Monday, August 31, 2009

अनकहा कुछ : ४ : गाब्रीएल गार्सीया मारकेज़

( प्रभात रंजन अपने स्तम्भ ''अनकहा कुछ'' में इस दफा मशहूर लैटिन अमेरिकी लेखक गाब्रीएल गार्सीया मारकेज़ के बारे में लिख रहे हैं। आधार मारकेज़ की उस हालिया लिखी जीवनी को बनाया है जिसकी बड़ी चर्चा हो रही है। )

मिथक मारकेज़ के चारों ओर

प्रभात रंजन

जीवन वह नहीं होता जो कोई जीता है, बल्कि वह होता है जिसे कोई याद रखता है और दोबारा याद करते हुए जिस क्रम से उसे वह याद करता है -ये पंक्तियां बेहद लोकप्रिय और चर्चित लेखक गाब्रीएल गार्सीया मारकेज़ ने अपनी आत्मकथा लिविंग टु टेल द टेल के आरंभ में लिखी हैं। शायद एक जीवनीकार यही काम करता है। जिसका जीवन उसके जिम्मे होता है, वह उसे शब्दों से इस तरह गढ़ता है कि वह यादगार बन जाए। गेराल्ड मार्टिन द्वारा लिखित मारकेज़ की आधिकारिक बताई जा रही जीवनी गाब्रीएल गार्सीया मारकेज़ : ए लाईफ को पढ़ते हुए भी यह बात कही जा सकती है। 642 पृष्ठों की इस किताब में मार्टिन ने लगभग मिथक में बदल चुके लेखक मारकेज़ की जीवन-कथा उन्हीं सूत्रों के सहारे गढ़ने की कोशिश की है जिसके संकेत मारकेज़ के साहित्य, भेंटवार्ताओं इत्यादि मिलते रहे हैं।

मारकेज़
न केवल ऊँचे दर्जे के लेखक हैं बल्कि उनकी शख्सियत भी बहुत बड़ी है। ऐसे व्यक्तित्व की जीवनी लिखना चुनौतीपूर्ण होता है। मारकेज़ ने स्वयं अपने बारे में लिखा है कि मेरा शुरुआती जीवन कठिन लेकिन जादुई था और बाद का जीवन सार्वजनिक और रहस्यमयी। वास्तव में, मारकेज़ का जीवन बहुआयामी रहा है - न केवल लेखक के रूप में बल्कि एक सार्वजनिक व्यक्तित्व और पत्रकार के रूप में भी। वे एक ऐसे लोकप्रिय लेखक हैं जिन्हें पाठकों का अपार प्यार मिला तो विवादों से भी नाता बना रहा। मारकेज़ को पहला ग्लोबल लेखक मानने वाले गेराल्ड मार्टिन ने न केवल इस लिविंग लीजेंड की जीवनी लिखने की चुनौती को स्वीकार की है, वरन् पर्याप्त मेहनत से, अनेक स्त्रोतों के आधार पर उसे पन्नों पर उतारा भी है।

जादुई
यथार्थवाद की शैली को लोकप्रिय बनाने वाले इस लेखक की जीवनी को लिखने के दौरान मार्टिन ने करीब सत्रह सालों तक मार्केस के जीवन और साहित्य को लेकर शोध किया। प्रश्न उठता है कि जब मारकेज़ ने कुछ ही समय पहले अपनी आत्मकथा लिखी है तो फिर आखिर उनकी यह जीवनी क्यों? वह भी उनके जीते जी? इसका एक संतोषजनक जवाब यह हो सकता है कि मारकेज़ ने अपनी आत्मकथा लिविंग टु टेल द टेल में अपने जीवन के आरंभिक वर्षों के बारे में लिखा है। उन के वर्षों बारे में जब उनके अनेक सपनों में एक सपना लेखक बनने का भी था। जब मारकेज़ लेखक बनने का निश्चय करते हैं तब आत्मकथा समाप्त हो जाती है। आत्मकथा में मारकेज़ ने लेखक बनने के सपने और अपने आरंभिक संघर्षों के बारे में विस्तार से लिखा है। जीवनी में गेराल्ड मार्टिन ने नोबेल पुरस्कार विजेता इस लेखक के लेखकीय जीवन को फोकस में रखा है। इसमें एक साधारण व्यक्ति के असाधारण लेखक बनने की कहानी है।

1927
में कोलंबिया के एक छोटे से कस्बे अराकाटक में जन्मे इस विश्वप्रसिद्ध लेखक का सबसे बड़ा लेखकीय ऑब्‍सेशन नाना के घर में बिताए गए बचपन के वर्ष रहे हैं जिनके बारे में पहले भी काफी कुछ लिखा जा चुका है और जिसे वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलिट्यूड में मकोन्दो कस्बे के रूप में उन्होंने अमर बना दिया। नाना की विशाल हवेली से लेखक का ऐसा लगाव था कि अपनी आत्मकथा का आरंभ उन्होंने उस घटना से किया है जब उनकी माँ उन्हें बताती हैं कि नाना की उस हवेली को बेचना है और इसके लिए मारकेज़ बरसों बाद नाना के उस घर को दोबारा देखने जाते हैं जिससे उनके बचपन की यादें बावस्ता थीं। जीवनीकार के अनुसार वास्तव में उसी यात्रा के दौरान उस घर को देखते हुए उनके मन में कुछ बहुत बड़ा लिखने का विचार आया, जो बहुत बाद में वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलिट्यूड नामक उपन्यास की शक्ल में ढला।

जीवनी
में मार्टिन ने लेखन के आरंभिक वर्षों में मारकेज़ के पेरिस में बेरोजगारी और भयानक गरीबी में बिताए गए दिनों की कथा भी कही है। एक स्थान पर मार्टिन ने लिखा है कि एक बार पेरिस में कई दिनों की भूख से हारकर उन्होंने अपने एक दोस्त की कचरापेटी से कचरा निकाला और उसमें जो कुछ भी खाने लायक बचा था उसे उसी समय और वहीं खा लिया। उन दिनों का एक प्रसंग यह है कि गरीबी के कारण वे करीब एक साल तक एक वेश्यालय की बरसाती में कम किराए पर रहे। प्रसंगवश, वेश्याओं का जीवन भी मारकेज़ के लेखन का एक बहुत बड़ा ऑब्‍सेशन रहा है। अपनी आत्मकथा में भी उन्होंने वेश्याओं के बारे में लिखा है। बाद में उन्होंने उनके जीवन को आधार बनाकर संपूर्ण उपन्यास ही लिखा - मेमोरीज ऑफ़ माई मेलांकली होर्स। इसी तरह, पेरिस के दिनों की उनकी प्रेमिका के बारे में भी जीवनीकार ने लिखा है और आजीविका के लिए उनके द्वारा किए गए अनेक कामों के बारे में भी।

1958
में मारकेज़ की शादी मर्सिडीज नामक उसी युवती से हुई जिससे उनको जब प्यार हुआ तो उसकी उम्र महज 9 साल थी। प्रसंगवश, जीवनी लिखने के दौरान मार्टिन ने मारकेज़ की पत्नी से भी बातचीत की है और उनके दो बेटों से भी, जिनमें से एक रोड्रिगो गार्सिया भी हैं जो हॉलिवुड में फिल्मों का लेखन और निर्देशन करते हैं। कुल मिलाकर, पुस्तक में मारकेज़ के जीवन के निजी प्रसंग तो हैं लेकिन उनको लेखक ने उसी सीमा तक स्थान दिया है जहां तक उनके ऊपर निजता में हस्तक्षेप का आरोप नहीं लगे। मारकेज़ के रहस्यमयी जीवन के बारे में पुस्तक में संकेत भर है। वास्तव में, पुस्तक का उद्देश्य मेकिंग ऑफ़ मारकेज़ के रहस्यों का अनावरण अधिक है इसलिए निजी प्रसंगों का वर्णन करते हुए जीवनीकार की दृष्टि लेखक के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण है।

मार्टिन ने अपनी पुस्तक में यह दिखाया है कि असल में मारकेज़ ने अपने लंबे जीवनकाल में एक तरह से दो जीवन जिए हैं - एक जीवन वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलिट्यूड के प्रकाशन से पहले का है और दूसरा उस उपन्यास के प्रकाशन के बाद का।1967 में प्रकाशित इस उपन्यास ने उस को बनाया जिसे आज दुनिया भर के पाठक जादुई यथार्थवाद के जादुई चितेरे के रूप में जानते हैं। इस उपन्यास के प्रकाशन के समय उनकी उम्र 40 साल थी। जीवनीकार ने इसका दिलचस्प बयान अपनी पुस्तक में किया है कि किस तरह इस युगांतकारी समझे गए उपन्यास का आइडिया उनके दिमाग में कौंधा। 1965 में एक दिन वे गाड़ी से मेक्सिको सिटी से कहीं और जा रहे थे। अचानक उनके दिमाग में कुछ कौंधा, गाड़ी मोड़कर वे वापस घर आए और 18 महीने तक खुद को कमरे में बंद कर लिया। 18 महीने के बाद जब वे बाहर आए तो उनके हाथ में उस उपन्यास की पांडुलिपि थी जिसने उनको 1982 में नोबेल पुरस्कार दिलवाया और उनकी पत्नी के हाथों में 18 महीने के भुगतान न किए गए तरह-तरह के बिल।

जिस
तरह के अविश्वसनीय यथार्थ के किस्से मारकेज़ ने लिखे हैं उसी तरह के अनेक किस्से उनको लेकर भी प्रचलित हैं, जिनमें से कुछ का जीवनीकार ने विश्लेषण भी किया है। बहरहाल, अपनी प्रसिद्धि को लेकर मारकेज़ अक्सर मजाक करते रहते हैं। उन्होंने कई बार मजाक में कहा है कि वे इस बात से वाकिफ थे कि उनको प्रसिद्ध होना है। कहते हैं कि अपनी पत्नी को उन्होंने शादी के समय ही बता दिया था कि जब उनकी उम्र चालीस साल की होगी तब वे एक मास्टरपीस लिखेंगे। एक बार अपनी एक बातचीत में उन्होंने कहा था कि जब वे पैदा हुए उस समय भी प्रसिद्ध थे, यह अलग बात है कि उस समय इस बात को केवल वे ही जानते थे। हालांकि मारकेज़ ऐसे लेखक नहीं हैं जिनके लेखन का मात्र इस एक उपन्यास के आधार पर आकलन किया जाए। आलोचकों ने उनके अन्य उपन्यासों लव इन द टाईम ऑफ़ कॉलरा, ऑटम ऑफ़ द पैट्रिआर्क को भी विश्वस्तरीय माना है।
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6 comments:

सागर said...

आपने कितनी बेहतरीन जानकारी दी है मैं बता नहीं सकता... मैं आपका बहुत-बहुत शुक्रगुजार हूँ... दरअसल यह किताब अंग्रजी में होगी ? और मेरी अंग्रेजी अच्छी नहीं है... यहाँ से जितनी जानकारी मिली पढने कि भूख और बढ़ गयी... आपका शुक्रिया...

सौरभ द्विवेदी said...

एकांत के सौ वर्ष ( हंड्रेड इयर्स ऑफ सॉलिट्यूड) अब तक के जीवन में पढ़ा गया सबसे बेहतरीन उपन्यास है और ये बात मैं हमेशा यारों के बीच, दुश्मनों के बीच, दोस्तों के बीच, बड़ों के बीच हर कहीं कहता हूं। हमें मार्केज का लिखा पसंद है, ये कहना कुछ छिछला सा लगता है, कहना चाहता हूं कि हम मार्केज के लिखे को जीकर जीवन को कुछ और गाढ़ा और ताजा बनाने की जुगत में लगे रहते हैं।
मुझे हमेशा से अचरज होता है कि भारत में भी कमोबेश उतना ही जटिल और जादुई यथार्थ है, मगर हमने अभी तक अपने एकांत के सालों की गिनती शुरू क्यों नहीं की...
बहरहाल हमेशा की तरह सबद और अनुराग को ढेरों शुक्रिया इतनी ज्यादा और सुरुचिपूर्ण मेहनत के लिए

Tushar Dhawal Singh said...

महान लेखकों की जीवनी कई मायनों में महत्त्वपूर्ण होती है. एक तरफ तो वह उस सामाजिक वैश्विक और मनोवैज्ञानिक माहौल में हो रहे सृजन और उसके तत्त्व को समझने में मदद करती है तो दूसरी तरफ नए लेखकों को आत्मान्वेषण करने के सूत्र भी देती है.
प्रभात जी अपनी चिर परिचित सुगम सरल शैली में थोड़े में बहुत कुछ कह गए हैं. साथ ही इस पुस्तक को पढने का लोभ भी जगा गए हैं.
उम्मीद करें कि वह दिन भी आये जब हम प्रभात जी के जीवन के बारे में उनके ही जीवन काल में ऐसा ही कुछ पढ़ पायें !!

girirajk said...

प्रभात रंजन का लिखा नॉन-फिक्शन पढ़कर हमेशा लगता है वे माध्यम की बहुत परवाह करते हैं और उसके प्रति एक तरह का काबिल -ए-तारीफ़ प्रोफेशनल रुख भी उनका रहता है लेकिन आह, यही उनके ऐसे लेखन को असंतोष -दायी भी बना देता है . उनसे जितनी उम्मीद होती है, वे जानबूझकर और बिलानागा उससे थोडा कम ही डिलीवर करते हैं. मानो हमको टीज़ करते हुए. क्या कोई बड़ा काम गुपचुप चल रहा है?

anita said...

its nice to read abt markej .i didnt read him ,but now i want to read his biography,thanx prabaht ji...thanx anurag..

Anonymous said...

Marquez is such an intense writer! One of my favorites. Presently reading his "Innocent Erendira. . .". Sometimes I think I must learn Spanish just to be able to read Marquez and Pablo Neruda exactly the way they penned it. Thanks for the post regarding Martin's book on Gabriel. I think I have seen one other post on Marquez on your site earlier. Thanks a lot. Regards, Shardula