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Showing posts from June, 2009

निधन : हबीब तनवीर

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( हबीब तनवीरका आज लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। हबीब साहब ने अपने कला-माध्यम को सामाजिक सरोकारों से जोड़ा और इन मायनों में वे जितना कला की दुनिया के लिए ज़रूरी थे उतना ही समाज के लिए अनिवार्य। उनका रंग-कर्म जागृति का एक अलख था, जिसे उनके बाद जगाने की तवक्को कम दिखती है। कुछ वक़्त पहले सुलभजीने सबद पर अपने स्तंभ रंगायन में हबीब साहब पर तफसील से लिखा था, आगे वही श्रद्धांजलिस्वरुप दिया जा रहा है।)


'' आओ, देखो सत्य क्या है ''

हबीब तनवीर को याद करना सिर्फ रंगकर्म से जुड़े एक व्यक्ति को याद करने की तरह नहीं है। दसों दिशाओं से टकराते उस व्यक्ति की कल्पना कीजिए, जिसके सिर पर टूटने को आसमान आमादा हो, धरती पाँव खींचने को तैयार बैठी हो और कुहनियाँ अन्य दिशाओं से टकराकर छिल रही हों; और वह व्यक्ति सहज भाव से सजगता तथा बेफ़िक्री दोनों को एक साथ साधकर चला जा रहा हो। अब तक कुछ ऐसा ही जीवन रहा है हबीब तनवीर का। भारतेन्दु के बाद भारतीय समाज के सांस्कृतिक संघर्ष को नेतृत्व देनेवाले कुछ गिने-चुने व्यक्तित्वों में हबीब तनवीर भी शामिल हैं। भारतेन्दु का एक भी नाटक अब तक मंचित न करने के बावज…

अनकहा कुछ : ३ : मारियो वर्गास य्योसा

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( यह खुशी की बात है कि युवा कहानीकार प्रभात रंजन ने सबद के लिए लिखे जा रहे अपने स्तंभ, अनकहा कुछ, को एक लंबे अंतराल के बाद पुनः शुरू किया है और इस बार पेरू के मशहूर लेखक मारियो वर्गास य्योसा के लेखन और व्यक्तित्व पर एकाग्र किया है। मार्केस के सामानांतर लेखन में सफलता अर्जित करनेवाले य्योसा हिन्दी में अल्पज्ञात ही हैं। इस आलेख से उनके साहित्य में लोगों की दिलचस्पी बढेगी, ऐसी आशा है। प्रभात रंजन ने इससे पूर्व शेक्सपियर और हेमिंग्वे पर लिखा था। )

झूठ को सच की तरह लिखनेवाला लेखक

प्रभात रंजन

अपनी पुस्तक लेटर्स टु ए यंग नॉवेलिस्ट में मारियो वर्गास य्योसा ने लिखा है कि सभी भाषाओं में दो तरह के लेखक होते हैं- एक वे होते हैं जो अपने समय में प्रचलित भाषा और शैली के मानकों के अनुसार लिखते हैं, दूसरी तरह के लेखक वे होते हैं जो भाषा और शैली के प्रचलित मानकों को तोड़कर कुछ एकदम नया रच देते हैं। 28 मार्च, 1936 को लैटिन अमेरिका के एक छोटे से गरीब देश पेरू में पैदा होनेवाले इस उपन्यासकार, निबंधकार, पत्रकार ने स्पैनिश भाषा के मानकों को तोड़ा या उसमें कुछ नया जोड़ा यह अलग बहस का विषय है। लेकिन इसमें कोई संदेह…