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सबद विशेष : ७ : यानिस रित्सोस

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( अपरिहार्य कारणों से यूनानी जनकवि यानिस रित्सोसकी बाकी कविताएं मंगलेशजी के अनुवाद में इतने विलंब से दी जा रही है। इसके लिए अनुवादक और सबद के स्नेही पाठकों से क्षमा याचना की जाती है। )

कविताएं पिछली पोस्ट से आगे :

औरतें

औरतें बहुत दूर हैं। उनकी चादरों से 'शुभरात्रि' की
महक आती है।
वे ब्रेड लाकर मेज पर रख देती हैं ताकि हमें यह न लगे
कि वे अनुपस्थित हैं।
तब हमें यह महसूस होता है कि यह हमारी गलती थी। हम
कुर्सी से उठते हैं और कहते हैं :
'आज तुमने बहुत ज्यादा काम कर लिया' या 'तुम रहने दो,
बत्ती मैं जला लूँगा।'

जब हम माचिस जलाते हैं तो वह आहिस्ता से मुड़ती है
और एक अनिर्वचनीय एकाग्रता के साथ
रसोईघर की तरफ जाती है। उसकी पीठ एक बेहद उदास
पहाड़ी है कई मृतकों से लदी हुई --
परिवार के मृतक, उसके मृतक, तुम्हारी खुद की मृत्यु।

तुम पुराने लकड़ी के फर्श पर उसके चरमराते क़दमों को
सुनते हो। तुम अलमारी में तश्तरियों का रोना
सुनते हो। फिर तुम उस ट्रेन की आवाज़ सुनते हो
जो मोर्चे की ओर फौजियों को ले जाती है।
****
समझ

इतवार। जैकेटों के बटन बिखरी हुई
हंसी की तरह दमकते हैं. बस जा चुकी है।
कुछ सुखद आवाजें -- …

सबद विशेष : ७ : यानिस रित्सोस

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( आज कालजयी यूनानी जनकवि यानिस रित्सोसका सौवाँ जन्मदिन है. यानिस की कुछ कविताओं के हिंदी अनुवाद और एक क्षिप्र और सारवान वक्तव्य के ज़रिये मंगलेश डबरालउन्हें याद कर रहे हैं. साहित्य संसार में शताब्दी समारोहों की चतुर्दिक मचती धूम के बरअक्स, इस तरह, यह सबद के लिए एक शांत उल्लास और गहरी सार्थकता का अवसर बन गया है. ज़ाहिर है कि हमारे प्रयत्न में कविता के साथ मज़दूर दिवस की उमंग भी शामिल है. )

एक मनुष्य और एक देश का कंपन

मंगलेश डबराल

महाकवि यानिस रित्सोस (१ मई १९०९ -- ११ नवम्बर १९९०) क़रीब पंद्रह वर्ष तक यूनान की तानाशाह या दक्षिणपंथी सरकारों द्वारा क़ैद या नज़रबंद रखे गए, क़रीब २४ साल तक उनकी रचनाओं के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगा रहा, १९३६ में जनरल मेटाक्सस की तानाशाही के दौरान उनकी प्रसिद्द लम्बी कविता 'एपिताफियोस' को सार्वजनिक रूप से जलाया गया, लगभग सात वर्ष तक वे टीबी से पीड़ित रहे और नौ साल तक उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया. रित्सोस के १०० से अधिक कविता संग्रह, दो नाटक और दो उपन्यास प्रकाशित हैं. यूनान में १९३६ की हड़ताल के दौरान पुलिस द्वारा मारे गए एक नौजवान के शव के पास…