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Showing posts from April, 2010

पीयूष दईया की दो कविताएं

गीत चतुर्वेदी के लिए लिखी जा रही
एक काव्य-श्रृंखला से दो कविताएं


जब मैं कविताएं पढूं


देखना
जब मैं कविताएं पढूं
तब सभागृह में कोई न हो
जैसे भाषा या जीवन में

पढ़नेवाला
तो कत्तई नहीं
और सुननेवाला कल्पना तक से बाहर

और दर्शक भी
न रहे

आत्मा
जब मैं कविताएं पढूं

लिखता हुआ मिलूं
****
जाल जुलाहा

जाल जुलाहा
अकेला

जागा
अपने लिए

सारी आंख
जहां कोई पक्षी नहीं है

एक पिंजरा आकाश में
सीढ़ी है

गए फूलों से
वहां

या बारिश में गिर
एक बच रहा

है
जाल जुलाहा
****
( पीयूष दईया ने सबद पर इससे पूर्व भी हकु शाह के साथ अपनी बातचीत छपाई है. वह अब पुस्तकाकार ''मानुष'' नाम से आ चुकी है. इसके अलावा चित्रकार अखिलेश के साथ उनकी बातचीत ''अखिलेश : एक संवाद'' नाम से छपी है. वे लम्बे अरसे से कविताएं लिखते रहे हैं और उन्हें बहुत कम छपाया है. मेरे मालूमात में अब जाकर उनकी कविता पुस्तक ''चिह्न'''नाम से छप रही है. सबद पर शीघ्र ही उनकी लिखी हुई कथाएं छपेंगी. उन्हें हाल में कृष्ण बलदेव वैद फेलोशिप दी गई है, जिसके लिए बधाई! गीत चतुर्वेदी पर लिखी अपनी ये कविताएं उन्होंने गीत की एक अत्य…

सबद पुस्तिका : ३ : गीत चतुर्वेदी की लंबी कविता

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( हिंदीमेंउपलब्धलंबीकविताओंकीसूचीमेंगीत चतुर्वेदीकीइसलंबीकविताकोसिर्फआकार-प्रकारकीवजहसेशामिलकरउसकेबने-बनायेनिकषकीसहायतासेपढ़नाखासाअसुविधाजनकहोगा. इसमें ''एकसाथनजानेकितनेयुगचलरहेहैं : पृष्ठपरमुख्ययुगकापाठहै : पृष्ठभूमिमेंकितनेतोपढ़ेहुएऔरभूलचुकेभीपाठहैं''. गीतइनयुगीनसच्चाइयोंकोजिसअसम्बद्धकिन्तुआतंरिकप्रयोजनसेइसकवितामेंउपलब्धकरतेहैंवहविशिष्टहै. अभिव्यक्तिकेखतरोंकोउठानेकीजोनेकसलाहमुक्तिबोधकवियोंकोदेगएहैं, गीतजैसेकविउनपरगंभीरतासेअमलकरतेरहेहैं. इसलिहाजसेयेसब

विष्णु खरे की नई कविता

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नई रौशनी

( नागार्जुन भवानीप्रसाद मिश्र रघुवीर सहाय के क़दमों में )

अव्वल चाचा नेहरू आए..........................................जब राहुल दुल्हन लाएँगे
नई रौशनी वे ही लाए ............................................नई रौशनियाँ हम पाएंगे

इन्दू बिटिया उनके बाद.......................................बहन प्रियंका अलग सक्रिय हैं
नई रौशनी पाइंदाबाद ..........................................वड्रा जीजू सबके प्रिय हैं

हुए सहायक संजय भाई.........................................ये खुद तो हैं नई रौशनी
नई रौशनी जबरन आई .........................................इनकी भी हैं कई रौशनी

फिर आए भैया राजीव............................................यह जो पूरा खानदान है
डाली नई रौशनी की नींव.......................................राष्ट्रीय रोशनीदान है

आगे बढीं सोनिया गाँधी ........................................एकमात्र इसकी संतानें
पीछे नई रौशनी की आंधी .....................................नई रौशनी लाना जानें

सत्ता की वे नहीं लालची.................................क्या इसमें अब भी कुछ शक है
मनमोहन उनके मशालची ............…