Posts

Showing posts from February, 2012

कला का आलोक : ४ : वर्नर हरसोग पर सुशोभित सक्तावत

Image
मिथक, मरीचिका और अभिशप्‍त लैंडस्‍केप्‍स
सुशोभित सक्तावत

“…Whatever is sublime does not lead the listeners to persuasion but to a state of ecstasy.”- Longinus,On the Sublime"...There is such a thing as poetic, ecstatic truth. It is mysterious and elusive, and can be reached only through fabrication, imagination and stylization."
- Werner Herzog, Minnesota Declaration1) जर्मन फिल्‍मकार वर्नर हरसोग की वर्ष 1976 में प्रदर्शित एक फिल्‍म है हार्ट ऑफ़ ग्‍लासफिल्‍म 18वीं सदी के एक बवेरियन क़स्‍बे के बारे में है, जहां रुबी ग्‍लास का निर्माण होता है। लेकिन फ़ैक्‍टरी के मास्‍टर फ़ोरमैन की मौत होने के साथ ही रुबी ग्‍लास बनाने की तरक़ीब भी खो जाती है। यह एक अशुभ संकेत है। एक अनिवार्य सूत्र को गंवा देने की विपदा से त्रस्‍त क़स्‍बे के जन-गण धीरे-धीरे विक्षिप्‍तता की ओर अग्रसर होने लगते हैं (हरसोग ने इस फिल्‍म में सभी कलाकारों को हिप्‍नोटाइज़ कर उनसे अभिनय करवाया था)। लेकिन क़स्‍बे का युवा सामंत रुबी ग्‍लास की ट्रिक जानने की भरसक कोशिश कर रहा है। एक दिन सामंत के अनुचर एक ब…