सबद
vatsanurag.blogspot.com

लिखने के बारे में डायरी से कुछ टीपें





'लिखना
असंभव' जैसी स्थितियों को अगर लिखा जाए तो एक संभव सच में ज़रूरी कलात्मक झूठ/ कल्पना को फेंट कर वह कहने का जोखिम उठाया जा सकेगा जो कहा नहीं गया और कथा ठीक उस बिंदु से शुरू की जा सकेगी जहां से स्मृति ने भी उन स्थितियों को पोसने से इनकार कर दिया है.

जो स्मृति में है वह अनिवार्यतः कथा में भी होगा, यह ज़रूरी नहीं. यानी अब लिखना महज याद करना ही नहीं है. और हालांकि लिखना पहले की तरह ही चयन है, लेकिन उन तमाम असुविधाजनक या असंभव से लगने वाले प्रसंगों के चयन के फर्क के साथ जो बयान में आने से बराबर छूटते रहे हैं.

लिखते हुए किसी स्थिति-विशेष को 'एप्रोप्रियेट' कर लेना स्मृति ही नहीं, कल्पना की भी बर्बादी है. कम से कम लिखते हुए यादाश्त गुमा देने में कोई हर्ज़ नहीं.

ऐसे लिखा जाए मानो जी रहे हों. ऐसे जिया जाए मानो लिखे हुए की देह से निकलना हो रहा हो.

प्रेम जैसी संलग्नता से लिखना चाहिए, लेकिन अपने लिखे हुए के प्रेम में पड़ने से भरसक बचना चाहिए. इस लिहाज से हिंदी के वे तमाम पाकेट-बुक्स पढ़ने से भी अपने को बचा लेना चाहिए जिसमें लेखक ने ''मेरी प्रिय कहानियां या कविताएं'' छपाई हुई हैं.

जहां-जहां प्यार लिखा है वहां-वहां सड़क लिख डालने वाले रुमान से तो खुद को बचाना ही होगा. लेकिन ''रहने के प्रसंग में एक घर था'' सरीखे विन्यास से बचने के लिए अभी और हुनर की दरकार होगी.

लिखते हुए देखने की आदत बराबर डालनी चाहिए. इससे भाषा को अपने पर मुग्ध होने या सपनों में खोने से फुर्सत मिलती रहती है.

हर लेखक लिख कर अपनी भाषा का दातुन करता है. दातुन बिला नागा करना चाहिए.

कुछ है जो लिखने के बाद दुरुस्त हो जाता है. उस कुछ को जानने के लिए ख़ुद लिखना पड़ता है. उस लिखे हुए का मोल जानने के लिए और बहुत सी लिखत को अपनी पढ़त में शामिल करना पड़ता है.
****
( चित्र-कृति वांग कार वाई की फिल्म 2046 से )
8 comments:

बहुत सही!!

पात्र को जिओ, अहसासो और डूब जाओ उसमें...तब कलम उठाओ!!


डायरी में इतनी काम की चीजें हैं !
इसे पब्लिक ही कर देवें ! मजार्थ में !


डायरी काम की है, झाँपने का मन है ।
लिखने पर लिख डाला, वाह । हम तो नहीं लिख पाने के कारणों पर पुस्तक लिख रहे हैं ।


आप ने बहुत ही सुन्दर अंदाज़ मैं कहा कि हर लेखक लिख कर अपनी भाषा का दातुन करता है. दातुन बिला नागा करना चाहिए. ये लेखक के लिये बहुत ही ज़रूरी और महत्वपूर्ण.

मैं अंत मैं इतना कहना चाहूंगा कि आप का लिखने का अंदाज़ और भाषा दोनों ही मोहक और प्रभावशाली हैं.


प्रेम जैसी संलग्नता से लिखना चाहिए, लेकिन अपने लिखे हुए के प्रेम में पड़ने से भरसक बचना चाहिए. इस लिहाज से हिंदी के वे तमाम पाकेट-बुक्स पढ़ने से भी अपने को बचा लेना चाहिए जिसमें लेखक ने "मेरी प्रिय कहानियां या कविताएं" छपाई हुई हैं........

Badhiya....Aabhaar...shubhkaamnaayen


रहने के प्रसंग में एक घर था ...... जिसमे दीवार में एक खिड़की रहती थी ?
क्या बढ़िया टिप्स हैं भाई ।
हमने भी बहुत सारी जमा कर रखी हैं ।


बहुत खूब. कुछ नया सीखा, कुछ जो भीतर था वह हैरान हुआ. मनीषा कुलश्रेष्ठ


सबद से जुड़ने की जगह :

सबद से जुड़ने की जगह :
[ अपडेट्स और सूचनाओं की जगह् ]

आग़ाज़


सबद का प्रकाशन 18 मई 2008 को शुरू हुआ.

संपादन : अनुराग वत्स.

पिछला बाक़ी

साखी


कुंवर नारायण / कृष्‍ण बलदेव वैद / विष्‍णु खरे / चंद्रकांत देवताले / राजी सेठ / मंगलेश डबराल / असद ज़ैदी / कुमार अंबुज / उदयन वाजपेयी / हृषिकेश सुलभ / लाल्‍टू / संजय खाती / पंकज चतुर्वेदी / आशुतोष दुबे / अजंता देव / यतींद्र मिश्र / पंकज मित्र / गीत चतुर्वेदी / व्‍योमेश शुक्‍ल / चन्दन पाण्डेय / कुणाल सिंह / मनोज कुमार झा / पंकज राग / नीलेश रघुवंशी / शिरीष कुमार मौर्य / संजय कुंदन / सुंदर चंद्र ठाकुर / अखिलेश / अरुण देव / समर्थ वाशिष्ठ / चंद्रभूषण / प्रत्‍यक्षा / मृत्युंजय / मनीषा कुलश्रेष्ठ / तुषार धवल / वंदना राग / पीयूष दईया / संगीता गुन्देचा / गिरिराज किराडू / महेश वर्मा / मोहन राणा / प्रभात रंजन / मृत्युंजय / आशुतोष भारद्वाज / हिमांशु पंड्या / शशिभूषण /
मोनिका कुमार / अशोक पांडे /अजित वडनेरकर / शंकर शरण / नीरज पांडेय / रवींद्र व्‍यास / विजय शंकर चतुर्वेदी / विपिन कुमार शर्मा / सूरज / अम्बर रंजना पाण्डेय / सिद्धान्त मोहन तिवारी / सुशोभित सक्तावत / निशांत / अपूर्व नारायण / विनोद अनुपम

बीजक


ग़ालिब / मिर्जा़ हादी रुस्‍वा / शमशेर / निर्मल वर्मा / अज्ञेय / एम. एफ. हुसैन / इस्‍मत चुग़ताई / त्रिलोचन / नागार्जुन / रघुवीर सहाय / विजयदेव नारायण साही / मलयज / ज्ञानरंजन / सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना / मरीना त्‍स्‍वेतायेवा / यानिस रित्‍सोस / फ्रान्ज़ काफ़्का / गाब्रीयल गार्सीया मारकेस / हैराल्‍ड पिंटर / फरनांदो पेसोआ / कारेल चापेक / जॉर्ज लुई बोर्हेस / ओक्टावियो पाज़ / अर्नस्ट हेमिंग्वे / व्लादिमिर नबोकोव / हेनरी मिलर / रॉबर्टो बोलान्‍यो / सीज़र पावेसी / सुजान सौन्टैग / इतालो कल्‍वीनो / रॉबर्ट ब्रेसां / उम्बेर्तो ईको / अर्नेस्‍तो कार्देनाल / ज़बिग्नियव हर्बर्ट / मिक्‍लोश रादनोती / निज़ार क़ब्‍बानी / एमानुएल ओर्तीज़ / ओरहन पामुक / सबीर हका / मो यान / पॉल आस्‍टर / फि़राक़ गोरखपुरी / अहमद फ़राज़ / दिलीप चित्रे / के. सच्चिदानंदन / वागीश शुक्‍ल/ जयशंकर/ वेणु गोपाल/ सुदीप बैनर्जी /सफि़या अख़्तर/ कुमार शहानी / अनुपम मिश्र

सबद पुस्तिका : 1

सबद पुस्तिका : 1
भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार के तीन दशक : एक अंशत: विवादास्‍पद जायज़ा

सबद पुस्तिका : 2

सबद पुस्तिका : 2
कुंवर नारायण का गद्य व कविताएं

सबद पुस्तिका : 3

सबद पुस्तिका : 3
गीत चतुर्वेदी की लंबी कविता : उभयचर

सबद पुस्तिका : 4

सबद पुस्तिका : 4
चन्‍दन पाण्‍डेय की कहानी - रिवॉल्‍वर

सबद पुस्तिका : 5

सबद पुस्तिका : 5
प्रसन्न कुमार चौधरी की लंबी कविता

सबद पुस्तिका : 6

सबद पुस्तिका : 6
एडम ज़गायेवस्‍की की कविताएं व गद्य

सबद पुस्तिका : 7

सबद पुस्तिका : 7
बेई दाओ की कविताएं

सबद पुस्तिका : 8

सबद पुस्तिका : 8
ईमान मर्सल की कविताएं

सबद पुस्तिका : 9

सबद पुस्तिका : 9
बाज़बहादुर की कविताएं - उदयन वाजपेयी

सबद पोएट्री फि़ल्‍म

सबद पोएट्री फि़ल्‍म
गीत चतुर्वेदी की सात कविताओं का फिल्मांकन

सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में

सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में
a film on love and loneliness

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन
किताबों की देहरी पर...

गोष्ठी : १ : स्मृति

गोष्ठी : १ : स्मृति
स्मृति के बारे में चार कवि-लेखकों के विचार

गोष्ठी : २ : लिखते-पढ़ते

गोष्ठी : २ : लिखते-पढ़ते
लिखने-पढ़ने के बारे में चार कवि-लेखकों की बातचीत

सम्‍मुख - 1

सम्‍मुख - 1
गीत चतुर्वेदी का इंटरव्‍यू

अपवाद : [ सबद का सहोदर ] :

अपवाद : [ सबद का सहोदर ] :
मुक्तिबोध के बहाने हिंदी कविता के बारे में - गीत चतुर्वेदी