सबद
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स्मिता पाटिल

वह खड़ी थी, सीढ़ी के निचले तल पर, मुस्कुराती, मोड़ पर लड़की जिसकी प्रतिभा का प्रस्फुटन अभी होना है.

उसका नाम है स्मिता.

वह खड़ी थी, शर्माती, बम्बई दूरदर्शन स्टूडियो के गलियारे में, अपने आस-पास की दुनिया के शोरोगुल बरदाश्त करती.

फिर, हम उसका न्यूज़ पढना देखते हैं. उस युवती की छवि ने उन ब्यौरों को महत्वपूर्ण बना दिया कि हम चकित रह गए.

जल्द ही इसके बाद, हमने एक मौन अलिखित समझौता किया. ठंडी हवाएं आघात पहुंचा रही थीं...जो हमें आतंकित कर गईं कि हम धरा से अलग हो जायेंगे...लेकिन उस भरोसा था...जिसकी वजह से वह जुडी रही. ज़िन्दगी के अवास्तविक परदे पर सांस लेती रही.

उसका उत्साह कम नहीं होता जब सुबह की मासूम घड़ियों तक हम काम करते, चर्चाएँ करते...आप यही सोचते...कि उषा की पहली आश्चर्यचकित और ऊर्जस्वित करने वाली किरण की आप झलक पा रहे हैं.

यह मुझमें आश्चर्य भर देता, साहसिक काम की खोज में निकले बच्चे की तरह, हम कई बार अपनी माँ के ख़ज़ाने और उसकी निर्मिति को खंगालने की कोशिश करते...लेकिन जितना उससे लेते वह उतना ही अधिक देती.

मैं अत्यंत दुःख के साथ याद करता हूँ कि कैसे उसने अपने भीतर एक बच्चे को पलना चाहा. मैं उसकी सहजता और ख़ुशी याद करता हूँ जब वह बच्चे की नेपकिन्स बदलती. वैसे उसकी आँखों में क्रोध भरा होता जब भय और हिंसा के दानवों के लिए वह चुनौती बन जाती.

वह अपने अंदरूनी स्रोतों से अनजान थी कि उन प्रेरक क्षणों को संजोती जो उसने हमें उपहार में दिए.

उसका प्यार हमेशा सच्चा और पवित्र रहा, हमेशा रहेगा.

कमल के फूल-पराग से जिसके केश से हम आकर्षित थे अपनी पहली सुबह की ताज़गी के साथ-साथ.
5 comments:

अद्भुत .... ताजगी से भरा...


मैने सुना है ,स्मिता जी अपने जमाने मे पोद्दार/रुइआ college,Mumbai मे जब थि तो वो इत्नि पोपुलर थी कि उस जमाने वहा पर लड्कियो मे jeans पेहनने क फ़ैशन लाने क श्रेय उन्हे हि जाता है / ऎसा सुनने मे आया था कि शायद उनका कोइ relative USA मे था जो उन्हे latestjeans भेजता था,तो पुरे college को इन्तेज़ार रेह्ता था कि,इस बार क्या होगा ?
ये किस्सा यु सुनाया कि--She was a trend setter.


अच्‍छी पोस्‍ट है अनुराग।
लेकिन एक सवाल भी आता है कि मरे बिना प्‍यार को सच्‍चा और पवित्र कब माना जाएगा::। जीते जी हम जानलेवा अवसाद ही देंगे क्‍या हमेशा:::।


स्मिता पाटिल.. इस नाम को मैं एक सेंसेशन कहूँगा..

बहुत ही उम्दा..


स्मिता !!! इस नाम को सुनकर मेरे शरीर मै कम्पन होने लगती है ... !!! नहीं ... इस नाम की मेरी कोई सहेली नहीं है ... मै इसी स्मिता की बात कर रहा हूँ ... अनुराग को शुक्रिया ...


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सबद का प्रकाशन 18 मई 2008 को शुरू हुआ.

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