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यादों में बाबा : रेवा नाग बोडस

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( हिंदी के चर्चित नाटककार और कहानीकार नाग बोडस पर उनकी बिटिया रेवा के स्मृतिरेख।)


1.

बाबा 
की लिखी पाण्डुलिपि पढ़ते हुए कभी भी मेरी आँखों के सामने उनके नाटक के पात्र नहीं आए। हर बार बाबा की छवि ही आई। शायद इसी वजह से मुझे उनका एक भी नाटक कभी समझ में नहीं आया। नाटक के दृश्य पढ़ते समय वह जगह दिखती रही, जहाँ वे दृश्य लिखे गए थे। पुराने नाटको में पुराना और नए नाटकों में नया घर दिखा। उनकी सोच कभी पकड़ नहीं पाई मैं। और हर बार ज्यादा और ज्यादा निराश  होती गई।
निराश क्योंकि मैं अपने पिता को समझ नहीं पा रही  थी! कई बार कोशिश की कि नाटकों को 'बाबा' की छवि से अलग करके पढ़ूं। पर नाकाम रही। फिर सोचा अगर मैं उनके दोनों अस्तित्वों को अलग समझूं-स्वीकारूं, तो शायद बात बने। 


तुम्हारे बाबा क्या करते हैं मुझे एक वाकया याद आता है। माँ, बाबा और मैं किसी ट्रेन में सफ़र कर रहे थे। सीनियर केजी में थी तब मैं। ट्रेन में किसी यात्री ने मुझसे बात करना शुरू की। नाम, माँ का नाम, पिता का नाम वगैरह बच्चों से पूछे जाने वाले सवालों के क्रम में उन्होंने जब पूछा कि तुम्हारे पापा क्या करते हैं,  तो मैं चुप रह गई। उन्होंने स…