Sunday, March 04, 2018

वन नाइट स्टैंड के बाबत चंद जनाना फ़लसफ़े : बाबुषा कोहली की नई कविताएँ





बीयर

गए जुमेरात 
उसने ऊब को तह कर दराज में रखा और
शेल्फ़ से गिलास निकालते हुए कहा;

"बीयर पीने का मतलब शराबी होना नहीं होता. 
चलो ! एक पेग न सही, दो सिप ही ले लो ? "

"सच्चे शराबी बीयर नहीं पीते, लड़के !"

तटस्थता से मैंने कहा.
*

एच आई वी

"त्वचा पर चुभने वाली कोई भी नुकीली चीज़ 
हर बार नयी इस्तेमाल करने से
कम रहती है आशंका कुछेक लाइलाज रोगों की"

नयी सिरींज निकालते हुए बोली डॉ दोस्त 
हिदायती अंदाज़ में.

"त्वचा पर चुभने वाली कोई नुकीली चीज़
हर बार नयी होने पर
बढ़ सकती है आशंका कुछेक लाइलाज रोगों की."

विरक्त भाव से मैंने कहा.
* 

टाइटैनिक

औरतों के दिल में एक गुपचुप चूहेदानी होती है.

किसी अजनबी या मर्द दोस्त के कमरे में जाने के पहले
एक बार उस चूहेदानी में झाँक लेना ठीक होता है.

जो दुबके रहें चूहे 
तो ठीक
मची हो खलबली चूहेदानी में तो 
नहीं खटखटाना चाहिए कमरे का दरवाज़ा

जानती हो,
टाइटैनिक जब निकला था अपने पहले ( और आख़िरी)  सफ़र में;
उसके कप्तान को लगता था
कई बार वो लेकर गुज़रेगा ये जहाज़
समन्दर की बर्फ़ काटते हुए
इन इलाक़ों से

चूहे जबकि
दे रहे थे सब इशारे.
*

गुलज़ाफ़री

रात की काली चादर पर
मुरझा जातीं
गुलज़ाफ़री की मुलायम पंखुड़ियाँ

इतनी ही उम्र है इस दोशीज़: फूल की  

महकती सलवटों को
झटक देती 
भोर की पहली किरन
*
____________________________________(बाबुषा हिंदी की चर्चित युवा कवयित्री हैं।)

13 comments:

Sunita Katoch said...

बेहतरीन कविताएं। टाइटैनिक 👍👍👍💐

Hrishikesh Sulabh said...

बहुत अच्छी कविताएँ हैं।

Sandip Naik said...

छोटी मगर बेहतरीन कविताएं। बाबुषा के मिजाज के विपरीत बहुत ही छोटी पर सार्थक सन्देशों वाली खासकरके चूहेदानी का टाइटैनिक हो जाना या एड्स

बढ़िया। शुक्रिया अनुराग साझा करने के लिए

Smita Rajan said...

हमेशा की तरह बेहतरीन
एकदम अलहदा नया विषय
बहुत बधाई

Praveena Tripathi said...

वाह

Ajanta Deo said...

बेहद उम्दा कविताएं। बाबुषा तक मेरा अभिवादन पहुंचे

Parul Rastogi said...

बहुत अच्छी कविताएं!

Jasmine Mehta said...

अलहदा और उम्दा
साझा करने का शुक्रिया

Sunita Yadav said...

Congrats babu.....

Poonam Arora said...

These Poems are with a different perspective so they demand a little more space for them.

Love all the poems published on Sabad.

Ishita Rajan said...

Babusha is always able to write the most difficult in the most natural way! Appreciations!

Manisha Kulshreshtha said...

वन नाइट स्टैंड पर मुझे बाबुशा से और बेहतर कविताओं की उम्मीद, इनमें बाबुशा फेक्टर कम कम है

Pooja Priyamvada said...

reading Baabusha is getting submerged in the joycequeness of modern Hindi poetry, always a painful pleasure