सबद
vatsanurag.blogspot.com

महेश वर्मा की नई कविता

Joe-Webb-Mixed-Media-Collages

रकीब

एक नाम गड़ता है नींद में
और उंगली ढूँढने लगती है लिबलिबी का ठंडा लोहा
हम दोनो के ख़ाब गुस्सैल तलवारों की तरह टकराते हैं
और तीन रातों में चिंगारियां भर देते हैं

उसकी पीठ किसी से भी मिलती हो
उसका सीना मेरे जैसा नहीं होना चाहिए.

***

रकीब तुम्हारे शक के घर में रहता है शाहजादे
कहकर तीसरी रानी ने जो गज़ल गुनगुनाई वो यूं, के
            तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था
            न था रकीब तो आखिर वो नाम किसका था

फिर मन में लिया आशिक का नाम
और मासूमियत से पूछा -
 " सुबह कोई जोर से पुकारता था आपका नाम सीढ़ियों पर ?"

***

पहली फुर्सत में उसका क़त्ल कर देना चाहिए
ऐसी नसीहत देकर
ज़हरों के बारे में तफसील से फुसफुसाता है ज़हरफरोश
कान के बिलकुल नज़दीक.

सिर्फ़ मेरी बातें सुनकर
जैसा नीला यह कान हुआ है हुज़ूर आपका
ऐसे ही  दुश्मन के नाखून न हो जाएँ
तो ज़हर की बजाये कांवर पर शहद बेचूंगा : यहीं आपकी गलियों में.

***

रकीब सतरों के बीच से बोलता है
वो अक्सर माशूका की आवाज़ में बोलता है
वो एक दोमुहां सांप है
एक ज़हर आलूदा तीर

मैं उसकी इस चाल से क़त्ल हुआ
            कि मुझसे डरकर पीछे हटना
            और पीछे हटते
            मेरे इश्क के बिलकुल करीब पहुँच जाना

मैंने खुद माँगा उससे वो तीर
खुद अपना सीना चाक किया

और बाकी क्या था ?

***


आधी सदी से बैठा हूँ इन झाड़ियों में
के उसका सर कलम कर ही के लौटूंगा

मैंने उसे मार डाला है
सभी दरख़्त यही कह रहे हैं
यही फुसफुसा रही थी घास
यही सरगोशियाँ हवा की

कोई न कोई उसे बता देगा
कौन चाहेगा एक कातिल को ?

***

हम एक ही मौसम की हवाएं थे
एक ही आग को पीकर अंधे हुए दो लोग
एक ही बिजली से दागी गई जीभ लेकर
बोसों को भूले हुए दो लोग

हमें धूलभरी  हवाओं और कांटेदार झाड़ियों ने चाहा है

अगरचे इसने पहले दे दी जान
जीते जी मर जाऊंगा शिकस्त से
***

(महेश वर्मा हिंदी के चर्चित कवि हैं। उनकी कई कविताएं सबद पर पहले भी शाया हो चुकी हैं।)
8 comments:

lover of the beloved ! beautiful creation...


मैंने खुद माँगा उससे वो तीर
खुद अपना सीना चाक किया.....


बड़े गुढ़ और गहराई भरा है,, बेहतरीन।।!!


उसकी पीठ किसी से भी मिलती हो
उसका सीना मेरे जैसा नहीं होना चाहिए.
…इन बेहतरीन कविताओं को पढ़वाने के लिए धन्यवाद अनुराग


Disturbing but beautiful !


कोई दोस्त है न रकीब है,
तेरा शहर कितना अजीब है...

शक के घर में रहने वाले अपना नाम सुन क्यों न चौंक जायें भला | उदासियों और शिकस्तो के गहन तानेबाने को बुनती सुंदर कविताये | "और बाकी क्या था", शुक्रिया :)


बन गया रकीब आखिर .... बेहतरीन कविताएँ. स्मृतिवान कविताएँ हैं.

अगरचे इसने पहले दे दी जान
जीते जी मर जाऊंगा शिकस्त से


बेहतरीन कवितायें


सबद से जुड़ने की जगह :

सबद से जुड़ने की जगह :
[ अपडेट्स और सूचनाओं की जगह् ]

आग़ाज़


सबद का प्रकाशन 18 मई 2008 को शुरू हुआ.

संपादन : अनुराग वत्स.

पिछला बाक़ी

साखी


कुंवर नारायण / कृष्‍ण बलदेव वैद / विष्‍णु खरे / चंद्रकांत देवताले / राजी सेठ / मंगलेश डबराल / असद ज़ैदी / कुमार अंबुज / उदयन वाजपेयी / हृषिकेश सुलभ / लाल्‍टू / संजय खाती / पंकज चतुर्वेदी / आशुतोष दुबे / अजंता देव / यतींद्र मिश्र / पंकज मित्र / गीत चतुर्वेदी / व्‍योमेश शुक्‍ल / चन्दन पाण्डेय / कुणाल सिंह / मनोज कुमार झा / पंकज राग / नीलेश रघुवंशी / शिरीष कुमार मौर्य / संजय कुंदन / सुंदर चंद्र ठाकुर / अखिलेश / अरुण देव / समर्थ वाशिष्ठ / चंद्रभूषण / प्रत्‍यक्षा / मृत्युंजय / मनीषा कुलश्रेष्ठ / तुषार धवल / वंदना राग / पीयूष दईया / संगीता गुन्देचा / गिरिराज किराडू / महेश वर्मा / मोहन राणा / प्रभात रंजन / मृत्युंजय / आशुतोष भारद्वाज / हिमांशु पंड्या / शशिभूषण /
मोनिका कुमार / अशोक पांडे /अजित वडनेरकर / शंकर शरण / नीरज पांडेय / रवींद्र व्‍यास / विजय शंकर चतुर्वेदी / विपिन कुमार शर्मा / सूरज / अम्बर रंजना पाण्डेय / सिद्धान्त मोहन तिवारी / सुशोभित सक्तावत / निशांत / अपूर्व नारायण / विनोद अनुपम

बीजक


ग़ालिब / मिर्जा़ हादी रुस्‍वा / शमशेर / निर्मल वर्मा / अज्ञेय / एम. एफ. हुसैन / इस्‍मत चुग़ताई / त्रिलोचन / नागार्जुन / रघुवीर सहाय / विजयदेव नारायण साही / मलयज / ज्ञानरंजन / सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना / मरीना त्‍स्‍वेतायेवा / यानिस रित्‍सोस / फ्रान्ज़ काफ़्का / गाब्रीयल गार्सीया मारकेस / हैराल्‍ड पिंटर / फरनांदो पेसोआ / कारेल चापेक / जॉर्ज लुई बोर्हेस / ओक्टावियो पाज़ / अर्नस्ट हेमिंग्वे / व्लादिमिर नबोकोव / हेनरी मिलर / रॉबर्टो बोलान्‍यो / सीज़र पावेसी / सुजान सौन्टैग / इतालो कल्‍वीनो / रॉबर्ट ब्रेसां / उम्बेर्तो ईको / अर्नेस्‍तो कार्देनाल / ज़बिग्नियव हर्बर्ट / मिक्‍लोश रादनोती / निज़ार क़ब्‍बानी / एमानुएल ओर्तीज़ / ओरहन पामुक / सबीर हका / मो यान / पॉल आस्‍टर / फि़राक़ गोरखपुरी / अहमद फ़राज़ / दिलीप चित्रे / के. सच्चिदानंदन / वागीश शुक्‍ल/ जयशंकर/ वेणु गोपाल/ सुदीप बैनर्जी /सफि़या अख़्तर/ कुमार शहानी / अनुपम मिश्र

सबद पुस्तिका : 1

सबद पुस्तिका : 1
भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार के तीन दशक : एक अंशत: विवादास्‍पद जायज़ा

सबद पुस्तिका : 2

सबद पुस्तिका : 2
कुंवर नारायण का गद्य व कविताएं

सबद पुस्तिका : 3

सबद पुस्तिका : 3
गीत चतुर्वेदी की लंबी कविता : उभयचर

सबद पुस्तिका : 4

सबद पुस्तिका : 4
चन्‍दन पाण्‍डेय की कहानी - रिवॉल्‍वर

सबद पुस्तिका : 5

सबद पुस्तिका : 5
प्रसन्न कुमार चौधरी की लंबी कविता

सबद पुस्तिका : 6

सबद पुस्तिका : 6
एडम ज़गायेवस्‍की की कविताएं व गद्य

सबद पुस्तिका : 7

सबद पुस्तिका : 7
बेई दाओ की कविताएं

सबद पुस्तिका : 8

सबद पुस्तिका : 8
ईमान मर्सल की कविताएं

सबद पुस्तिका : 9

सबद पुस्तिका : 9
बाज़बहादुर की कविताएं - उदयन वाजपेयी

सबद पोएट्री फि़ल्‍म

सबद पोएट्री फि़ल्‍म
गीत चतुर्वेदी की सात कविताओं का फिल्मांकन

सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में

सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में
a film on love and loneliness

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन
किताबों की देहरी पर...

गोष्ठी : १ : स्मृति

गोष्ठी : १ : स्मृति
स्मृति के बारे में चार कवि-लेखकों के विचार

गोष्ठी : २ : लिखते-पढ़ते

गोष्ठी : २ : लिखते-पढ़ते
लिखने-पढ़ने के बारे में चार कवि-लेखकों की बातचीत

सम्‍मुख - 1

सम्‍मुख - 1
गीत चतुर्वेदी का इंटरव्‍यू

अपवाद : [ सबद का सहोदर ] :

अपवाद : [ सबद का सहोदर ] :
मुक्तिबोध के बहाने हिंदी कविता के बारे में - गीत चतुर्वेदी