Skip to main content

Posts

Showing posts from November, 2011

कला का आलोक : ३ : रवीन्द्रनाथ पर अखिलेश

तखनकरिनिनाथ
कोनोआयोजन

रवीन्द्रनाथके अधिकांश चित्र उनके जीवन के उत्तरार्द्ध में बनते हैं। गुरुदेव की उम्र लगभग छियत्तर वर्ष की होगी। 1937 में वे गम्भीर रूप से बीमार होते हैं और इस बीमारी के दौरान वे काफी दिनों तक बेहोश रहे। इस बीमारी से लौटे रवीन्द्रनाथ के जीवन के उत्तरार्ध में सिर्फ़ चित्र ही नहीं बनते हैं, उनका ध्यान इस सांसारिक वैभव, प्रकृति प्रेम, अनन्त वैश्विक सम्भावना से हटकर मृत्यु पर भी केन्द्रित होता है। बाद की अधिकतर कविताओं के केन्द्र में मृत्यु ही है। रवीन्द्रनाथ का विवाह तय होते ही उनकी भाभी ‘कादम्बिरी’ ने चौबीस वर्ष की उम्र में आत्महत्या कर ली थी। रवीन्द्रनाथ का अपनी भाभी के प्रति आकर्षण सर्वविदित है। इस बेहोशी से लौटने के बाद की चित्र शृंखला का नाम रवीन्द्रनाथ ‘कादम्बिरी’ ही रखते हैं। इन्हीं चित्रों में वे उदात्त अवस्था से हटकर आत्मकेन्द्रित होते हैं।
रवीन्द्रनाथ इसके पहले भी चित्र बनाते रहे, अधिकांश चित्र कविताओं के लिखने के दौरान उनको सुधारते हुए बनते-बिगड़ते हुए रूपाकारों के हैं। जिन चित्रों के लिए रवीन्द्रनाथ प्रसिद्ध हैं, वे इन्हीं अन्तिम चार वर्षों के हैं…