Saturday, August 22, 2009

लव इन द टाइम ऑफ़ स्‍वाइन फ्लू...





क्या यह ज़रूरी है ?
... नहीं।
...फिर ? तुमने बात क्यों बंद की ?
...सोच रहा था, देखें, बगैर बात किए लोग कैसे रहते हैं।
...अच्छा !, बकवास। तुमने खामख्वाह परेशान किया मुझे। ऐसा क्यों करते हो ?
XXX
खैर, अभी कहाँ हो, ऑनलाइन नही दिखते।
...बस में हूँ।
...जगह मिली ?
...हाँ, निजामुद्दीन आते-आते।...तुम ?
...मैं घर पर हूँ। बात बंद कर दी थी तुमने इसलिए बिना मिले चली आई।
...ओह!
XXX
बाहर बारिश गिर रही है। जाम लगा है और अदंर लोग नकाबपोश हैं ?
...क्यों ?
...तुम अख़बार नहीं पढ़ती क्या ? स्वाइन फ्लू।
...तुम मेरे मन का अख़बार ही नहीं बनाते, क्या पढूं!
...तुम भी!
...अच्छा तुमने मास्क पहन रखी है ?
...नहीं।
...क्यों तुम्हारे लिए फ्लू नहीं है?
...है, पर मैं उससे बड़ी फ्लू की चपेट में हूँ।
...बनो मत। कम से कम रुमाल ही बाँध लेते।
...तुम जानती हो न...
...हाँ-हाँ कि आप रुमाल भूल जाते हैं। पर ऐन नाक पर बंधी रहेगी तब भी भूलोगे ?
...नहीं। ...ऐसा करो रुमाल बांधनेवाली बीवी घर ले आओ।
...वह गले में पट्टा बाँध देगी!
...हाहाहा
...हमं, सच कह रहा हूँ।
XXX
...क्या करते रहे इन चार गुमसुम दिनों में। अभी जैसे ऊँगली पटपट चल रही है, चार दिन में तुमसे चार अक्षर नहीं लिखे गए!
... सॉरी...
...शट अप! मेरा मतलब है क्यों ? क्यों करते हो ऐसा ? बताओ अपने लिए तकलीफ सिरजते हो, जबकि जितना साथ लिखा है, उतनी दूर तक तो मैं हूँ न।
...
...मेरा स्टाप आ गया।
...कमीने!
...किसके, विशाल के ?
...नहीं, मेरे। मेरे अपने।....
****

33 comments:

ravindra vyas said...

बहुत मजेदार अनुराग भाई, मजा आ गया सचमुच।

Geet Chaturvedi said...

ग़ज़ब यार. नाज़ुक-नाज़ुक. सुंदर है.

रूमाल बंधवाने का सुझाव अब मान ही लीजिए.

शायदा said...

achha...............aisa?

Fabiha Khalid said...

This is really good work...please write more on the same lines...awaiting impatiently for the same...Best of Luck...

P said...

samvedanaon ke ye bhiga dene wale tukde kise achche nahi lagenge..... purushottam naveen

Mithilesh dubey said...

लाजवाब।

जनविजय said...

प्रिय अनुराग जी!
यह प्रेमवार्ता अच्छी लगी। रसखान का एक दोहा याद आ गया
"अति सूछम कोमल अतिहिं, अति पतरो अति दूर।
प्रेम कठिन सबतें सदा, नित इकरस भरपूर"
सादर

rashmi said...

nice short love story. with lots of expressions. tum toh cha gaye ji. padkhar bahut maja aaya. aage bhi likhna. waiting for ur next love story.

ramesh said...

bahut achchhi laghu katha hai. naazuk masla, gazab hausala.

pratibha said...

nazuk ahsaas....

Ratnesh said...

km shabdon me itna zyada khna dil ko bha gaya.

Anonymous said...

पेंटिंग का एक कोना बना ..बाकी ?
प्रत्यक्षा

vishwanath said...

Is short Romantic story ke bare mein yeh hi kaha ja sakta hai : Bahut Khoob

poonam pandey said...

Aree wah...tumhari is pratibha ke bare mein nahi janti thi mai....good........

lalit said...

तुम अखबार नहीं पढ़ती क्या? :) ... तुम मेरे मन का अखबार ही नहीं बनाते, क्या पढूं! :) खूबसूरती से पिरोया है जज्बात को। शब्द ठहरते हैं तो मन ठहर जाता है। चलते हैं तो जैसे छम छम करती वह भी साथ चलने लगती है... उतनी दूर तक जहां तक स्टॉप नहीं आ जाता। अच्छी कहानी है।

khadija said...

Mujhe lafzon se khelna nhi aata.....par is chhoti si love story ko padh kar main bas itna hi kahungi....." Behadd Simple aur be-inteha khoobsurat"....Ise padhte hue ek dilkash manzar aankhon k saamne agya tha... "LAFZON ME JAAN DAALNA ISI KO KEHTE HAIN"
"BOHAT UMDA"

Anonymous said...

Its a beautiful piece of writing...very poignant...a short story but conveyed a lot...All the best!!!
Sonali

विवेक said...

शब्द गर अपने वक्त दर्द कहने लगें, तो जिंदा हो जाते हैं। और जरिया मोहब्बत हो तो बात ही क्या...आपने दस पंक्तियों में कितना कुछ कह दिया अनुराग जी..बहुत खूबसूरत।

Isha said...

Beautifully written short love story... liked it.. look forward to read more :)

neetu said...

arey aap to bihari ki rah per chal rhe hain ye kahani likh ker.....
yaad hai na "gagar mai sagar"
sach achchi lgi padhker....likhte rahiye...

prabhatranjan said...

barish ki hi tarah ye ahsaas man ko chhoo gaya. bahut achha laga. nakabposh ka roopak maanikhez laga.badhai!

vyomesh said...

एक ओर आलोचना, पत्रकारिता और पठन की रुक्षताएँ और दूसरी तरफ़ ये लालित्य. हद है. लीला. 'जबकि जितना साथ लिखा है, उतनी दूर तक तो मैं हूँ न.'
गीत के सुझाव को मान लेने में कोई हर्ज नहीं है.

poonam said...

ek kathakar ka sabse bada gun parivesh ko jivant karna hoto hai. 10 lines main mansoon, flu, films, patrkarita, love, uski seekaryata, usko celebrate karne ka sahas kitna kuch samet diya bilkul sahajta ke sath

Neetu Singh said...

बहुत अच्‍छा लि‍खा है अनुराग...
मुझे लगता है कि‍ स्‍वाइन फ़लू के इस दौर में हर कोई "अपने" कमीने के लि‍ए कुछ ऐसा ही महसूस कर रहा होगा...
सचमुच, बहुत ही प्‍यारी कहानी है....

Tushar Dhawal Singh said...

कथा में प्रेम पूर्ण वार्ता की नोक झोंक में कथेत्तर प्रसंग अपने खुरदुरेपन में पूरी अन्गरता के साथ मौजूद हैं. मितकथन का यह एक सार्थक प्रयास है. इसमें भविष्य की आशंकाओं के बीच आज अभी प्रेम को पूरी तरह से जी लेने की जो कसक है, दिल को छू जाती है. इस कथा के कई अवांतर प्रसंगों पर गौर किया जाये तो हर एक प्रसंग की इस प्रेम के बीच अपनी खींचा तानी है. हर एक धागे की एक अलग कहानी है जो मौन होते हुए भी सब कुछ कह रही है.
यह जो भीगा भीगा सा कुनमुना सा प्रसंग तुमने जीवंत किया है, बड़ा सुन्दर लगा. और भी कुछ पढ़वाओ न.
तुषार

anita said...

maine story kai baar padhi...love in the time of cholera se inspired hokar tumne naam rakh diya otherwise bina flu k bhi story complete hai..,ek metro me rehkar afra-tafri me prem ka izhaar hai..feelings hai .its nice short story abt love..specialy end is beautiful ..i mean words..kameney..mere apne....congrates and all the best..

dhiresh said...

jab tak hua talta raha aur purane panne paltkar is narm-o-najuk shandar tukde ko padh liya. Geet Aur Vyomesh jaise kaviyon kee baat apko man leni chahiye.

Pooja Prasad said...

मैसेजिंग को भी आंखों के सामने घूमती हुई कहानी के तौर पर लिखा जा सकता है! बहुत ही बढ़िया.

Vidisha said...

this is brillient creation of ur's bcoz u've used very simple language in a very effective manner.It make a picture of "aam aadami n their feelings with cotemprorary life condition"

alvia said...

hey,its very very cuuteeee love story......good one.....

purvi said...

...क्या करते रहे इन चार गुमसुम दिनों में। अभी जैसे ऊँगली पटपट चल रही है, चार दिन में तुमसे चार अक्षर नहीं लिखे गए!...

मैं भी कई बार ऐसे ही नाराज़ होती हूँ अपने अपनों से ... :)
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति दी है प्रेम के इस स्वरुप को.
बधाई अनुराग जी :)

manisha said...

ky baat hain bahut badiya

Rukaiya said...

Saadgi mein basi khubsurti.. shayed ise hi kahte hain ...achha laga padh ke