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लैंग्स्टन ह्यूज़ की पांच कविताएँ

(1902 में जन्में लैंग्स्टन ह्यूज़ बीसवीं सदी के अमरीका में अश्वेत समुदाय के घोर उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले क्रांतिकारी रचनाकारों की अग्रिम पंक्ति में शुमार रहे. अट्ठारह वर्ष की आयु में लिखी गई "द नीग्रो स्पीक्स ऑफ़ रिवर्स" (The Negro Speaks of Rivers) शायद उनकी सबसे प्रसिद्ध कविता है. हार्लेम (Harlem) तो लगभग लोकगीत बन चुकी है. कवि होने के साथ-साथ लैंग्स्टन बहुत अच्छे गद्यकार भी थे. उनकी पांच कविताएं युवा कवि समर्थ वाशिष्ठ के अनुवाद में पढ़ें. समर्थ ने ये अनुवाद अंग्रेजी से किये हैं. )


photo by Henri Cartier-Bresson

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स्यू आंटी की कहानियां


स्यू आंटी के पास हैं सिरभर कहानियाँ
स्यू आंटी के पास हैं दिलभर कहानियाँ
अगले अहाते में गर्म रातें
स्यू आंटी लगाती हैं एक काले बच्चे को सीने
और सुनाती हैं कहानियाँ

काले ग़ुलाम
गर्म सूरज में करते काम
काले ग़ुलाम
चलते ओसभरी रातों में
काले ग़ुलाम
गाते दुःख के गीत घाटों पर
बड़ी-बड़ी नदियों के
घुलते हैं हौले-हौले
उन सायों से जो गुज़रते हैं बार-बार
स्यू आंटी की कहानियों से

और वो काला बच्चा सुनता
जानता है ये कहानियाँ नहीं मिली स्यू आंटी को
किसी भी किताब से
कि वे आईं सीधे ही निकल
उनके जीवन से


काला बच्चा चुप
गर्म रात
स्यू आंटी की कहानियाँ
***

अप्रैल: बारिश का गीत


बारिश को चूमने दो खुद को
बारिश को बजने दो अपने सिर सुनहरी बूंदों में
बारिश से सुनो लोरियां

बारिश बनाती है पोखर सड़क के किनारे
बारिश बनाती है बहते हुए पोखर गटर में
बारिश बजाती है नन्हा-सा निद्रा-गीत हमारी छत पर

और मैं बारिश से करता हूँ प्यार
***

नीग्रो करता है नदियों की बात


मैंने जाना है नदियों को :
मैंने जाना है उन नदियों को जो हैं पृथ्वी-सी पुरातन
मनुष्य की शिराओं में बह रहे ख़ून से भी पुरानी

नदियों-सी गहरी हो गई है मेरी आत्मा

मैं नहाया यूफ्रेट्स में जब सुबहें थी जवान
कॉन्गो के तट पर बनाई मैंने अपनी झोंपड़ी
उसकी लोरी सुनते हुए आई नींद
नील को बहता देखते हुए मैंने खड़े किए पिरामिड
जब ऐबे लिंकन गए न्यू ओर्लेअंस
सुना मैंने मिस्सिस्सिप्पी का गीत
और देखा सूर्यास्त में उसके मटमैले आँचल को
होते सुनहरा

मैंने जाना है नदियों को :
पुरातन, सांवली नदियों को

नदियों-सी गहरी हो गई है मेरी आत्मा।
***

हार्लेम


एक स्थगित सपने का क्या होता है?

  क्या वह सूख जाता है
  धूप में रखी किशमिश की तरह?
  या किसी नासूर-सा बिलबिलाकर
  फिर भागता है?
  क्या सड़ते हुए गोश्त-सी होती है उसकी गंध?
  या किसी चाशनीदार मिठाई में हो जाता है तब्दील
  चीनी की पपड़ी से ढंका?

  किसी बहुत भारी बोझ की तरह
  सिर्फ झूल जाता हो वह शायद।

  या होता है उसमें विस्फोट?
***
थकान

मैं बहुत थक गया हूँ
इस दुनिया के भली, सुंदर और उदार बनने का
इंतज़ार करते
तुम नहीं थके?
चलो एक चाकू लें
और काट डालें इस दुनिया को
दो हिस्सों में —
देखें कौन से हैं वे कृमि
जो खाते जा रहे हैं इसकी छाल
अंदर से।
***

14 comments:

हार्लेम और बारिश दिल को छूती है
सुंदर कविताएं
बहुत सुंदर अनुवाद
साझा करने का शुक्रिया सबद को


ऐसा ही कुछ पड़ने को मन कर रहा था।
शुक्रिया।


बेहद अच्छी पोस्ट।
एक नये काव्य-विवेक और संसार से परिचय कराती कविताएँ।
शुक्रिया सबद,शुक्रिया समर्थ।


Great poetry !!!
Beautifully translated !!


It was a nice read. I have always felt that Hughes poems are vagabond in nature. Which makes them very difficult to translate.
I liked the translations. Apt and crisp.
But somehow I feel that Harlem has lost its magic. Technically speaking Harlem is not written in any set meter or rhythm. But the configuration is surely musical. It lulls your mind, sings to your heart and still ask questions and keeps you on a quest.
As a reader I would have liked to experience the similar upsurging of emotions in the translated version.
But I must say translating Hughes is a bold attempt. Many congratulations to Samarth Vashisth.
And Thanks to you Anurag for this read


Nadiyo si gahri ho gayi hai Meri aatmaa....Extraordinary Expressions..


सबद और समर्थ बेहद शुक्रिया आप दोनों का , इन अनोखी और सार्थक कविताओं के लिए !

कहानी वाली वह कविता जिसमें कहानी कम जीवन ज़्यादा हो , मेहनतकश बारिश हो , साँवली नदियाँ हों और दुनिया की छाल उतारने का स्थगित सपना हो ; ऐसी रचनात्मकता का स्पर्श दिन बनाने को काफी है ।


सुंदर कविताएं
बहुत सुंदर अनुवाद
हार्लेम और बारिश दिल को छूती है
साझा करने का शुक्रिया सबद को


अभी पढ़ीं। दिल को छूने वाली प्रतिबद्ध कविताएं।


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