Tuesday, April 22, 2014

एदुआर्दो चिरिनोस की कविताएं






एदुआर्दो चिरिनोस की नौ कविताएं
अनुवाद : गीत चतुर्वेदी




सात सतर में कविता

अगर तुम देख सके तो देखते हैं, उसने हंसते हुए कहा.

आज की रात लोमडिय़ां प्रकट होंगी खाने की तलाश में
गलियां कंबल की मानिंद ओढ़ लेंगी इस ठंड को
कोई गाएगा नहीं, मुर्दों का नृत्य कोई नहीं देखेगा
न ही सुबह के समय धधकते दक्षिण को.
जिस फूल को ख़ारिज कर दिया गया था, वह फिर खिल उठेगा.

अगर तुम देख सके तो देखते हैं, उसने रोते हुए कहा था.

*



अपने धुंधले मुंह से

अपने धुंधले मुंह से तब मैं
तुम्हारे पैर चूम लूंगा
- हुआन गेलमान

जल के विरुद्ध भय निर्बल है : जल ही
समय है, मृत्यु के हाथों में फंसी रेत है वह.

हम भूल जाते हैं ज्वाला को, जो बची रहती वह राख है.
स्मृति भी ठीक ऐसी ही होती है. रेत, पानी, होंठ और मृत्यु

चले जाने से पहले तुम मुझसे मिलने आती हो, मेरे लिए अपना नाम छोड़ जाती हो,
और चेहरे पर बसी लजीली लाली
अपने धुंधले मुंह से जिसे मैं चूम लेता हूं.
*


वे हाथ भी नहीं

जब कोई भी आत्मा उनका उच्चारण नहीं करती
तब शब्द भी सड़ जाते हैं

जब फंसे रहते हैं वे ज़बान पर और होंठों पर प्रहार करते हैं.
शब्द भी बड़ी ज़ोर की मार करते हैं

जब कोई भी आत्मा उनका प्रयोग नहीं करती
जब झूठ बोलने की आदी आंखें मुंद जाती हैं

और उन्हें कोई खोल नहीं पाता,
वे हाथ भी नहीं जिनमें जिज्ञासाएं तो बहुत हैं, पर उपयोगिता कुछ नहीं.
वैसे भी शब्दों के बारे में हाथ जानते ही क्या हैं
उन शब्दों के बारे में जिनकी हम प्रतीक्षा करते हैं, पर जो कभी नहीं आते?

इस तरह सड़ जाते हैं शब्द भी.
*

सूखी पत्तियां, बर्फ़

हालांकि शरद ऋतु अभी ख़त्म नहीं हुई
फिर भी कल शाम बर्फ़ गिरी है.
अब वे दोनों साथ रह रहे, बिना एक-दूसरे को छुए : सूखी पत्तियां, बर्फ़.

सुनने के लिए मुझे कानों की, देखने के लिए आंखों की ज़रूरत नहीं है
मेरा पूरा ध्यान उस बेमेल जोड़े की तरफ़ है जो शायद एक या दो रात ही साथ रहेगा.

सन्नाटे पर आखि़र किसकी मिल्कियत है?
बर्फ़ पत्तियों पर लाद देती है अपनी सफ़ेदी
उलीचती है अपनी रोशनी और किसी जवाब की प्रतीक्षा तक नहीं करती

पत्तियां एक साहसी राहत के बीच खड़ी रहती हैं, भयभीत-सी सरसराती हैं
फिर हवा उन्हें बहा ले जाती है
तोहफ़ों की तरह बर्फ़ पर बिछा जाती है

कैसा तो बेमेल जोड़ा है यह : सूखी पत्तियां, बर्फ़.
*


ख़ाली काग़ज़

ख़ाली काग़ज़ हमारे लिए क्या छिपाए रखते हैं?
नक़ाबपोश शब्द क्या इंतज़ार करते हैं हमारा

दुल्हन का जोड़ा पहन, गुलाब और ख़तों के साथ

वे ख़त जो पहले से लिखे जा चुके, राख और धूल के साथ
अकेली और मौन
जब तुम मेरा इंतज़ार कर रही हो

तो लिखने के लिए रहता ही क्या है?
*



कवि का घर

वहां उस पुरानी मेज़ पर बैठ
दान्ते ने डिवाइन कॉमेडी लिखी थी
वह इसी जगह चलता था
अपने इन्फर्नो या नर्क की आग में लकडिय़ां झोंकता हुआ
धागों से अपने छंदों को बुनता हुआ
वह इसी रसोई में अपने लिए कुछ न कुछ खाने को खोजता था

दान्ते के मकान में मैं रो पड़ा था
वही दिन था जब फिरेंसे ने हुवेन्तुस को 1-0 से हराया था
सूरज की रोशनी में पहाड़ी एकदम सुनहरी हो गई थी
और आर्नो नदी का पानी धोखे से बह रहा था

स्मारिकाएं बेचते उस नाटे-से शख़्स ने बताया
(बिल्कुल फुसफुसाती हुई आवाज़ में)
कि दान्ते ने इस घर में कभी पैर भी नहीं रखे थे

और यह सुन मुझे मुलायम-सी शर्मिंदगी हुई
*


  बिल्ली और चांद


जब भी मिलें दो बंधु,
नाच से बेहतर भला और क्या?
- डब्ल्यू. बी. येट्स

मेरी पड़ोसन की बिल्ली अपनी पीठ को मोड़
ऐसे अंगड़ाई लेती है
जैसे चांद की क़ला.
किसी बिल्ली की तरह चांद
उसकी मूंछों को चाटता है
और एक कटोरा दूध के लिए सुबकता है.

मेरी पड़ोसन टीवी देखती है
(वह विलाप नहीं करती)
फिर रेंगती हुई घुस जाती है घास में
नृत्य की कुछ नई मुद्राएं खोज लेती है

चेशायर पुस या मिनालूश*,
जो भी नाम हो उस बिल्ली का
आज की रात चांद थमा देता है उसका हाथ, मेरे हाथ में
और मैं उससे कहता हूं (बार-बार बदलने वाली अपनी आंखों से)

'मुझे माफ़ करना, लेकिन मुझे नाचना पसंद नहीं.'

(* चेशायर पुस : एलिस इन वंडरलैंड की किरदार बिल्ली का नाम.
मिनालूश : येट्स की बेटी की बिल्ली का नाम.)
*


भालू

भालुओं को समर्पित इस शहर में
आज तक मैंने कोई भालू नहीं देखा

एयरपोर्ट के लाउंज के सिवाय
जहां रुई ठूंसकर भालू का एक बड़ा पुतला खड़ा किया गया है.

आप जानते हैं इसकी कहानी?

इसे अलास्का में पोर्ट हीडेन के पास पाया गया था
कोई शिकारी इसे वहीं छोड़ गया था
ताकि चिडिय़ां इसे नोंच-नोंचकर अपना पेट भर सकें

कोई भलामानुस इसे वहां से ले आया
और बर्फ़ के भीतर जमाकर इस तरह खड़ा कर दिया
कि समय (और हर मौसम भी)
हमेशा के लिए थम गया लगता है

कांच के जिस बक्से में इसे रखा गया है, वहां बेतरह सन्नाटा है
शिकारी के लौट आने की प्रतीक्षा कर रहा है भालू

उसे पता है शिकारी ज़रूर आएगा. वह अब भी उसका इंतज़ार कर रहा है.
*


मिसूला पहुंचने के लिए

बरसों पहले
मैंने मिसूला के बारे में रॉबर्ट ब्लाय की एक कविता पढ़ी थी.

मुझे अब भी याद है वह कविता
उसमें सर्दियों की एक सुबह ट्रेन से मिसूला जाने का जि़क्र था
बहुत सारी छायाएं पीछे छूट रही थीं
और धुंध से ढंकी हुई खिड़कियों के पार
पहाड़ों के ढांचे दिख रहे थे.
मिसूला पहुंचने के लिए बर्फ़ का होना ज़रूरी है
ताकि हम गुज़र सकें 'नरकद्वार' से
पुराने दिनों में उस जगह का यही नाम था.

गर्मी की एक दुपहर
हम यहां कार से पहुंचे. सच में बेहद धूप थी.
फिर भी कविता के भीतर की वह सर्द लहर अब भी हमारा पीछा क्यों कर रही?

मिसूला जाना है, तो
ज़रूरी है कि एक ट्रेन हो
धुंध से ढंकी खिड़कियां हों और कम से कम
थोड़ी-सी बर्फ़ तो ज़रूर ही बरस रही हो.
*



(पेरू के कवि एदुआर्दो चिरिनोस के स्पैनिश में बारह और अंग्रेज़ी में दो कविता संग्रह प्रकाशित हैं। उन्हें समकालीन स्पैनिश कविता के श्रेष्ठ कवियों में से माना जाता है। संप्रति वह मोंटाना यूनिवर्सिटी में लातिन अमेरिकी साहित्य पढ़ाते हैं। यहां दी जा रही कविताएं जी. जे. राश द्वारा अनूदित उनके संग्रह 'रीजन्स फॉर राइटिंग पोएट्री' से ली गई हैं। सबद पोएट्री फिल्‍म – 3 में उनकी कविता का प्रयोग किया गया है। उसे यहां देख सकते हैं। कविताओं के साथ लगी पेंटिंग्‍स पोलिश पेंटर इवोना सिवेक फ्रॉन्‍ट की हैं।)

7 comments:

sarita sharma said...

एदुआर्दो चिरिनोस की इन कविताओं में बिखराव और उदासी का भाव बना रहता है.खालीपन और खोखलेपन को निरंतर महसूस किया जा सकता है. अपेक्षित शब्दों की प्रतीक्षा और उन्हें न सुने जाने की निराशा को 'शब्द सड जाते हैं' कह कर प्रकट किया गया है. नर्क का उल्लेख बहुत कुछ स्पष्ट कर देता है.सूखी पत्तियों और बर्फ का बेमेल जोड़ा अनेक जोड़ों की सच्चाई है.'खाली कागज' खाली मन है.'दान्ते का घर' उसकी पीड़ा का स्मरण कराता है.' बिल्ली और चाँद' टी एस एलियट की प्रुफ्रोक कविता की तरह महिला और बिल्ली में साम्य दर्शाती है.भालू शहर के छलकपट और थमे हुए समय का प्रतीक है.मिसूला पहुँचने के लिए 'बर्फ का नर्कद्वार' और 'धुंध से ढंकी खिडकियों वाली ट्रेन' चाहिए क्योंकि कवि वहां गर्मी में पहुँचता है मगर मन में रॉबर्ट ब्लाय की कविता गूँज रही है जिसमें मिसूला का जिक्र किया गया था.

सज्जन धर्मेन्द्र said...

राबर्ट फ़्रास्ट कहते हैं - अनुवाद में जो खो जाती है वही कविता है। गीत चतुर्वेदी अनुवाद में भी कविता बचा ले जाते हैं, उनकी इस विलक्षण प्रतिभा को नमन। चिरिनोस की कविताएँ पढ़वाने के लिये सबद का आभार।

Mahesh Verma said...

सन्नाटे पर आखि़र किसकी मिल्कियत है?
बर्फ़ पत्तियों पर लाद देती है अपनी सफ़ेदी
उलीचती है अपनी रोशनी और किसी जवाब की प्रतीक्षा तक नहीं करती

बेहतरीन अनुवाद.शुक्रिया आपका.

Bindiya Solanki said...

Nice

Tan Vir said...

उन शब्दों के बारे में जिनकी हम प्रतीक्षा करते हैं, पर जो कभी नहीं आते? great line, कवि का घर, मिसूला पहुंचने के लिए great poems

बिल्ली और चांद , सूखी पत्तियां, बर्फ़ great poems, thanks geet ji

Bina Vachani said...

beautifully expressed the bitter truth of life !!Thanks Geet Chaturvedi !!

Sudhir Dhir said...

bahut umda