिक यात्रा में दुखों के पड़ाव ही पाठक को रुककर कुछ सोचने और लेखक के साथ एकात्म होने का अवसर देते हैं.संबंधों की जटिलताओं से उपजी पीडाएं और जीवन के संघर्ष का दुखद अंत रचनाओं को यादगार बनाता है.विधिन्न पुस्तकों की अनुभूति बाँटने वाले ये नोट्स विचारोत्तेजक हैं और बेहद मार्मिक भी.
.बेहतरीन हिस्से ....निस्संदेह जयशंकर हिन्दी साहित्य के एक सशक्त हस्ताक्षर हैं |उनकी कहानियां कथादेश,नया ज्ञानोदय आदि में पढ़ते रहते हैं |लेकिन ये जन्राल्स पढ़ना एक अद्भुत अनुभूति ही नहीं एक सुखद संयोग भी है ..शुक्रिया अनुराग..| जिन टुकड़ों को यहाँ प्रेषित किया गया है उन्हें पढ़कर मस्तिष्क उसी अवधारणा को पुनः दोहराना चाहता है ,जिसका सारांश संभवतः यह होना चाहिए ''उत्कृष्ट और कालजयी लेखक न सिर्फ अपनी कालगत पारिवारिक सामाजिक राजनैतिक या भौगोलिक प्रष्ट भूमि से गुन्थित होता है बल्कि अपनी चेतना में उफनते हुए अनुभवों/पीडाओं को ही वो शब्द रूप दे स्वयं की कुंठाओं और अवसाद से मुक्ति का प्रयास भी करता है |''truthful vision''संभवतः इसी का तर्जुमा है ....काफ्का-मीलेना के अंतर्संबंधों का सच ,या हर्मान के अपने अतीत और वर्त्तमान के अंतर्द्वंद या इवान इलिच का अपने जीवन के अधूरेपन से साक्षात्कार ,असफलता की गहरी पीड़ा,(तोलस्तोय),या ब्रॉडस्की ने निष्कासन के दिनों के बारे में लिखते हुए अपने बूढ़े माँ-बाप को उन दो कव्वों को देख याद करना । I bowed down to all the suffering of humanity ''रसकोलनिकोव'.....Frank O' Corner की साधारण परिवेश की असाधारण सच्चाइयों से भरी कहानियां.....ये और अन्य विश्व प्रसिद्द लेखकों गोर्की,मोपांसा,चेखव ,या प्रमचंद,भीष्म सहनी,मोहन राकेश,निर्मल वर्मा आदि का रचना जगत इसी सत्य की गवाही देता प्रतीत होता है |अभी अभी अकूता गावा कि राशोमान पूरी कि ,सामाजिक राजनैतिक परिवेश का वीभत्स वर्णन है कई बार पढ़ते हुए लगा कि किताब बंद कर दें लेकिन हर बार ही गोर्की का कथन याद आ गया और अंततः पूरी पढ़ ली गई ''यदि बुरा और बेजायका शहद ही जीवन में ज्यादा मिला हो,तो उसे मीठा और ज़ायकेदार क्यूँ और कैसे कहा जाये ''(गोर्की) ||उक्त टुकड़ों और अनुभवों को पढ़ते हुए गोर्की का अलेक्सी याद आ रहा है ''अच्छी किताबों का महत्त्व,उनके माने अब मैं समझता था,और जानता था कि उनका होना मेरे लिए कितना ज़रूरी है ...''
अहा! अद्भूत है यह चयन..
ये अनुभूतियाँ हृदय में उतरती हैं... अनुभूतियों को ज़मीन देने वाले उन साहित्यों को पढ़ने की ओर प्रेरित करती हुई सुंदर पोस्ट!

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