Skip to main content

Posts

Showing posts from March, 2013

रानीखेत एक्‍सप्रेस - दूसरा अंश - गीत चतुर्वेदी

[युवा कवि-कथाकार गीत चतुर्वेदी का उपन्‍यास 'रानीखेत एक्‍सप्रेस' शीघ्र प्रकाश्‍य है. 
सबद पर इससे पहले इस उपन्‍यास का एक अंश प्रकाशित हो चुका है. यह दूसरा अंश-]


जिस समय मुझे चाय चाहिए थी, जि़ंदगी ने मेरे सामने डिनर रख दिया। और जिस समय डिनर चाहिए था, उस समय चाय रख दी।

अब सूरज कोई मेरा ससुरा तो है नहीं कि आधी रात उग आए और कहे, तुम चाय पी सको, इसलिए मैंने उगने का अपना समय बदल लिया।

यह एक छोटी-सी कहानी है। एक छोटी-सी चिडिय़ा की छोटी-सी कहानी। काश, ये एक लंबी कहानी होती, उम्र से लंबी एक कहानी, तब शायद यह बहुत सुंदर होती।

छोटी कहानियां जल्दबाज़ होती हैं। वे अपनी उम्र को जल्दी-जल्दी जीती हैं, वे ख़त्म होने का इंतज़ार नहीं कर पातीं, बस, जल्दी से ख़त्म हो जाना चाहती हैं।

हा हा। हड़बड़े पुरुषों के शीघ्र-स्खलन की तरह।

पर छोटी कहानियां अपने असंतोष के कारण बची रह जाती हैं। होता यह है कि कई बार लंबी कहानियां आपको इतना संतुष्ट कर देती हैं कि आप उन्हें भूल जाते हैं। जबकि छोटी कहानियां आपको इस क़दर असंतोष देती हैं कि आपकी स्मृति से चिपक जाती हैं।

असंतोष संजीवनी बूटी की तरह होता है। आपको बार-बा…

वृत्तांत : प्रत्यक्षा

जाना था रंगून...
प्रत्यक्षा

No man ever steps in the same river twice, for it's not the same river and he's not the same man. - Heraclitus.
यह 
दूसरा चक्कर लगना था चीन का। इस बार लगता था कि तैयारी अच्छी है क्योंकि कुछ चीनी भाषा भी सीख ली थी। चीनी यानी मैन्दरीन, लिखना नहीं सीखा था लेकिन मैन्दरीन फिन्यीन पद्धति से पढ़ना सीखा था तीन महीने। तीन महीने बहुत कम हैं, लेकिन भोलेपन का अपना अभिमान होता है और उस अभिमान ने यह भी भुला दिया था कि सीखे और भूले भी छह महीने के ऊपर निकल चुके थे। फिर इस बार चिंता का विषय यह था कि वहां माईनस तेरह का तापमान था और मेरे पास तरीके के कपड़े नहीं थे।
फ्लाइट वाया हॉंन्गकॉंग थी। बीजींग से दो ढाई घँटे की दूरी पर रेनचियू नाम की जगह। रात की फलाईट। अगले दिन ढलते बीजींग, फिर वहां से गाड़ी से आगे। एअरपोर्ट से ही ठंड का नज़ारा होने लगा। हमने जैकेट और टोपी निकाला। लैस हुए। बिल्डिंग से पार्किंग़ तक के पाँच मिनट में हाथ-पाँव सर्द। गाड़ी में बैठते फिर सुकूनदायक गर्माहट। हाईवे से निकलते ही सड़क के दोनों ओर पतली परतों में बर्फ। हम जितना भीतर जाते, उतना लगता कि जैसे बर्फ के …

जस्ट टियर्स