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प्रार्थना

कमल के पत्ते-सा तुम्हारा मन हो जिस पर पानी की बूँद-सा दुःख गिरे जिसे मैं अपनी आँखों से चुन लूँ.

( उदयन वाजपेयी की कविता )

Comments

सागर said…
सुबह की शुरुआत सबद के साथ
shraddha said…
muzhe nahi malloom ki ye puri kavita hai ya kisi kavita ki ek pankti, par yah apne aap me puri kahani hai. chunav ke liye anurag ji ko badhai.
Mita Das said…
badi achhi pankti.naye sal ki suruat or saugat achhi rahi.bahut dino bad udayan ki kavita dekhi.achha lga.
vandana vats said…
naye saal ki ye achhi si saugat hai.
Farhan Khan said…
वाह ! ये छोटी सी पंक्ति तो बहुत कुछ ब्यान करती है

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