सबद
vatsanurag.blogspot.com

आइनों को देह की भूख होती है


{ महेश वर्मा की नई कविताएं }

[ महेश वर्मा की कविताओं में प्रेम, स्मृति, इच्छा, अवसाद, उम्मीद, प्रतीक्षा जैसे तत्वों को अलगाना कठिन नहीं है. और इन मायनों में वह कठिनाई के कवि हैं भी नहीं. ध्यान उस सादगी की तरफ जाता है, जिससे वह मनुष्य मन के इन आदिम अनुभवों को बिना किसी आचार्य-मुद्रा में गए व्यक्त कर पाते हैं. ऐसा प्रत्येक सम्भवन हमें उस कवि- श्रम की भी ठीक-ठीक सूचना नहीं देता जो अन्यथा कई कवियों की कवितायें पढ़ते हुए यों ही मिल जाती है.

सबद पर इससे पहले महेश वर्मा की कविताएं यहां.
चित्र-कृति : ज्यां डफे की. ]








पहले उसने...

...सब जानते हैं कि हवा ने परिंदों को जन्म दिया लेकिन
उससे पहले उसने उनकी आँखों में आकाश रख
दिया था कि (वे) उड़ सकें . ऐसे ही अँधेरे ने अपने
अनुराग से चाँद को गढा और ये सिफत दी कि
वो दूसरों की आँखों में सपने रख सके .

इसमें कोई छिपी हुई बात नहीं है कि आइनों को
देह की भूख होती है, लेकिन पहले ही हवा
ने (सब) हिला दिया था मेरे भीतर बन रही तु-
-म्हारी प्रतिच्छवि को: शाम थी तुम उदास थी शाम उदास
थी तुम ...लेकिन इससे भी पहले तुम्हारे होने ने ही मुझे गढ़ना
शुरू कर दिया था कि तुम गोया मूर्तिकार का चाकू थीं, लकीरें
काटतीं और शक्ल गढती मिट्टी में...

हम उस ओर नहीं जाएंगे जहां मिट्टी
और पृथ्वी की आंतरिक इच्छा वृक्षों से होती हुई
उनकी पत्तियों में बज रही है : हवा से.

-- ‘ हवा एक पुराना दर्पन है ’
    (उसका पारा उतर चुका है वसंतसेना !)    
-- “ क्या हम एक घेरा काटकर आरम्भ पर आ पाए (अन्धकार !!) ”
****
बुझे हुए सब तारे

अपने होने में जो सितारे
कब का बुझ चुके
उनकी रोशनी में जो टिमटिम है
वह रास्तों के मोड़ों की है

यहाँ प्रेमीजन जो सितारे
अपनी प्रेमिकाओं की नज़र कर रहे हैं
हो सकता है ये वही सितारे हों
जो हैं ही नहीं

प्रेमिकाओं की चमकती आँखों के
सितारा उपमान तभी बुझ चुके हों
जब पहले मनुष्य सीख रहे थे प्यार करना
मरते सितारों की चीख सुनने की उनको फुर्सत नहीं थी
तो यहाँ धरती पर मरना भी कोई चीज़ नहीं थी

धरती के भीतर और बाहर
जितना बाकी हैं
बहुत पहले मर चुके पूर्वजों की हड्डियां
उनके बनाए चित्र और पत्थर के हथियार

ये राह बताने के सितारे हैं
जो बुझे नहीं हैं
****
दरख़्त

यह रात है
और पतझर की नींद में भी
हवा में घूमकर नीचे गिरते पत्ते हैं

यह वृक्ष का सपना नहीं है
उसकी नींद के पत्ते भी गिर रहे हैं अँधेरे में
इस तरह अँधेरे में कि अँधेरे का हिस्सा हैं
पत्ते की शक्ल का एक अँधेरा
बाहर के अँधेरे के भीतर गिर रहा है

अँधेरा कोई वृक्ष है
तो उसके भी पत्ते गिर रहे हैं रात में

रात खुद एक दरख़्त है.
****
पुकार

सीढ़ियों के पास नीचे से कोई पुकार रहा है
जबकी कोई सीढ़ियां नहीं हैं
उपरली मंज़िल ही नहीं : खानाबदोश हम तम्बुओं में रहते हैं

पीछे से कारवां में किसी के पुकारने की
आ रही है आवाज़
कोई जानवर नहीं हैं, न बैलगाड़ियां न कोई
कारवां कहीं को जाता हुआ
खानाबदोश नहीं हैं : हम रुके हुए लोग हैं

एक जगह रुके हुए थे जहाँ पर कि जिसे ऊब कर
कभी कुनबा कहते थे कभी सराय कभी शहर अपना
यहां भी सुनाई दे रही है पुकार :

खानाबदोशों के नक़्शे में नहीं
न पहली मंज़िल पर रहने वाले
वाचक के के कमरे की दीवार पे लगे नक़्शे में
कहीं ऐसी कोई जगह ही नहीं थी किसी नक़्शे में

कोई पुकार कहाँ होती ?
****
8 comments:

इन कविताओं को दोबारा पढ़ूंगी. पसंद आयी हैं.


सीढ़ियों के पास नीचे से कोई पुकार रहा है
जबकी कोई सीढ़ियां नहीं हैं
उपरली मंज़िल ही नहीं : खानाबदोश हम तम्बुओं में रहते हैं
अनुराग ने ऊपर महेश जी की कवितओं के बारे में जो कहा है, मैं भी ठीक वैसा ही कहना चाहती हूं. महेश जी की कवितायेँ कोमलता की सबसे अंदरूनी परत के नज़दीक जा बैठती हैं और तभी समकालीन कवियों से अलग है


मन में बहुत गहरे उतरती पंक्तियाँ।


गहन अभिव्यक्ति- बार बार पढ़ना और नये अर्थ पाना,,,,फिर आते हैं.


नीलोत्पल

महेशजी बधाई. विशेष 'दरख़्त' कविता आपके कलात्मक मंजाव को परिलक्षित करती है. लाजवाब. नीलोत्पल


दिल खुश
रूह खुश
... बहुत शुक्रिया
सादर


ज़बरदस्त ये कविताये हमे कहीँ दूर ले जाती हैँ जबकि ये बातेँ इसी दुनिया की हैँ...वाह...


shandar.. bahut achhi.. gahre arth liye..


सबद से जुड़ने की जगह :

सबद से जुड़ने की जगह :
[ अपडेट्स और सूचनाओं की जगह् ]

आग़ाज़


सबद का प्रकाशन 18 मई 2008 को शुरू हुआ.

संपादन : अनुराग वत्स.

पिछला बाक़ी

साखी


कुंवर नारायण / कृष्‍ण बलदेव वैद / विष्‍णु खरे / चंद्रकांत देवताले / राजी सेठ / मंगलेश डबराल / असद ज़ैदी / कुमार अंबुज / उदयन वाजपेयी / हृषिकेश सुलभ / लाल्‍टू / संजय खाती / पंकज चतुर्वेदी / आशुतोष दुबे / अजंता देव / यतींद्र मिश्र / पंकज मित्र / गीत चतुर्वेदी / व्‍योमेश शुक्‍ल / चन्दन पाण्डेय / कुणाल सिंह / मनोज कुमार झा / पंकज राग / नीलेश रघुवंशी / शिरीष कुमार मौर्य / संजय कुंदन / सुंदर चंद्र ठाकुर / अखिलेश / अरुण देव / समर्थ वाशिष्ठ / चंद्रभूषण / प्रत्‍यक्षा / मृत्युंजय / मनीषा कुलश्रेष्ठ / तुषार धवल / वंदना राग / पीयूष दईया / संगीता गुन्देचा / गिरिराज किराडू / महेश वर्मा / मोहन राणा / प्रभात रंजन / मृत्युंजय / आशुतोष भारद्वाज / हिमांशु पंड्या / शशिभूषण /
मोनिका कुमार / अशोक पांडे /अजित वडनेरकर / शंकर शरण / नीरज पांडेय / रवींद्र व्‍यास / विजय शंकर चतुर्वेदी / विपिन कुमार शर्मा / सूरज / अम्बर रंजना पाण्डेय / सिद्धान्त मोहन तिवारी / सुशोभित सक्तावत / निशांत / अपूर्व नारायण / विनोद अनुपम

बीजक


ग़ालिब / मिर्जा़ हादी रुस्‍वा / शमशेर / निर्मल वर्मा / अज्ञेय / एम. एफ. हुसैन / इस्‍मत चुग़ताई / त्रिलोचन / नागार्जुन / रघुवीर सहाय / विजयदेव नारायण साही / मलयज / ज्ञानरंजन / सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना / मरीना त्‍स्‍वेतायेवा / यानिस रित्‍सोस / फ्रान्ज़ काफ़्का / गाब्रीयल गार्सीया मारकेस / हैराल्‍ड पिंटर / फरनांदो पेसोआ / कारेल चापेक / जॉर्ज लुई बोर्हेस / ओक्टावियो पाज़ / अर्नस्ट हेमिंग्वे / व्लादिमिर नबोकोव / हेनरी मिलर / रॉबर्टो बोलान्‍यो / सीज़र पावेसी / सुजान सौन्टैग / इतालो कल्‍वीनो / रॉबर्ट ब्रेसां / उम्बेर्तो ईको / अर्नेस्‍तो कार्देनाल / ज़बिग्नियव हर्बर्ट / मिक्‍लोश रादनोती / निज़ार क़ब्‍बानी / एमानुएल ओर्तीज़ / ओरहन पामुक / सबीर हका / मो यान / पॉल आस्‍टर / फि़राक़ गोरखपुरी / अहमद फ़राज़ / दिलीप चित्रे / के. सच्चिदानंदन / वागीश शुक्‍ल/ जयशंकर/ वेणु गोपाल/ सुदीप बैनर्जी /सफि़या अख़्तर/ कुमार शहानी / अनुपम मिश्र

सबद पुस्तिका : 1

सबद पुस्तिका : 1
भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार के तीन दशक : एक अंशत: विवादास्‍पद जायज़ा

सबद पुस्तिका : 2

सबद पुस्तिका : 2
कुंवर नारायण का गद्य व कविताएं

सबद पुस्तिका : 3

सबद पुस्तिका : 3
गीत चतुर्वेदी की लंबी कविता : उभयचर

सबद पुस्तिका : 4

सबद पुस्तिका : 4
चन्‍दन पाण्‍डेय की कहानी - रिवॉल्‍वर

सबद पुस्तिका : 5

सबद पुस्तिका : 5
प्रसन्न कुमार चौधरी की लंबी कविता

सबद पुस्तिका : 6

सबद पुस्तिका : 6
एडम ज़गायेवस्‍की की कविताएं व गद्य

सबद पुस्तिका : 7

सबद पुस्तिका : 7
बेई दाओ की कविताएं

सबद पुस्तिका : 8

सबद पुस्तिका : 8
ईमान मर्सल की कविताएं

सबद पुस्तिका : 9

सबद पुस्तिका : 9
बाज़बहादुर की कविताएं - उदयन वाजपेयी

सबद पोएट्री फि़ल्‍म

सबद पोएट्री फि़ल्‍म
गीत चतुर्वेदी की सात कविताओं का फिल्मांकन

सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में

सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में
a film on love and loneliness

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन
किताबों की देहरी पर...

गोष्ठी : १ : स्मृति

गोष्ठी : १ : स्मृति
स्मृति के बारे में चार कवि-लेखकों के विचार

गोष्ठी : २ : लिखते-पढ़ते

गोष्ठी : २ : लिखते-पढ़ते
लिखने-पढ़ने के बारे में चार कवि-लेखकों की बातचीत

सम्‍मुख - 1

सम्‍मुख - 1
गीत चतुर्वेदी का इंटरव्‍यू

अपवाद : [ सबद का सहोदर ] :

अपवाद : [ सबद का सहोदर ] :
मुक्तिबोध के बहाने हिंदी कविता के बारे में - गीत चतुर्वेदी