सबद
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लव इन द टाइम ऑफ़ स्‍वाइन फ्लू...





क्या यह ज़रूरी है ?
... नहीं।
...फिर ? तुमने बात क्यों बंद की ?
...सोच रहा था, देखें, बगैर बात किए लोग कैसे रहते हैं।
...अच्छा !, बकवास। तुमने खामख्वाह परेशान किया मुझे। ऐसा क्यों करते हो ?
XXX
खैर, अभी कहाँ हो, ऑनलाइन नही दिखते।
...बस में हूँ।
...जगह मिली ?
...हाँ, निजामुद्दीन आते-आते।...तुम ?
...मैं घर पर हूँ। बात बंद कर दी थी तुमने इसलिए बिना मिले चली आई।
...ओह!
XXX
बाहर बारिश गिर रही है। जाम लगा है और अदंर लोग नकाबपोश हैं ?
...क्यों ?
...तुम अख़बार नहीं पढ़ती क्या ? स्वाइन फ्लू।
...तुम मेरे मन का अख़बार ही नहीं बनाते, क्या पढूं!
...तुम भी!
...अच्छा तुमने मास्क पहन रखी है ?
...नहीं।
...क्यों तुम्हारे लिए फ्लू नहीं है?
...है, पर मैं उससे बड़ी फ्लू की चपेट में हूँ।
...बनो मत। कम से कम रुमाल ही बाँध लेते।
...तुम जानती हो न...
...हाँ-हाँ कि आप रुमाल भूल जाते हैं। पर ऐन नाक पर बंधी रहेगी तब भी भूलोगे ?
...नहीं। ...ऐसा करो रुमाल बांधनेवाली बीवी घर ले आओ।
...वह गले में पट्टा बाँध देगी!
...हाहाहा
...हमं, सच कह रहा हूँ।
XXX
...क्या करते रहे इन चार गुमसुम दिनों में। अभी जैसे ऊँगली पटपट चल रही है, चार दिन में तुमसे चार अक्षर नहीं लिखे गए!
... सॉरी...
...शट अप! मेरा मतलब है क्यों ? क्यों करते हो ऐसा ? बताओ अपने लिए तकलीफ सिरजते हो, जबकि जितना साथ लिखा है, उतनी दूर तक तो मैं हूँ न।
...
...मेरा स्टाप आ गया।
...कमीने!
...किसके, विशाल के ?
...नहीं, मेरे। मेरे अपने।....
****
33 comments:

बहुत मजेदार अनुराग भाई, मजा आ गया सचमुच।


ग़ज़ब यार. नाज़ुक-नाज़ुक. सुंदर है.

रूमाल बंधवाने का सुझाव अब मान ही लीजिए.


This is really good work...please write more on the same lines...awaiting impatiently for the same...Best of Luck...


samvedanaon ke ye bhiga dene wale tukde kise achche nahi lagenge..... purushottam naveen


प्रिय अनुराग जी!
यह प्रेमवार्ता अच्छी लगी। रसखान का एक दोहा याद आ गया
"अति सूछम कोमल अतिहिं, अति पतरो अति दूर।
प्रेम कठिन सबतें सदा, नित इकरस भरपूर"
सादर


nice short love story. with lots of expressions. tum toh cha gaye ji. padkhar bahut maja aaya. aage bhi likhna. waiting for ur next love story.


bahut achchhi laghu katha hai. naazuk masla, gazab hausala.


km shabdon me itna zyada khna dil ko bha gaya.


पेंटिंग का एक कोना बना ..बाकी ?
प्रत्यक्षा


Is short Romantic story ke bare mein yeh hi kaha ja sakta hai : Bahut Khoob


Aree wah...tumhari is pratibha ke bare mein nahi janti thi mai....good........


तुम अखबार नहीं पढ़ती क्या? :) ... तुम मेरे मन का अखबार ही नहीं बनाते, क्या पढूं! :) खूबसूरती से पिरोया है जज्बात को। शब्द ठहरते हैं तो मन ठहर जाता है। चलते हैं तो जैसे छम छम करती वह भी साथ चलने लगती है... उतनी दूर तक जहां तक स्टॉप नहीं आ जाता। अच्छी कहानी है।


Mujhe lafzon se khelna nhi aata.....par is chhoti si love story ko padh kar main bas itna hi kahungi....." Behadd Simple aur be-inteha khoobsurat"....Ise padhte hue ek dilkash manzar aankhon k saamne agya tha... "LAFZON ME JAAN DAALNA ISI KO KEHTE HAIN"
"BOHAT UMDA"


Its a beautiful piece of writing...very poignant...a short story but conveyed a lot...All the best!!!
Sonali


शब्द गर अपने वक्त दर्द कहने लगें, तो जिंदा हो जाते हैं। और जरिया मोहब्बत हो तो बात ही क्या...आपने दस पंक्तियों में कितना कुछ कह दिया अनुराग जी..बहुत खूबसूरत।


Beautifully written short love story... liked it.. look forward to read more :)


arey aap to bihari ki rah per chal rhe hain ye kahani likh ker.....
yaad hai na "gagar mai sagar"
sach achchi lgi padhker....likhte rahiye...


barish ki hi tarah ye ahsaas man ko chhoo gaya. bahut achha laga. nakabposh ka roopak maanikhez laga.badhai!


एक ओर आलोचना, पत्रकारिता और पठन की रुक्षताएँ और दूसरी तरफ़ ये लालित्य. हद है. लीला. 'जबकि जितना साथ लिखा है, उतनी दूर तक तो मैं हूँ न.'
गीत के सुझाव को मान लेने में कोई हर्ज नहीं है.


ek kathakar ka sabse bada gun parivesh ko jivant karna hoto hai. 10 lines main mansoon, flu, films, patrkarita, love, uski seekaryata, usko celebrate karne ka sahas kitna kuch samet diya bilkul sahajta ke sath


बहुत अच्‍छा लि‍खा है अनुराग...
मुझे लगता है कि‍ स्‍वाइन फ़लू के इस दौर में हर कोई "अपने" कमीने के लि‍ए कुछ ऐसा ही महसूस कर रहा होगा...
सचमुच, बहुत ही प्‍यारी कहानी है....


कथा में प्रेम पूर्ण वार्ता की नोक झोंक में कथेत्तर प्रसंग अपने खुरदुरेपन में पूरी अन्गरता के साथ मौजूद हैं. मितकथन का यह एक सार्थक प्रयास है. इसमें भविष्य की आशंकाओं के बीच आज अभी प्रेम को पूरी तरह से जी लेने की जो कसक है, दिल को छू जाती है. इस कथा के कई अवांतर प्रसंगों पर गौर किया जाये तो हर एक प्रसंग की इस प्रेम के बीच अपनी खींचा तानी है. हर एक धागे की एक अलग कहानी है जो मौन होते हुए भी सब कुछ कह रही है.
यह जो भीगा भीगा सा कुनमुना सा प्रसंग तुमने जीवंत किया है, बड़ा सुन्दर लगा. और भी कुछ पढ़वाओ न.
तुषार


maine story kai baar padhi...love in the time of cholera se inspired hokar tumne naam rakh diya otherwise bina flu k bhi story complete hai..,ek metro me rehkar afra-tafri me prem ka izhaar hai..feelings hai .its nice short story abt love..specialy end is beautiful ..i mean words..kameney..mere apne....congrates and all the best..


jab tak hua talta raha aur purane panne paltkar is narm-o-najuk shandar tukde ko padh liya. Geet Aur Vyomesh jaise kaviyon kee baat apko man leni chahiye.


मैसेजिंग को भी आंखों के सामने घूमती हुई कहानी के तौर पर लिखा जा सकता है! बहुत ही बढ़िया.


this is brillient creation of ur's bcoz u've used very simple language in a very effective manner.It make a picture of "aam aadami n their feelings with cotemprorary life condition"


hey,its very very cuuteeee love story......good one.....


...क्या करते रहे इन चार गुमसुम दिनों में। अभी जैसे ऊँगली पटपट चल रही है, चार दिन में तुमसे चार अक्षर नहीं लिखे गए!...

मैं भी कई बार ऐसे ही नाराज़ होती हूँ अपने अपनों से ... :)
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति दी है प्रेम के इस स्वरुप को.
बधाई अनुराग जी :)


ky baat hain bahut badiya


Saadgi mein basi khubsurti.. shayed ise hi kahte hain ...achha laga padh ke


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