सबद
vatsanurag.blogspot.com

स्मृति - शेष : वेणु गोपाल

हिन्दी के जाने-माने कवि-लेखक वेणु गोपाल का हैदराबाद में सोमवार रात निधन हो गया। वेणु कैंसर से पीड़ित थे। वेणु उन कविओं में रहे जिनसे उनके दौर का जन आन्दोलन ऊर्जा पाता रहा। नक्सलबाड़ी आन्दोलन के उभार के साथ धूमिल, कुमार विकल, वेणु गोपाल और आलोकधन्वा सरीखे कवि उसके संबल बने। इन कविओं ने कविता में उस हर संभव कार्रवाई को जायज़ ठहराया जिससे सूरतेहाल में बदलाव आए। मलयज के शब्दों में कहें तो इनके यहाँ कविता कुछ करती थी, सुंदर पड़ी नहीं रहती थी।

वेणु गोपाल ने एक कठिन जीवन जिया। हैदराबाद में ही जीवन का बहुलांश बिताया। कागज़ और जमीन दोनों जगह सक्रीय रहे। क्रन्तिकारी कवि-मन मिला था, सो कहीं टिक कर नौकरी नहीं की। अध्यापकी बड़े चाव से करते थे। पर वह भी छूटती रही। अंत समय में आजीविका के लिए किसी मंदिर में पुजारी का काम करते थे। इसे आप आसानी से उनकी नियति कह देंगे। पर दरअसल यह हमारी, हमारे समाज की विडंबना है। एक ऐसी विडंबना और सरलदिमागी जिसके बारे में जयशंकर प्रसाद ठीक कह गए हैं : '' यह विडंबना ! अरि सरलते, तेरी हँसी उडाऊं मैं ! ''

कुछ कविताएं

अँधेरा मेरे लिए

रहती है रोशनी
लेकिन दिखता है अंधेरा
तो
कसूर
अंधेरे का तो नहीं हुआ न !
और
न रोशनी का !
किसका कसूर ?
जानने के लिए
आईना भी कैसे देखूं
कि अंधेरा जो है
मेरे लिए
रोशनी के बावजूद !

****
सिलसिले का चेहरा

बेजोड़ में
झलक रहा है
सिलसिले का चेहरा
जब कि
बेजोड़ खुद क्या है
सिवाय
सिलसिले की एक कड़ी के!
इस तरह होता है स्थापित
महत्व
परम्परा का।

****
उजाला ही उजाला

आ गया था ऐसा वक्त
कि भूमिगत होना पड़ा
अंधेरे को
नहीं मिली
कोई
सुरक्षित जगह
उजाले से ज्यादा।
छिप गया वह
उजाले में कुछ यूं
कि शक तक नहीं
हो सकता किसी को
कि अंधेरा छिपा है
उजाले में।
जबकि
फिलहाल
चारों ओर
उजाला ही उजाला है !

****

( ये कविताएं कविता-कोश से साभार, वेणुजी की तस्वीर अनिल जनविजय के सौजन्य से। )

6 comments:

हम लोग दसवीं में थे जब इनके बारे में पढ़ा करते थे। हमारी हिंदी की सुदेश मैडम इनके बारे में बहुत कुछ बताती थी हमें...यह जानकर दुख हुआ कि ऐसे कवि को आजीविका के लिए पुजारी का काम करना पड़ा।


वेणुगोपाल के निधन की खबर से सचमुच बड़ा सदमा पहुँचा। मैं उनसे १९९७ में हैदराबाद में मिला था। अब जब से मैं २००६ में यहाँ आया हूँ, सोचता रहा कि उनसे मिलना है, पर अपनी निजी समस्याओं में उलझे होने की वजह से नहीं मिल पाया। अभी पाँच दिन पहले हैदराबाद वि.वि. के उनके सहयोगी सुभाष कुमार से उनके घर का पूछ रहा था - अभी मिल कर पता लेना था।
लाल्टू


हैदराबाद के एक अख़बार में हम साथ काम करते थे. न केवल कवि के रूप में, बल्कि इंसान के रूप में भी वह बड़े थे. उनके संघर्षों को बहुत क़रीब से देखा. (और सच कहूं, उनके संघर्ष देखकर डर भी जाता). अब भी, जब उनसे फोन पर बात होती, तो भी उनकी आवाज़ में थकान नहीं दिखती थी. उनका एक ठहाका आता था, हवा में लहराता हुआ, और कान के परदे पर कोई दोस्‍ताना धौल मार जाता था.
इस ख़बर ने सदमा पहुंचाया है.


आपने ठीक ही लिखा है कि यह हमारे समाज की विडंबना है। इसे सहते हुए ही कवि चला जाता है। इसे निराला से लेकर मुक्तिबोध की मृ्त्यु तक में देखा जा सकता है।


वेणु जी को श्रद्धा-सुमन !


along with rajesh joshi we had close comradeship with venugopal


सबद से जुड़ने की जगह :

सबद से जुड़ने की जगह :
[ अपडेट्स और सूचनाओं की जगह् ]

आग़ाज़


सबद का प्रकाशन 18 मई 2008 को शुरू हुआ.

संपादन : अनुराग वत्स.

पिछला बाक़ी

साखी


कुंवर नारायण / कृष्‍ण बलदेव वैद / विष्‍णु खरे / चंद्रकांत देवताले / राजी सेठ / मंगलेश डबराल / असद ज़ैदी / कुमार अंबुज / उदयन वाजपेयी / हृषिकेश सुलभ / लाल्‍टू / संजय खाती / पंकज चतुर्वेदी / आशुतोष दुबे / अजंता देव / यतींद्र मिश्र / पंकज मित्र / गीत चतुर्वेदी / व्‍योमेश शुक्‍ल / चन्दन पाण्डेय / कुणाल सिंह / मनोज कुमार झा / पंकज राग / नीलेश रघुवंशी / शिरीष कुमार मौर्य / संजय कुंदन / सुंदर चंद्र ठाकुर / अखिलेश / अरुण देव / समर्थ वाशिष्ठ / चंद्रभूषण / प्रत्‍यक्षा / मृत्युंजय / मनीषा कुलश्रेष्ठ / तुषार धवल / वंदना राग / पीयूष दईया / संगीता गुन्देचा / गिरिराज किराडू / महेश वर्मा / मोहन राणा / प्रभात रंजन / मृत्युंजय / आशुतोष भारद्वाज / हिमांशु पंड्या / शशिभूषण /
मोनिका कुमार / अशोक पांडे /अजित वडनेरकर / शंकर शरण / नीरज पांडेय / रवींद्र व्‍यास / विजय शंकर चतुर्वेदी / विपिन कुमार शर्मा / सूरज / अम्बर रंजना पाण्डेय / सिद्धान्त मोहन तिवारी / सुशोभित सक्तावत / निशांत / अपूर्व नारायण / विनोद अनुपम

बीजक


ग़ालिब / मिर्जा़ हादी रुस्‍वा / शमशेर / निर्मल वर्मा / अज्ञेय / एम. एफ. हुसैन / इस्‍मत चुग़ताई / त्रिलोचन / नागार्जुन / रघुवीर सहाय / विजयदेव नारायण साही / मलयज / ज्ञानरंजन / सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना / मरीना त्‍स्‍वेतायेवा / यानिस रित्‍सोस / फ्रान्ज़ काफ़्का / गाब्रीयल गार्सीया मारकेस / हैराल्‍ड पिंटर / फरनांदो पेसोआ / कारेल चापेक / जॉर्ज लुई बोर्हेस / ओक्टावियो पाज़ / अर्नस्ट हेमिंग्वे / व्लादिमिर नबोकोव / हेनरी मिलर / रॉबर्टो बोलान्‍यो / सीज़र पावेसी / सुजान सौन्टैग / इतालो कल्‍वीनो / रॉबर्ट ब्रेसां / उम्बेर्तो ईको / अर्नेस्‍तो कार्देनाल / ज़बिग्नियव हर्बर्ट / मिक्‍लोश रादनोती / निज़ार क़ब्‍बानी / एमानुएल ओर्तीज़ / ओरहन पामुक / सबीर हका / मो यान / पॉल आस्‍टर / फि़राक़ गोरखपुरी / अहमद फ़राज़ / दिलीप चित्रे / के. सच्चिदानंदन / वागीश शुक्‍ल/ जयशंकर/ वेणु गोपाल/ सुदीप बैनर्जी /सफि़या अख़्तर/ कुमार शहानी / अनुपम मिश्र

सबद पुस्तिका : 1

सबद पुस्तिका : 1
भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार के तीन दशक : एक अंशत: विवादास्‍पद जायज़ा

सबद पुस्तिका : 2

सबद पुस्तिका : 2
कुंवर नारायण का गद्य व कविताएं

सबद पुस्तिका : 3

सबद पुस्तिका : 3
गीत चतुर्वेदी की लंबी कविता : उभयचर

सबद पुस्तिका : 4

सबद पुस्तिका : 4
चन्‍दन पाण्‍डेय की कहानी - रिवॉल्‍वर

सबद पुस्तिका : 5

सबद पुस्तिका : 5
प्रसन्न कुमार चौधरी की लंबी कविता

सबद पुस्तिका : 6

सबद पुस्तिका : 6
एडम ज़गायेवस्‍की की कविताएं व गद्य

सबद पुस्तिका : 7

सबद पुस्तिका : 7
बेई दाओ की कविताएं

सबद पुस्तिका : 8

सबद पुस्तिका : 8
ईमान मर्सल की कविताएं

सबद पुस्तिका : 9

सबद पुस्तिका : 9
बाज़बहादुर की कविताएं - उदयन वाजपेयी

सबद पोएट्री फि़ल्‍म

सबद पोएट्री फि़ल्‍म
गीत चतुर्वेदी की सात कविताओं का फिल्मांकन

सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में

सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में
a film on love and loneliness

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन

सबद पोएट्री फिल्‍म : 3 : शब्‍द-वन
किताबों की देहरी पर...

गोष्ठी : १ : स्मृति

गोष्ठी : १ : स्मृति
स्मृति के बारे में चार कवि-लेखकों के विचार

गोष्ठी : २ : लिखते-पढ़ते

गोष्ठी : २ : लिखते-पढ़ते
लिखने-पढ़ने के बारे में चार कवि-लेखकों की बातचीत

सम्‍मुख - 1

सम्‍मुख - 1
गीत चतुर्वेदी का इंटरव्‍यू

अपवाद : [ सबद का सहोदर ] :

अपवाद : [ सबद का सहोदर ] :
मुक्तिबोध के बहाने हिंदी कविता के बारे में - गीत चतुर्वेदी