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Showing posts from September, 2017

गीत चतुर्वेदी : कॉलम 2 : नींद, मृत्यु का दैनिक अभ्यास है

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जब मृत्यु से मेरा पहला परिचय हुआ, मेरी उम्र सवा चौदह साल थी. एक दशक लंबी बीमारी के बाद मेरी बड़ी बहन का निधन हो गया था. अपने परिवार में सबसे ज़्यादा जुड़ाव मैं उन्हीं से महसूस करता था. उन्होंने मुझे बहुत सारी किताबें पढ़ाई थीं. जीवन, संगीत और बिल्लियों के बारे में बहुत सारी बातें बताई थीं. मेरी हैंड—राइटिंग उनकी हैंड—राइटिंग से बहुत मिलती—जुलती है, क्योंकि बरसों, उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर मुझसे लिखवाया था. जब मैं लिखना सीख गया था, उसके बाद भी. यह उनके लिए खेल की तरह था. जब वह मरीं, मैं बहुत रोया. रोते—रोते सो गया. उठने के बाद फिर रोने लगा. अपने घर से श्मशान तक मैं रोते—रोते गया. जब उनकी देह को आग दी गई, मैं और ज़ोर से रोया. तब तक यह उम्मीद थी कि वह लौट आएंगी. आग देने के बाद वह उम्मीद भी चली गई.
लौट आने की उम्मीद स्वर्ण की तरह होती है. सबसे क़ीमती, लेकिन सबसे नाज़ुक. कहते हैं, सोना सबसे नहीं संभलता, अचानक गुम हो जाता है. अभी आंख के सामने था, अभी ग़ायब हो गया. लौट आने की इसी उम्मीद में पुराने ज़माने में कुछ लोग लाशों को बचाकर रखते थे. देह बची रहेगी, तो एक दिन प्राण लौटकर आएगा. जो राजा थे…

पढ़ने के बारे में चार्ल्स सिमिक

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हम क्या पढ़ते हैं, यह तो हम सब सोचते हैं, लेकिन हम कहां पढ़ते हैं, किन जगहों पर पढ़ते हैं, चार्ल्स सिमिक का यह संक्षिप्त निबंध इस बारे में है. सूक्ष्मता और संक्षेपण सिमिक के महत्वपूर्ण गुण रहे हैं. जैसे इसी निबंध का संक्षेप उदाहरण की तरह है. सिमिक ने इसमें जितना कम लिखा है, इसे पढ़ने के बाद हमारी चेतना उतना ही सक्रिय हो जाती है और हम उसके आगे की बातें सोचने लगते हैं. जगहों के साथ अपनी किताबों और पढ़ने की अपनी आदतों के बारे में सोचते हैं. सिमिक अमेरिकी अंग्रेज़ी कवि हैं. यह निबंध ‘कन्फेशन्स ऑफ अ पोएट लॉरिएट’ से लिया गया है. ************************************************************************** मुझे किनारों से मुड़ा अपना प्लेटो पसंद है चार्ल्स सिमिक किसी नियम की तरह मैं कविता पढ़ने और लिखने का काम बिस्तर में करता हूं. दर्शनशास्त्र और गंभीर निबंधों को अपनी मेज़ पर पढ़ता हूं. अख़बारों और पत्रिकाओं को नाश्ता या खाने के समय. सोफ़ा या दीवान पर लेटकर उपन्यास पढ़ता हूं. इतिहास पढ़ने के लिए कोई अच्छी-सी जगह खोजना सबसे मुश्किल काम है, क्योंकि इतिहास पढ़ना दरअसल अन्याय और अत्याचार की कहानियां पढ़ना है. उसे कही…