सबद
vatsanurag.blogspot.com

आलोचना का पक्ष : १ : वागीश शुक्ल


साहित्य मृत्यु का सामना करने की विधि है


पढ़ना एक ऋण का स्वीकार है, लिखना उस ऋण की अदायगी।
लिखने के बाद मरने का हक मिलता है।

साहित्य मृत्यु का सामना करने की विधि है।
इसमें साहित्य पढ़ना और रचना दोनों शामिल है।

जैसे
रेशम का कीड़ा अपने चारों ओर एक कीमती चीज़ बुनता है और मौत को बुलावा देता है (वैसे ही) मौत अपने चारों ओर कहानी बुनती है, जिसका नाम ज़िन्दगी है।

साहित्य
शब्द और अर्थ के शराब हो जाने का भाव है। यदि यह पढ़ने में बुरा लगता हो तो 'शराब' की जगह 'मधु' पढ़ लें, इससे वाक्य का तात्पर्य नहीं बदलेगा। जिन चीजों से शराब बनती है, वे अलग-अलग शराब नहीं हैं, नशा उनमें नहीं, (उनके) संधान में है। शब्द और अर्थ में अलग-अलग साहित्य नहीं है, उनके मिलाप में है। (इस तरह) शब्द और अर्थ को चुआ कर बनाई गई शराब ही साहित्य है।

कवि
एक भट्ठी लगाता है, शब्द और अर्थ की आग में, अर्थ को शब्द की आग में चुआते हुए कविता की मदिरा तैयार करने के लिए। शब्द और अर्थ दोनों को भाड़ में झोंकते हुए वह दोनों लुकाठियों से घर फूंकता हुआ उनके धुएँ में बदलने का तमाशा देखता है।

आलोचना का काम है कि यदि कविता का सिंगार कवि के खून से हुआ है तो उस पर इतने आंसू टपकाती रहे कि वह खून सूखने न पाए।

उजड़ी अयोध्या कैसे आबाद होती है ? रामायण कहती है, '' रामायण पढ़ने से''। पाठक रामायण पढ़ता है और पाता है कि इस उजड़ी हुई अयोध्या का रास्ता इतना उबड़खाबड़ है कि वह बिना रथ से उतरे, बिना इसको भूले कि वह किस देशकाल में है, उसका अपना समाज और उसका अपना मन क्या है, उसमें नहीं जा सकता। और ऐसा करते ही वह पाता है कि वह ख़ुद ही तो उस उजड़ी हुई अयोध्या में बिखरा हुआ था और यही उस अयोध्या का आबाद होना है।

जब
प्रौद्योगिकी धर्म गढ़ती है तो वह एक किताब को स्वीकार करती है जिसमें सारे जवाब हैं। ज़ाहिर है कि यह किताब मनुष्य को दो हिस्सों में बांटती है और जब भी एक किताब का दूसरी किताब से सामना होता है, एक किताब को माननेवाले दूसरी किताब को अफीम बत्ताते हैं।

कला
का हर काम एक खोज है। उसे कोई जवाब नहीं मालूम होता।

कला
को 'पेगन' कहते हैं, विश्वास और अन्धविश्वास में फर्क न कर पाती हुई, अंधेरे में डूबी रोशनी से कतराती हुई, जिसने किताब को नहीं पहचाना।
उसके पास किताब नहीं होती, किताबें होती हैं और हर किताब अपने समझे जाने को एक दूसरी किताब में बताती है।
****

( वागीश शुक्ल हिन्दी आलोचना में एक अपवाद हैं। उनकी आलोचना में भारतीय काव्यशास्त्र से लेकर उत्तरआधुनिक विमर्शों के लिए जगह के साथ-साथ संस्कृत तथा उर्दू की समृद्ध काव्य-परम्परा की प्रखर स्मृति और बसाव भी है। निराला की कालजयी कविता ''राम की शक्तिपूजा'' की अद्वितीय टीका लिखने के अलावा आलोचना की दो और पुस्तकें भी उनके नाम हैं। ''याज्ञवल्क्योपाख्यान'' नामक वृहदाकार उपन्यास पर वे वर्षों से काम कर रहे हैं जिसके कुछ अंश सुधि पाठकों ने विभिन्न पत्रिकाओं में पढ़ा होगा। यहाँ वागीशाजी के आलोचनात्मक लेखन से कुछ पंक्तियाँ चुन कर दी गई हैं। सबद में आगे भी आलोचना का पक्ष, बजरिये आलोचक, इसी लघु कलेवर में दिया जाएगा। वागीश शुक्ल का रेखांकन जितेन्द्र व्यास ने बनाया है। )

4 comments:

मनोहर श्याम जोशी के शब्दों में 'मौलाना पंडित' वागीश शुक्ल को सबद पर देखना बेहद, बेहद सुखद है. वागीश जी को लेकर हिन्दी मुख्यधारा में एक ही व्यवहार है (जो वैसे भी एक आजमाई हुई प्रभावी युक्ति है): उन पर बात ही नहीं करना. ऐसे जताना मानो वे है ही नहीं. वागीश जी कापी लेफ्ट के समर्थक हैं जब हमने 'याज्ञवल्क्योपाख्यान' का एक अध्याय प्रकाशित किया तो उनकी चिंता यही थी कि क्या हम शुद्ध छाप पाएंगे?. वे सारा काम लिनक्स में करते हैं. अगर कोई मित्र मेरी मदद करे तो मैं उनका सारा काम इंटरनेट पर लाना चाहता हूँ.


Waah ! Kitni sundar aur satya...baat kahi gayi hai..

Prastut karne hetu aabhaar.


शुक्ल जी को पढना आधुनिक , मध्य तथा प्राचीन भारत को गहराई से समझ पाना है। यहां कोई भी उपेक्षित नहीं है। सबके साथ एक साथ न्याय कर पाना इन्हीं के बस की बात है।
हिन्दी साहित्य के इतिहास में ऐसी जहान्बीनी कितनी दुर्लभ है.....


Lopamudra ke ansh chapiye


सबद से जुड़ने की जगह :

सबद से जुड़ने की जगह :
[ अपडेट्स और सूचनाओं की जगह् ]

आग़ाज़


सबद का प्रकाशन 18 मई 2008 को शुरू हुआ.

संपादन : अनुराग वत्स.

पिछला बाक़ी

साखी


कुंवर नारायण / कृष्‍ण बलदेव वैद / विष्‍णु खरे / चंद्रकांत देवताले / राजी सेठ / मंगलेश डबराल / असद ज़ैदी / कुमार अंबुज / उदयन वाजपेयी / हृषिकेश सुलभ / लाल्‍टू / संजय खाती / पंकज चतुर्वेदी / आशुतोष दुबे / अजंता देव / यतींद्र मिश्र / पंकज मित्र / गीत चतुर्वेदी / व्‍योमेश शुक्‍ल / चन्दन पाण्डेय / कुणाल सिंह / मनोज कुमार झा / पंकज राग / नीलेश रघुवंशी / शिरीष कुमार मौर्य / संजय कुंदन / सुंदर चंद्र ठाकुर / अखिलेश / अरुण देव / समर्थ वाशिष्ठ / चंद्रभूषण / प्रत्‍यक्षा / मृत्युंजय / मनीषा कुलश्रेष्ठ / तुषार धवल / वंदना राग / पीयूष दईया / संगीता गुन्देचा / गिरिराज किराडू / महेश वर्मा / मोहन राणा / प्रभात रंजन / मृत्युंजय / आशुतोष भारद्वाज / हिमांशु पंड्या / शशिभूषण /
मोनिका कुमार / अशोक पांडे /अजित वडनेरकर / शंकर शरण / नीरज पांडेय / रवींद्र व्‍यास / विजय शंकर चतुर्वेदी / विपिन कुमार शर्मा / सूरज / अम्बर रंजना पाण्डेय / सिद्धान्त मोहन तिवारी / सुशोभित सक्तावत / निशांत / अपूर्व नारायण / विनोद अनुपम

बीजक


ग़ालिब / मिर्जा़ हादी रुस्‍वा / शमशेर / निर्मल वर्मा / अज्ञेय / एम. एफ. हुसैन / इस्‍मत चुग़ताई / त्रिलोचन / नागार्जुन / रघुवीर सहाय / विजयदेव नारायण साही / मलयज / ज्ञानरंजन / सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना / मरीना त्‍स्‍वेतायेवा / यानिस रित्‍सोस / फ्रान्ज़ काफ़्का / गाब्रीयल गार्सीया मारकेस / हैराल्‍ड पिंटर / फरनांदो पेसोआ / कारेल चापेक / जॉर्ज लुई बोर्हेस / ओक्टावियो पाज़ / अर्नस्ट हेमिंग्वे / व्लादिमिर नबोकोव / हेनरी मिलर / रॉबर्टो बोलान्‍यो / सीज़र पावेसी / सुजान सौन्टैग / इतालो कल्‍वीनो / रॉबर्ट ब्रेसां / उम्बेर्तो ईको / अर्नेस्‍तो कार्देनाल / ज़बिग्नियव हर्बर्ट / मिक्‍लोश रादनोती / निज़ार क़ब्‍बानी / एमानुएल ओर्तीज़ / ओरहन पामुक / सबीर हका / मो यान / पॉल आस्‍टर / फि़राक़ गोरखपुरी / अहमद फ़राज़ / दिलीप चित्रे / के. सच्चिदानंदन / वागीश शुक्‍ल/ जयशंकर/ वेणु गोपाल/ सुदीप बैनर्जी /सफि़या अख़्तर/ कुमार शहानी / अनुपम मिश्र

सबद पुस्तिका : 1

सबद पुस्तिका : 1
भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार के तीन दशक : एक अंशत: विवादास्‍पद जायज़ा

सबद पुस्तिका : 2

सबद पुस्तिका : 2
कुंवर नारायण का गद्य व कविताएं

सबद पुस्तिका : 3

सबद पुस्तिका : 3
गीत चतुर्वेदी की लंबी कविता : उभयचर

सबद पुस्तिका : 4

सबद पुस्तिका : 4
चन्‍दन पाण्‍डेय की कहानी - रिवॉल्‍वर

सबद पुस्तिका : 5

सबद पुस्तिका : 5
प्रसन्न कुमार चौधरी की लंबी कविता

सबद पुस्तिका : 6

सबद पुस्तिका : 6
एडम ज़गायेवस्‍की की कविताएं व गद्य

सबद पुस्तिका : 7

सबद पुस्तिका : 7
बेई दाओ की कविताएं

सबद पुस्तिका : 8

सबद पुस्तिका : 8
ईमान मर्सल की कविताएं

सबद पुस्तिका : 9

सबद पुस्तिका : 9
बाज़बहादुर की कविताएं - उदयन वाजपेयी

सबद पोएट्री फि़ल्‍म

सबद पोएट्री फि़ल्‍म
गीत चतुर्वेदी की सात कविताओं का फिल्मांकन

सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में

सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में
a film on love and loneliness

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन
किताबों की देहरी पर...

गोष्ठी : १ : स्मृति

गोष्ठी : १ : स्मृति
स्मृति के बारे में चार कवि-लेखकों के विचार

गोष्ठी : २ : लिखते-पढ़ते

गोष्ठी : २ : लिखते-पढ़ते
लिखने-पढ़ने के बारे में चार कवि-लेखकों की बातचीत

सम्‍मुख - 1

सम्‍मुख - 1
गीत चतुर्वेदी का इंटरव्‍यू

अपवाद : [ सबद का सहोदर ] :

अपवाद : [ सबद का सहोदर ] :
मुक्तिबोध के बहाने हिंदी कविता के बारे में - गीत चतुर्वेदी