Wednesday, February 20, 2013

स्मृतियां जाना नहीं जानतीं



जहां बहुत का 'त' ख़त्म होता हो वहीं से शुरू करना - होना, वहीं से प्रेम.
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हर प्रेम का अपना अलग व्याकरण है, लेकिन वैयाकरण प्रेमी नहीं.
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नहीं की निधि में रोज़ एक उदास सिक्का गिरता है.
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आकांक्षा एक सुंदर फूल है, झर जाने तक, सुंदर और दुर्निवार.
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आदतों की कोई नैतिकता नहीं.
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अलगाव एक मृत्यु है, एक ऐसी मृत्यु, जिसका कोई 'संस्कार' अंतिम नहीं.
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स्मृति-छल मानुष-छल से अलग है, स्मृतियां जाना नहीं जानतीं.
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थकान पहली निराशा है, अंतिम भी.
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अंत में सिर्फ़ अभिनय काम आता है.
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 [ ऊपर इधर लिखे गए कुछ वाक्य हैं. ]
{ साथ दी गई पेंटिंग Sir William Rothenstein की है. }

25 comments:

Kanchan Lata Jaiswal said...

अंत में सिर्फ़ अभिनय काम आता है.
मनुष्य इस दुनियावी रंगमंच का सिद्धहस्त कलाकार है.

प्रवीण पाण्डेय said...

शब्दों का संवाद गुन रहे हैं।

Ela Charan said...

अंत में सिर्फ़ अभिनय काम आता है
अभिनेता के जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी।

Rajendra Kumar said...

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति.

Pratibha Katiyar said...

Ultimate!

Vipin Choudhary said...

इन छोटी-छोटी पंक्तियों में जीवन का सच सीधा लेटा हुआ है। जीवन में जिस तरह अभिनय का सहारा लाज़मी है उसी तरह आकांक्षा की सुन्दरता और उसी तरह जीवन में स्मृतियों का ठहराव। विचारों के इन सुंदर मोतियों को पाठकों को उपलब्ध करवाने के लिए शुक्रिया अनुराग

Rukhsana Attari said...

Ashaa aur nirashaa ke dhagon se bune jeevan ke gahre arthon ko itne saral aur kam shabdon me itne asaardar dhang se kahne ka hunar kabile Tareef hai

chaina karmakar said...

words are few to express....these few lines some where touched the inner core of my soul as if i am living these words...silence silence and stillness.....beautiful lines..

अपर्णा मनोज said...

आकांक्षा एक सुंदर फूल है, झर जाने तक, सुंदर और दुर्निवार.

mark rai said...

saari panctiyon me kuch na kuch bhaaw chipa hua hai ...khaaskar ye line kaphi achchi lagi..नहीं की निधि में रोज़ एक उदास सिक्का गिरता है....

Om Nishchal said...

आजीवन रहना है सुधि के तहखाने में।

Jyoti Nanda said...

अंत में सिर्फ़ अभिनय काम आता है........आह ..... सच

peer educators said...

स्मरतियाँ कहाँ जाती हैं, वो तो दिल के कौने में दुबक कर बैठ जाती हैं.... पूरी जिंदगी, एक अभिनय सा करती है बस अंत ही सत्य लगता है ....!

अनुपमा तिवाड़ी

madhu said...

बहुत सुन्दर...

Riyaz khan khan said...

zindagi ki biti hui yado ko, apne shabdo mein wyakt karke mano gagar me sagar dal diya h ap ne.

Ratnesh said...

अंत में सिर्फ़ अभिनय काम आता है
.
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Adbhut hai

दीपशिखा वर्मा / DEEPSHIKHA VERMA said...

बहुत सुन्दर है...एक-एक शब्द!

Vinay Jha said...

अनुराग जी! बहुत अच्छी पंक्तियाँ हैं। कहीं गहरे में अवचेतन मन को छूतीं सी जान पडतीं हैं।।और एहसास दिलातीं हैं कि अतल गहराइयों में एक ही चेतना को संजोये हैं हम सभी। धन्यवाद!

Geet Chaturvedi said...

बड़ी सुंदर पंक्तियां हैं.

Ranjana Tripathi said...

खूबसूरत रचना.....

Suman Malik said...

सत्य तुम कितने निष्ठुर हो ...

MarketSpeak said...

Reads as if someone has put together all the 'punch lines' together. They hit you hard, very impactful Anurag.

vandana khanna said...

jeewan ko sundar wakyon mein kaha aapne anurag ji

Madhu Maddy said...

Simply loved the line.

leena malhotra said...

नहीं की निधि में रोज़ एक उदास सिक्का गिरता है. khoobsoorat