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अपशब्द प्रेम पर पांच कविताएँ : अजंता देव

2:00 am


© Anurag Vats 2017


अपशब्द प्रेम - 1

प्रेम संगीत की तरह
मेरे दिमाग़ में था
तुम तो वाद्य थे


अपशब्द प्रेम - 2


पानी का स्वभाव है बहना
रोकना चट्टान का
बहने से रोकने पर भी
रिस जाता है दरारों से
ज़मीन सोख लेती है
भाप बन कर उड़ जाता है
रुका हुआ पानी
चट्टान थमा रहता है
दर्ज करता हुआ इतिहास ।



अपशब्द प्रेम - 3

अपनी तस्वीर भी
बाज दफ़ा और की लगती है
एक युवा स्त्री
जो कैसे इठला कर खड़ी है
महबूब से लगकर
सौतिया डाह से सुलग जाता है शरीर
मैं रख देती हूँ उसके ऊपर
एक बूढ़े जोड़े का चित्र
जो बिल्क़ुल हमारी तरह लगता है
सच में, हू ब हू ।



अपशब्द प्रेम - 4

मेरा प्रेम
कृष्ण वर्ण है
विवर की तरह
गहरा और डरावना
पतनशील इसमें गिरते रहते हैं लगातार
एक नष्ट नीड़ का पता मिलता रहता है बदहवास लिखावट में
मुझे याद ना करना नामुमकिन है
अपशब्दों में आती रहूँगी बार-बार
तुम्हारे स्वप्नों में
जिसे तुम सुनाते समय दु:स्वप्न कहोगे
और मिथ्या तुम्हारे चेहरे पर पुत जाएगी कालिमा कालिमा
प्रेम के अखंड पाठ में मेरा ज़िक्र आएगा
संपुट की तरह ।


अपशब्द प्रेम - 5

निष्ठा सिर्फ़ एक जगह पहुँचाती है हमेशा
उसकी गति लयबद्ध होकर सुला देती है लोरी की तरह
आश्वस्ति धूल की तरह जम जाती है
कभी के चमकीले शीशे पर
आदत के बाहर ही रहता है प्रेम
अटपटा और आतुर
जैसे नयी भाषा का पहला अक्षर ।












अजंता देव की अन्य कविताएँ यहाँ पढ़ें.

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लैंग्स्टन ह्यूज़ की पांच कविताएँ

2:25 am

(1902 में जन्में लैंग्स्टन ह्यूज़ बीसवीं सदी के अमरीका में अश्वेत समुदाय के घोर उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले क्रांतिकारी रचनाकारों की अग्रिम पंक्ति में शुमार रहे. अट्ठारह वर्ष की आयु में लिखी गई "द नीग्रो स्पीक्स ऑफ़ रिवर्स" (The Negro Speaks of Rivers) शायद उनकी सबसे प्रसिद्ध कविता है. हार्लेम (Harlem) तो लगभग लोकगीत बन चुकी है. कवि होने के साथ-साथ लैंग्स्टन बहुत अच्छे गद्यकार भी थे. उनकी पांच कविताएं युवा कवि समर्थ वाशिष्ठ के अनुवाद में पढ़ें. समर्थ ने ये अनुवाद अंग्रेजी से किये हैं. )


photo by Henri Cartier-Bresson

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स्यू आंटी की कहानियां


स्यू आंटी के पास हैं सिरभर कहानियाँ
स्यू आंटी के पास हैं दिलभर कहानियाँ
अगले अहाते में गर्म रातें
स्यू आंटी लगाती हैं एक काले बच्चे को सीने
और सुनाती हैं कहानियाँ

काले ग़ुलाम
गर्म सूरज में करते काम
काले ग़ुलाम
चलते ओसभरी रातों में
काले ग़ुलाम
गाते दुःख के गीत घाटों पर
बड़ी-बड़ी नदियों के
घुलते हैं हौले-हौले
उन सायों से जो गुज़रते हैं बार-बार
स्यू आंटी की कहानियों से

और वो काला बच्चा सुनता
जानता है ये कहानियाँ नहीं मिली स्यू आंटी को
किसी भी किताब से
कि वे आईं सीधे ही निकल
उनके जीवन से


काला बच्चा चुप
गर्म रात
स्यू आंटी की कहानियाँ
***

अप्रैल: बारिश का गीत


बारिश को चूमने दो खुद को
बारिश को बजने दो अपने सिर सुनहरी बूंदों में
बारिश से सुनो लोरियां

बारिश बनाती है पोखर सड़क के किनारे
बारिश बनाती है बहते हुए पोखर गटर में
बारिश बजाती है नन्हा-सा निद्रा-गीत हमारी छत पर

और मैं बारिश से करता हूँ प्यार
***

नीग्रो करता है नदियों की बात


मैंने जाना है नदियों को :
मैंने जाना है उन नदियों को जो हैं पृथ्वी-सी पुरातन
मनुष्य की शिराओं में बह रहे ख़ून से भी पुरानी

नदियों-सी गहरी हो गई है मेरी आत्मा

मैं नहाया यूफ्रेट्स में जब सुबहें थी जवान
कॉन्गो के तट पर बनाई मैंने अपनी झोंपड़ी
उसकी लोरी सुनते हुए आई नींद
नील को बहता देखते हुए मैंने खड़े किए पिरामिड
जब ऐबे लिंकन गए न्यू ओर्लेअंस
सुना मैंने मिस्सिस्सिप्पी का गीत
और देखा सूर्यास्त में उसके मटमैले आँचल को
होते सुनहरा

मैंने जाना है नदियों को :
पुरातन, सांवली नदियों को

नदियों-सी गहरी हो गई है मेरी आत्मा।
***

हार्लेम


एक स्थगित सपने का क्या होता है?

  क्या वह सूख जाता है
  धूप में रखी किशमिश की तरह?
  या किसी नासूर-सा बिलबिलाकर
  फिर भागता है?
  क्या सड़ते हुए गोश्त-सी होती है उसकी गंध?
  या किसी चाशनीदार मिठाई में हो जाता है तब्दील
  चीनी की पपड़ी से ढंका?

  किसी बहुत भारी बोझ की तरह
  सिर्फ झूल जाता हो वह शायद।

  या होता है उसमें विस्फोट?
***
थकान

मैं बहुत थक गया हूँ
इस दुनिया के भली, सुंदर और उदार बनने का
इंतज़ार करते
तुम नहीं थके?
चलो एक चाकू लें
और काट डालें इस दुनिया को
दो हिस्सों में —
देखें कौन से हैं वे कृमि
जो खाते जा रहे हैं इसकी छाल
अंदर से।
***

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