Sunday, March 23, 2014

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन




सबद की यह तीसरी पोइट्री फिल्‍म किताबों से हमारे लगाव के बारे में है. इसके किरदार इस लिहाज से हमारे पास-पड़ोस में आबाद वैसी जगहें भी हैं, जिनकी देहरी पर किताबों के दरस-परस की आकांक्षा लिए हम जाते हैं. वहां होने का अपना हर्ष और अवसाद है. यह फिल्‍म इन एहसासों को कविताओं के जरिए दर्ज करती है. जिन दो कवियों की कविताएं फल्मि में शामिल की गई हैं, वे हैं - हिंदी के वरिष्‍ठ कवि कुंवर नारायण और स्‍पैनिश कवि एदुआर्दो चिरिनोस.

फिल्‍म का लिंक यहां और कविताओं के पाठ आगे हैं.    



पहले भी आया हूं
- कुंवर नारायण

जैसे इन जगहों में पहले भी आया हूं
                      बीता हूं.
जैसे इन महलों में कोई आने को था
मन अपनी मनमानी ख़ुशियां पाने को था.
लगता है इन बनती मिटती छायाओं में तड़पा हूं
किया है इंतज़ार
दी हैं सदियां गुज़ार
बार-बार
इन ख़ाली जगहों में भर-भर कर रीता हूं
रह-रह पछताया हूं
पहले भी आया हूं
        बीता हूं.
* * * *


वे हाथ भी नहीं
- एदुआर्दो चिरिनोस

जब कोई भी आत्मा उनका उच्चारण नहीं करती
तब शब्द भी सड़ जाते हैं

जब फंसे रहते हैं वे ज़बान पर और होंठों पर प्रहार करते हैं.
शब्द भी बड़ी ज़ोर की मार करते हैं

जब कोई भी आत्मा उनका प्रयोग नहीं करती
जब झूठ बोलने की आदी आंखें मुंद जाती हैं

और उन्हें कोई खोल नहीं पाता,
वे हाथ भी नहीं जिनमें जिज्ञासाएं तो बहुत हैं, पर उपयोगिता कुछ नहीं.
वैसे भी शब्दों के बारे में हाथ जानते ही क्या हैं
उन शब्दों के बारे में जिनकी हम प्रतीक्षा करते हैं, पर जो कभी नहीं आते?

इस तरह सड़ जाते हैं शब्द भी.


(अनुवाद – गीत चतुर्वेदी)

* * * *

सबद की पिछली दो पोएट्री फिल्‍में यहां और यहां. 


9 comments:

sarita sharma said...

गीत और अनुराग वत्स ने मिलकर शानदार काव्य फिल्म बनायीं है. जब तक अनुराग वत्स भोपाल में है, ऐसी खूब सारी फ़िल्में लघु कविता फ़िल्में बना डालिए. कविताओं, स्वर और संगीत का अद्भुत तालमेल है. किताबों की दुनिया में खो जाना जीवन का सबसे सुन्दर पल है.

Mukesh Mishra said...

यह प्रस्तुति इस अहसास और समझ को पुनः पुख्ता बनाती है कि पुस्तकें हमारे अनुभव-विश्व को विस्तार देती हैं, और उसे प्रशस्त व सघन करती हैं; हमारे अवकाशों को तथा हमारी अपूर्णता को भरती हैं |

Vinod Vithall said...

शानदार

Sandhya Kulkarni said...

लाजवाब ! पहले भी आया हूँ यहाँ ...

Bina Vachani said...

Badahi ho!!Pretty dedicated !!

Pramila Maheshwari said...

Good to see two book lovers ! and mummification of words in this video

Sandeep Rawat said...

बहुत अच्छी !

Shridhar Nandedkar said...

bahut sundar badhai geetbhai aur anurag ji ko....

Pratibha gotiwale said...

बार-बार
इन ख़ाली जगहों में भर-भर कर रीता हूं.........सुन्दर प्रस्तुति