सबद
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स्मृतियां जाना नहीं जानतीं



जहां बहुत का 'त' ख़त्म होता हो वहीं से शुरू करना - होना, वहीं से प्रेम.
*
हर प्रेम का अपना अलग व्याकरण है, लेकिन वैयाकरण प्रेमी नहीं.
*
नहीं की निधि में रोज़ एक उदास सिक्का गिरता है.
*
आकांक्षा एक सुंदर फूल है, झर जाने तक, सुंदर और दुर्निवार.
*
आदतों की कोई नैतिकता नहीं.
*
अलगाव एक मृत्यु है, एक ऐसी मृत्यु, जिसका कोई 'संस्कार' अंतिम नहीं.
*
स्मृति-छल मानुष-छल से अलग है, स्मृतियां जाना नहीं जानतीं.
*
थकान पहली निराशा है, अंतिम भी.
*
अंत में सिर्फ़ अभिनय काम आता है.
****
                                                                                                     
                                           
 [ ऊपर इधर लिखे गए कुछ वाक्य हैं. ]
{ साथ दी गई पेंटिंग Sir William Rothenstein की है. }

25 comments:

अंत में सिर्फ़ अभिनय काम आता है.
मनुष्य इस दुनियावी रंगमंच का सिद्धहस्त कलाकार है.


शब्दों का संवाद गुन रहे हैं।


अंत में सिर्फ़ अभिनय काम आता है
अभिनेता के जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी।


बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति.


इन छोटी-छोटी पंक्तियों में जीवन का सच सीधा लेटा हुआ है। जीवन में जिस तरह अभिनय का सहारा लाज़मी है उसी तरह आकांक्षा की सुन्दरता और उसी तरह जीवन में स्मृतियों का ठहराव। विचारों के इन सुंदर मोतियों को पाठकों को उपलब्ध करवाने के लिए शुक्रिया अनुराग


Ashaa aur nirashaa ke dhagon se bune jeevan ke gahre arthon ko itne saral aur kam shabdon me itne asaardar dhang se kahne ka hunar kabile Tareef hai


words are few to express....these few lines some where touched the inner core of my soul as if i am living these words...silence silence and stillness.....beautiful lines..


आकांक्षा एक सुंदर फूल है, झर जाने तक, सुंदर और दुर्निवार.


saari panctiyon me kuch na kuch bhaaw chipa hua hai ...khaaskar ye line kaphi achchi lagi..नहीं की निधि में रोज़ एक उदास सिक्का गिरता है....


आजीवन रहना है सुधि के तहखाने में।


अंत में सिर्फ़ अभिनय काम आता है........आह ..... सच


स्मरतियाँ कहाँ जाती हैं, वो तो दिल के कौने में दुबक कर बैठ जाती हैं.... पूरी जिंदगी, एक अभिनय सा करती है बस अंत ही सत्य लगता है ....!

अनुपमा तिवाड़ी


बहुत सुन्दर...


zindagi ki biti hui yado ko, apne shabdo mein wyakt karke mano gagar me sagar dal diya h ap ne.


अंत में सिर्फ़ अभिनय काम आता है
.
.
Adbhut hai


बहुत सुन्दर है...एक-एक शब्द!


अनुराग जी! बहुत अच्छी पंक्तियाँ हैं। कहीं गहरे में अवचेतन मन को छूतीं सी जान पडतीं हैं।।और एहसास दिलातीं हैं कि अतल गहराइयों में एक ही चेतना को संजोये हैं हम सभी। धन्यवाद!


बड़ी सुंदर पंक्तियां हैं.


खूबसूरत रचना.....


सत्य तुम कितने निष्ठुर हो ...


Reads as if someone has put together all the 'punch lines' together. They hit you hard, very impactful Anurag.


jeewan ko sundar wakyon mein kaha aapne anurag ji


नहीं की निधि में रोज़ एक उदास सिक्का गिरता है. khoobsoorat


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सबद का प्रकाशन 18 मई 2008 को शुरू हुआ.

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