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Showing posts from April, 2014

स्मृति-शेष : ताद्यूश रूज़ेविच

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[ पोलिश कवि ताद्यूश रूज़ेविच का 24 अप्रैल को 92 वर्ष की आयु में देहांत हो गया। मूर्धन्य हिंदी कवि
कुंवर नारायणने रूज़ेविच की कई कविताओं का वक़्त-वक़्त पर हिंदी में अनुवाद किया है। हम श्रद्धांजलि स्वरूप उनमें से 4 काव्यानुवाद प्रकाशित कर रहे हैं।  ]



तमाम कामकाज के बीच
तमाम कामकाज के बीच
मैं तो भूल ही गया था
कि मरना भी है

लापरवाही
में उस कर्त्तव्य से कतराता रहा
या निबाहा भी
तो जैसे तैसे

अब कल से
रवैया बिल्कुल फ़र्क़ होगा

बहुत ही संभल-संभल कर मरना शुरू करूंगा
बुद्धिमत्ता से ख़ुशी-ख़ुशी
बिना समय बरबाद किये। ***
प्रूफ़

मौत नहीं ठीक करेगी कविता की एक भी पंक्ति वह प्रूफ़-रीडर नहीं है न किसी संपादिका की तरह हमदर्द
घटिया रूपक अमर हो जाता
एक रद्दी कवि मरणोपरान्त भी मरा हुआ रद्दी कवि ही रहेगा
एक बोर मर कर भी बोर ही करता एक मूर्ख क़ब्र के उस पार से भी अपनी मूर्ख बकवास जारी रखता ***

सौभाग्य
कैसा सौभाग्य कि जंगलों में रसभरियां चुन सकता हूं मेरा ख़याल था कि न अब जंगल हैं न रसभरियां
कैसा सौभाग्य कि पेड़ की छाया में लेटा रह सकता हूं मेरा ख़याल था कि पेड़ अब छाया नहीं देते।
कैसा सौभाग्य कि मैं …

एदुआर्दो चिरिनोस की कविताएं

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अपने व्याकरण में प्रेम और अनुवाद एक जैसे होते हैं

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प्रेम और अनुवाद : एक संक्षिप्‍त निबंध आंद्रेस न्‍यूमान अनुवाद – गीत चतुर्वेदी
अपने व्‍याकरण में प्रेम और अनुवाद एक जैसे होते हैं. किसी से प्रेम करने का अर्थ है, उसके शब्‍दों को अपने शब्‍दों में ढाल लेना. उसे समझने का प्रयास करना, और अनिवार्यत:, उसे ग़लत समझना. दोनों के बीच एक साझा अस्थिर भाषा की रचना करना. किन्‍हीं शब्‍दों का संतोषपूर्ण अनुवाद करने के लिए ज़रूरी है कि आप उन शब्‍दों की इच्‍छा करें. उनके अर्थ के भोग का लोभ करें. उसकी ध्‍वनि को ख़ुद पर क़ाबिज़ होने देने की चाह करें. इस संवाद के दो सिरे होते हैं- नित्‍य और सम्‍मोहन. एक पूर्व-अर्जित ज्ञान है, दूसरा प्रक्रिया में अर्जित ज्ञान है. आप पाते हैं कि दोनों सिरों में संशोधन होने लगता है.
आप ख़ुद को अपने प्रेमी के भीतर देखने लगते हैं. दोनों को भिन्‍न करने वाले बिंदुओं को भी समानता के बिंदुओं की तरह देखते हैं. हर छोटी खोज को अपनी साझा भाषा में अभिव्‍यक्‍त करते हैं. इसके बावजूद, उसकी भाषा को पकड़ लेने की आप कितनी भी कोशिश क्‍यों न करें, अंत में आप पाते हैं कि आपने जो कुछ सीखा, अपनी भाषा के बारे में सीखा, उसकी भाषा के बारे में नहीं. इन…