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Showing posts from 2018

गीत चतुर्वेदी : कॉलम 19 : लैला की उँगलियाँ

प्रभात की ६ नई कविताएं

जीवनकेदिन
हमतोदेखतेहीहैंअपनेदिन जीवनभीहमेंअपनेदिनदिखाताहै ***
ईंधन
बोझेसेदबेदबेचलतेहुए वेआँधियोंसेजूझतीहैं जैसेपेड़जूझतेहैंनिराअकेले ***
आतपमेंपेड़
साधारणपेड़हैंये सूखतेहुएजीतेहुए
मेरेइलाकेकेगरीबहैंये जीवनकेप्रेमपड़ेहुए

गीत चतुर्वेदी : कॉलम 18 : प्रेम हमें स्वतंत्र करता है, समय हमारी हत्या