Tuesday, December 30, 2008

तीन श्रद्धांजलियाँ




पहले कवि-नाटककार हैरॉल्ड पिंटर, फ़िर चिंतक सैमुएल हंटिंगटन और अब चित्रकार मंजीत बावा के निधन की ख़बर आई है। रचना, विचार और कला की दुनिया को इन तीनों ने अलग-अलग ढंग से आलोकित किया। पिंटर ने कवि-नाटककार से आगे जाकर एक सार्वजनिक बौद्धिक की भूमिका का भी निर्वाह किया। मौजूदा वक्त में पिंटर सरीखे लेखक और जन बौद्धिक की प्रजाति लुप्तप्राय है। पिंटर का हमारे बीच से जाना इस सन्दर्भ में और भी दुखद है।

हंटिंगटन
को विचार-विमर्श की दुनिया में उनकी पुस्तक , '' The clash of civilizations and the remaking of world order'' की अत्यन्त मौलिक और विचारोत्तेजक स्थापनाओं के लिए याद किया जाता है। हंटिंगटन ने यह पुस्तक उस दौर में लिखी जब यह प्रश्न जिज्ञासा और आशंका के मिले-जुले स्वर में पुछा जा रहा था कि क्या आने वाले समय में सभ्यताओं का संघर्ष वैश्विक राजनीति के केन्द्र में होगा ? अपनी पुस्तक के ज़रिये उन्होंने इस सवाल का जवाब देने के अलावा सभ्यताओं के संघर्ष के बीच वैश्विक शान्ति और सहअस्तित्व कायम रखने के रास्ते भी बताए। कहना न होगा कि हंटिंगटन द्वारा शुरू किए गए विमर्श का दायरा आज कितना बड़ा हो गया है और एक साथ हम सभ्यतागत संकट और उसके नजदीकी संघर्ष से आए दिन कितना अधिक दो-चार हो रहे हैं। हंटिंगटन की तरह हमें भी तेजी से बदल रही दुनिया में इन सवालों का जवाब ढूंढते रहना होगा।

मनजीत
बावा को उचित ही कई लोग भारतीय चित्रकला में हुसेन, रामकुमार और रजा की पीढ़ी के बाद के चंद विलक्षण चित्रकारों में से एक मानते हैं। रामचंद्रन की तरह उनके यहाँ भी मिथकों का एक गहन चित्रान्वेषण मिलता है। मनजीत ने अपने जीवन के आखिरी तीन वर्ष कोमा में गुजारे।
सबद की ओर से पिंटर, हंटिंगटन और बावा को श्रद्धांजलि।

4 comments:

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

श्रद्धांजलि! इन तीनों ही महानुबावों ने अपने-अपने तरीके से संसार को काफी कुछ दिया है.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

तीनों हस्तियों को विनम्र श्रद्धांजलि!

ravindra vyas said...

मेरी भी श्रद्धांजलि।

Kumar Mukul said...

भाई अनुराग जी
अभी फेसबुक पर गीत चतुर्वेदी के यहां दोस्‍तोयवस्‍की के बारे में पढते आपके ब्‍लॉग का लिंक मिला। अच्‍छा लगा यहां आकर। यहां पढने लायक अच्‍छी सामग्री है। शुक्रिया पढता हूं यह सब ...