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Showing posts from August, 2012

एक मेहनती दिन ध्यान का भूगोल बदल देता है

हानि-बोध
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इंतज़ार हुसैन की एक कहानी है : ३१ मार्च. इसमें प्रेमियों के बीच मोहब्बत की मियाद जब पूरी हो जाती है तो लड़के को तमाम बातों के बीच यह बात भी बेतरह सालती रहती है कि उसने लड़की को जितने ख़त लिखे थे, उनमें कई मुहावरे और कोट्स ग़लत लिख गए थे. लड़का एक आखिरी ख़त और लिखता है, जिसमें मुहावरों के अलावा सार्त्र, कामू, लॉरेंस वगैरह के कोट्स कहां-कहां से ग़लत हैं, उसका हवाला होता है. मुझे एक प्रेम कहानी के बीच इस विरल हानि-बोध ने बहुत बांधा. हम प्रेम के अंत के बाद या तो तकलीफ़ के समंदर में गोते लगाते रहते हैं या एक असाध्य प्रति-हिंसा ( malignant vengeance ) को अपना मन सौंप देते हैं. कितना कम ख़याल और पछतावा होता है हमें ऐसी ग़लतियों का !
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Waiting is being.
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Love is a schoolboy word of four letters.
One who goes to life's school, loves everyday.
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Ignorance liberates.
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'' कितनी ही पीड़ाएं हैं / जिनके लिए कोई ध्वनि नहीं ''

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गीत चतुर्वेदी की इस काव्य-पंक्ति को मैंने कई दफ़ा एक मन्त्र की तरह पढ़ा है. मन-ही-मन. सिर्फ़ अपने ल…