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Showing posts from August, 2011

गीत चतुर्वेदी की तीन नई कविताएं

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पथरीला पारितोषिक
इस दुनिया में जितनी भी पत्थरदिल औरतें हैं उनसे प्रेम करो और उन्हें पवित्र मूर्तियों में तब्दील कर दो जान लो वे निर्जन में छूट गई हैं अपनी कठोरता में उन्मत्त जिनके आगे कोई दिया नहीं जलता पथरीला पारितोषिक है यह प्रेम का कि उनके स्वप्नों में हमेशा रुदन में लहराती अखंड ज्योति आती आता जीवन में जो भी उनके आकार पर बेहद मस्ताता वे अपने मुलायम रेशों को कुबेरकोष की तरह छिपातीं कुछ सदियां ही एक पत्थर को मैं रुई कहता आया एक सुबह उठा उसे रुई में बदला हुआ पाया ****
टूटकर भी तनी हुई
जीवन जैसा भी था वर्तुल था सीधी रेखा बीच से टूटा हुआ वर्तुल थी टूटकर भी तनी हुई टूटने से भी तन सकता है कोई का आकार में अनुवाद वह जो चौरस था वह भी वर्तुल उसके चार केंद्र थे जो अपनी जगह से इतने अनमने कि ग्रामदेवताओं की तरह केंद्रीयता का बहिष्कार कर सीमाओं पर जा बसे हर आकार में वर्तुल होने का आभास था और यह भी कि जीवन का अर्थ आकार में नहीं, आभास में बसा होता है एक पत्थर थी भाषा के भीतर स्त्रीलिंगी होने की हैरत से भरी उसका स्त्रीत्व पहुंचा मुझ तक पहले फिर उसका पत्थर होना स्त्रीलिंगी पत्थरों क…

कथा : ७ : चन्दन पाण्डेय

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ज़मीन अपनी तो थी
जून की कोई शाम थी जो चौतरफा घिर चुकी थी पर अगली सुबह अनिकेत को दिल्ली होना था. बठिंडा के होटल से निकलते हुए उसे बीते दिन की तपिश का एहसास हुआ. होटल का मीटिंग हॉल पाबन्द था इस वजह से वहाँ लू और समाचार पूरे दिन नहीं पहुंच सके थे. अब सूर्य इस तरह डूब रहे थे कि अनिकेत की परछाईं बहुत लम्बी होकर होटल की दीवाल के सहारे टँगी हुई थी. दंगे के सबब मर्द मानुष कहीं नहीं थे वरना शाम के इस वक़्त परछाईयाँ भरपूर कुचली जातीं हैं. ऑफिस से खुश खुश निकले तो अनिकेत यह खेल अक्सर खेलता है. किसी की परछाईं पर खड़ा हो जाता है. ख़ासपसन्द,शाम पर पड़ती रितु की परछाईयाँ. पंजाब हरियाणा की सेल्स रिव्यू मीटिंग खत्म हुई ही हुई थी. हिन्दू होने की बिना पर होटल बिल जमा करते हुए भी वो दंगे की नहीं, दिन की गर्मी के बारे में सोचता रहा. दिखने सुनने में वह, सबकी तरह, दंगे के खिलाफ नजर आता था. जो सड़को पर घट रहा था उसका उसे रंज था पर दंगाई गतिविधियों से ज्यादा हैरान गर्मी कर रही थी. ऐसे मौसमों का आविष्कार अभी बाकी था जो आबादी देख और नारे सुन कर आया करें.शाम का रंग कुछ ऐसा था कि रिक्शे कहीं नहीं थे. सड़क के मुहाने पर …

कवि कह गया है : ७ : बेन ओकरी

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कविताऔरजीवन

बेनओकरी
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ईश्वर जानता है कि किसी भी समय के मुकाबले हमें कविता की ज़रूरत आज कहीं ज़्यादा है। हमें कविता से प्राप्त होने वाले दुष्कर सत्य की ज़रूरत है। हमें उस अप्रत्यक्ष आग्रह की ज़रूरत है, जो 'सुने जाने के जादू’ के प्रति कविता करती है।

उस दुनिया में, जहां बंदूक़ों की होड़ लगी हुई है, बम-बारूदों की बहसें जारी हैं, और इस उन्माद को पोसता हुआ विश्वास फैला है कि सिर्फ हमारा पक्ष, हमारा धर्म, हमारी राजनीति ही सही है, दुनिया युद्ध की ओर एक घातक अंश पर झुकी हुई है- हमें उस आवाज़ की ज़रूरत है, जो हमारे भीतर के सर्वोच्च को संबोधित हो।

हमें उस आवाज़ की ज़रूरत है, जो हमारी ख़ुशियों से बात कर सके, हमारे बचपन और निजी-राष्ट्रीय स्थितियों के बंधन से बात कर सके। वह आवाज़ जो हमारे संदेहों, हमारे भय से बात कर सके; और उन सभी अकल्पित आयामों से भी जो न केवल हमें मनुष्य बनाते हैं, बल्कि हमारा होना भी बनाते हैं- हमारा होना, जिस होने को सितारे अपनी फुसफुसाहटों से छुआ करते हैं।


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राजनीति की अपेक्षा कविता हमारे कहीं करीब है। वह हमारे लिए उतनी ही स्वाभाविक है जितना चलना और खाना।

जब हम जन्म लेते हैं…

व्योमेश शुक्ल की नई कविता

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शुरूआतकीशुरूआतयाअंतकेअंतमें

प्यास को लगती है बहुत तेज़ प्यास
भूख कई बार भूखी रह जाती है
नींद को नींद अगर आ गयी तो सपने सपना देखने लगते हैं
झूठ झूठ बोलता है कि वह सच है
सच बोलता है सच कि सच है उसका नाम
ग़लती से हो जाती है ग़लती प्यार को प्यार हो जाता है
सुन्दरता हो जाती है सुंदर चिड़िया चिड़िया हो जाती है आधी रात तक चहकती है - रात की सुबह से रात की रात तक
रात की दोपहर में बंदर तुलसी के पत्ते खाकर अपनी खांसी ठीक कर लेता है
इंतज़ार करता है देर तक इंतज़ार लहरें लहरों की तरह लहराती हुई आती हैं
हवा हवा सी पेड़ पेड़ सा फूल फूल सा

एक होता है यौवन का बचपन - बुज़ुर्ग यौवन से सीखता हुआ
सीखने की तरह सीखना है छपाक छपाक की तरह
बात बात से बात करती है बात बात से बात करता है
सुबह की सुबह के बाद सुबह की दोपहर के बाद सुबह की शाम शाम की दोपहर

शाम की शाम सितारों के सितारे और चाँद का चाँद
तुम्हारा आना तुम्हारे आने का इंतज़ार तुम्हारे आने की आहट
तुम्हारे आने की हवा तुम्हारे आने के समाज की राजनीति के आरम्भ के अंत से शुरू होने वाली बात का हल्का सा पुरानापन

यह जीवन-विन्यास हो भी सकता है
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{ व्योमेशशुक्लकीअन्यरचनाओंकोपढ़नेकेलिएयहांक्…