सबद
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कुंवर नारायण को ज्ञानपीठ


ज्ञानपीठ

इस घोषणा के बाद कि वर्ष २००५ का ज्ञानपीठ पुरस्कार हिन्दी के शीर्षस्थ कवि कुंवर नारायण को दिया जाना है, यह उक्ति दुहराने का मन होता है कि इससे ज्ञानपीठ की ही प्रतिष्ठा बढ़ी है। ज्ञानपीठ पुरस्कार को समस्त भारतीय भाषाओँ के साहित्य में अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है, पर इसके साथ भी विवाद और चयनित कवि-लेखक को लेकर बिल्कुल फर्क किस्म की बातें सामने आती रही है। इस परिप्रेक्ष्य में कुंवरजी का निर्विवाद चयन कुछ विलंबित ज़रूर है, पर इससे हिन्दी और विशेषकर कविता का सम्मान बढ़ा है। स्वयं कुंवरजी इसके लिए ख़ुद को एक निमित्त भर मानते हैं।

इन दिनों

कुंवर नारायण की कविता ने मुझ जैसे अनेक लोगों को न सिर्फ़ कवित-विवेक बल्कि जीवन विवेक भी दिया है। मैं खुशकिस्मत हूँ की पढ़ने-लिखने के शुरूआती दिनों से ही उनकी कविता और दिल्ली आने के बाद मुझे उनकी संगत भी मिली। अस्सी पार भी उनकी दिनचर्या किसी स्कूली छात्र जैसी है। आंखों की रोशनी कम पड़ने के बावजूद अपनी डेस्क से लगकर वे किताबें लेंस के सहारे देर तक पढ़ते हैं। हजारों पृष्ठों में फैली अपनी अनछपी रचनाओं का सख्ती से संपादन करते हैं। साहित्यिक गोष्ठियों से लेकर सिनेमा तक में उनकी दिलचस्पी और शिरकत अब तक बरकरार है। इन दिनों वे आलोचना की दूसरी पुस्तक पर काम कर रहे हैं। साथ ही एक नया कविता-संग्रह भी आकार ले रहा है।

दो नई कविताएं

( उन्होंने अपनी नोटबुक से दो कविताएं सबद लिए दी हैं। सबद इन्हीं दो कविताओं के साथ उनकी यह उपलब्धि सेलिब्रेट करता है। )

प्यार के बदले

कई दर्द थे जीवन में :
एक दर्द और सही, मैंने सोचा --
इतना भी बे-दर्द होकर क्या जीना !

अपना लिया उसे भी
अपना ही समझ कर

जो दर्द अपनों ने दिया
प्यार के बदले...

****
रोते हँसते

जैसे बेबात हँसी आ जाती है
हँसते चेहरों को देख कर


जैसे अनायास आंसू आ जाते हैं
रोते चेहरों को देख कर


हँसी और रोने के बीच
काश, कुछ ऐसा होता रिश्ता
कि रोते-रोते हँसी आ जाती
जैसे हँसते-हँसते आंसू !


****
7 comments:

कुंवर नारायण जी को यह सम्मान सम्पूर्ण हिन्दी साहित्य का सम्मान है । हिन्दी को यह प्रतिष्ठा दिलाने के लिए उन्हें शत शत नमन। कवितायें प्रस्तुत कराने के लिये आपका शुक्रिया।


कुँवर नारायण जी को बधाई। चलिए लम्बे समय बाद हिन्दी के लिए ज्ञानपीठ घोषित हुआ। यह सन्तोष की बात है।

आप की यह प्रविष्टि ज्यों की त्यों अपने याहू समूह ‘हिन्दी भारत’ पर सब को भेज रही हूँ।


पूरे हिंदी संसार को बधाई.


wakai ek bade kavi ko gyanpith mila! wo kavi hindi ka hai, ye hamare gaurav ki bat hai. kunwar jee ko salaam.


kunwar ji ko bahut -bahut badhai...maine jamia me docu dekh kar unke bare me jana tha ..phir itni utsukta jagi ke aur padha ..kafi kuch anurag tumhare madhayam se bhi....maine jaise se ye khabar dekhi mujhe behad prasnnta hui...laga ke pursakar ekdam upyukt vaykti ko diya ja raha hai....


हिंदी में शायद कुछ गिने-चुने ही ऐसे कवि हैं जिन्हें पुरस्कार मिलने पर कोई विवाद नहीं होता। इनमें कुंवरनारायण शीर्ष पर हैं। सचमुच, पूरे हिंदी संसार को बधाई।


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सबद का प्रकाशन 18 मई 2008 को शुरू हुआ.

संपादन : अनुराग वत्स.

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