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अम्बर रंजना पाण्डेय की तीन नई कविताएं

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दोपहर
गद्यजैसाखिंचावलगतागले औरहृदयकेबीच।प्यासशब्द पूरानहींपड़ता।वहदोपहरऐसी कविताएँथीजिसमेंकोईनहींथा। एकाकीशब्दभीछोटापड़जाता था, बारबारव्याकरणकीकिताब उठाकररखदेताघरकी सबसेऊँचीअल्मारीपर। एकदिनशामछहबजे, जब उसेछोड़करलौटरहाथा- मेघों सेभराहुआथाशहर।गाड़ियों कीलाइटकभीइधरकभीउधर चौंधतीथी। अंधेरेसेपहलेअँधेराहोगयाथा। बल्बोंसेभरगयाअचानक मेरीदोनोंकनपटियोंकेबीचका हिस्सा। ऊबऔरउत्तेजनासेमिलकर बनताहैसुखजिसकेकारणहम आत्महत्यानहींकरते।