Wednesday, August 26, 2009

पोथी पढ़ि पढ़ि : ३ : इतलो कल्विनो



क्लैसिक्स के बारे में


१. क्लैसिक किताबों के बारे में लोग अक्सर यह कहते पाए जाते हैं कि वे इन्हें 'फिर से पढ़ रहे हैं'। वे यह कभी नहीं कहते कि इन्हें ( दरअसल पहली दफा ही) 'पढ़ रहे हैं'! ऐसा उनके मुंह से तो और सुनने को मिलता है जो अपने आप को खासा पढ़ाकू मानते-समझते हैं।

२. 'क्लैसिक्स' शब्द का इस्तेमाल हम उन किताबों के लिए करते हैं जिन्हें उनके पढ़ने और प्यार करनेवालों ने अमूल्य निधि की भांति सहेजा होता है। पर ये किताबें उन लोगों द्वारा भी कम सहेजी हुई नहीं मानी जाती जिन्हें यह सौभाग्य मिला कि वे ऐसी किताबों को तब पढ़ सके जब स्थितियां उसे पढ़े-गुनने के लिए सर्वाधिक अनुकूल रहीं।

३. क्लैसिक वे किताबें हैं जो आपके मनोजगत पर गहरा असर छोड़ती हैं। खासकर तब जब वे आपके दिलोदिमाग से जाने से मना करती हैं और तब भी जब खुद को स्मृति में नियोजित करती हुई वे आपके सामूहिक या व्यक्तिगत अवचेतन में छुप बैठती हैं।

४. क्लैसिक का पुनर्पाठ भी उसके पहले पठन की तरह ही एक खोजी यात्रा सरीखा रोमांच से आपको भर देता हैं।

५ + ६. क्लैसिक का हर पठन असल में पुनर्पाठ ही है। मायने ये कि एक क्लैसिक किताब कभी चुप नहीं बैठती। हर पाठ में वह आपको कुछ न कुछ अलग सौंपती जाती है।

७. क्लैसिक्स हमारे पूर्व पठन को अपने भीतर ज़ज्ब सांस्कृतिक अनुभवों से आलोकित करती है।

८. एक क्लैसिक किताब ज़रूरी नहीं कि हमें वह बताये जो हम पहले नहीं जानते थे। बहुधा तो यह होता है कि ऐसी किताबों में हम उन्हीं चीजों को पाते हैं, जिनसे हमारा पूर्व परिचय रहता है। महत्वपूर्ण इस जाने हुए को एक खास ढंग से, अक्षरयोजित, जानना होता है।

९. क्लैसिक्स के बारे में हमने जितना सुना होता है, पढ़ते हुए वे हमें उससे कहीं ज़्यादा ताज़ा, अनपेक्षित और अद्भुत जान पड़ती हैं।

१०. एक क्लैसिक किताब को उसकी संरचना में ब्रह्माण्ड के बराबर रख कर देखा जा सकता है।

११. आपके क्लैसिक लेखक वे हैं जिनसे आप हमेशा अपने को नाभिनालबद्ध पाते हैं। इस अभिन्नता में न सिर्फ़ वह अपने सम्बन्ध में आपको अपनी परिभाषा गढ़ने में मदद करते हैं, बल्कि उनसे जिरह करते हुए भी आप ऐसा करने की सहूलियत पाते हैं।

१२. एक क्लैसिक किताब आपके हाथ दूसरी के पहले आती है। पर जिस किसी ने भी दूसरी पहले पढ़ी हुई होती है, वह अपने तईं पहली को पढ़ कर उसकी जगह आप ही तय कर देता है।
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अनुवाद : अनुराग वत्स

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( इतालवी भाषा के अनुपम कथाकार इतलो कल्विनो की ये पंक्तियाँ उनके कथेतर गद्य-संकलन 'लिटरेचर मशीन' से ली गई हैं। जिस लेख से इन्हें अलगाया गया है, उसका नाम है, व्हाई रीड क्लैसिक्स ? लेख में क्लैसिक की अवधारणा, निर्मिति और इस शब्द के मिथकीय होते जाने के बारे में विस्तार से लिखा गया है। यहाँ लेखक की स्थापनाओं के दर्जन भर सूत्र वाक्यों को ही अनूदित कर दिया गया है। इससे पहले आप इस स्तम्भ में मारीना त्स्वेतायेवा और फरनांदो पैसोआ का गद्य भी पढ़ चुके हैं। )

4 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

जानकारी के लिए आभार!

डा० अमर कुमार said...


कोई किताब क्लासिक की श्रेणी में किन तत्वों से शुमार होने लग पड़ती है,
इसकी विवेचना कौन करता है । बहुधा माउथ टू माउथ प्रचार से कुछ भी रातों रात एक स्टेटस पा जाता है , क्यों और कैसे ?

rashmi said...

classic translation... wow really great...

Ratnesh said...

yah ek sachhai hai 'वे यह कभी नहीं कहते कि इन्हें ( दरअसल पहली दफा ही) 'पढ़ रहे हैं'! ऐसा उनके मुंह से तो और सुनने को मिलता है जो अपने आप को खासा पढ़ाकू मानते-समझते हैं।' rochak aur gyanwardhak post.