( पुरस्कार यों तो हर बार विवाद का विषय बन जाते हैं, युवा कविओं को मिलनेवाला, ''अंकुर मिश्र स्मृति पुरस्कार'' जब इस बार बनारस के व्योमेश शुक्ल को देने की घोषणा हुई तो प्रायः सबने इस निर्णय को खुले मन से सराहा। व्योमेश जैसे कविओं के साथ हिन्दी कविता एक जटिल और लगातार अजनबी होते समय को बहुत संवेदनशीलता से ज़ज्ब और व्यक्त कर रही है। हमारे आग्रह पर उन्होंने सबद के लिए अपनी कविताएं भेजी। हम उनके आभारी हैं और उनके सुदीर्घ कृति जीवन की कामना करते हैं। )
यह भी संभव
मैं आठ से ग्यारह साल का था और मेरी शादी नहीं हुई थी
चिढ़ाने और डराने के लिए बाइस साल का बदनाम हट्टाकट्टा श्याम सुंदर
सामने आकर गाने लगता था--''जिसकी बीबी मोटी उसका भी बड़ा नाम है''
मैं मोटा नहीं था अम्मा स्वस्थ थीं यानी
इस कूटभाषा में बीबी का मतलब माँ था
मुझे सुनाने के लिए बार बार इसे तब गाया गया
धुनों और उपमाओं का इस्तेमाल इस तरह भी संभव है
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आर्केस्ट्रा
पतली गली है लोहे का सामान बनता है
बनाने वाले दृढ़ ताली निश्चित लय में ठोंकते हैं
हथौड़ी की उंगली
लोहे का ताल
धड़कनों की तरह आदत है समय को यह
समय का संगीत है
ठ क ठ क ठ क ठ क
या
ठकठक ठकठक ठकठक ठकठक
और भी लयें हैं सब लगातार हैं
लोगों को आदत है लयों का यह संश्लेष सुनने की
हम प्रत्येक को अलग-अलग पहचानते हैं
और साथ-साथ भी
एक दिन गली में लड़का पैदा हुआ है और
शहनाइयां बज रही हैं
पृष्ठभूमि में असंगत लोहे के कई ताल
एक बांसुरी बेचनेवाले बजाता हुआ बांसुरी
गली में दाखिल है और
बांसुरी नहीं बिकी है शहनाई वाले से अब बात हो रही है
वह बातचीत संगीत के बारे में नहीं है पता नहीं किस बारे में है
एक प्राइवेट स्कूल का ५०० प्रति माह पाने वाला तबला अध्यापक
इस दृश्य को दूर से देख रहा है
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Wednesday, 02 July, 2008
बिलकुल नई कहन,
नया अंदाज़,
नये बिम्ब
नया शब्दांकन
बधाई व्योमेश भाई को
और सबद को इस समाचार को विस्तार
देने के लिये.
Wednesday, 02 July, 2008
व्योमेश बहुत होनहार, समझदार और वैचारिक रूप से तैयार कवि है। उसकी अभिव्यक्ति में एक अजब-सा साहस है। मुझे वो निजी तौर पर भी बहुत पसन्द है। अनुराग जी आपने उसके महत्व को रेखांकित किया, मुझे अच्छा लगा।
Wednesday, 02 July, 2008
व्योमेश शुक्ल को बधाई ! 'भारतेंदु' फ़िल्म की शूटिंग के दौरान उन्होंने मदद की। उनका उल्लेख भी है। खूब लिखें और अच्छा लिखें। शुभकामनाएं!
Thursday, 03 July, 2008
naya kavi ke anubhaw sansaar aur rachnasheelta se parichit karaya.aapko dhnywad aur kavi ko shubhkamnayen.
Thursday, 03 July, 2008
व्योमेश शुक्ल को बधाई..एक अलग अंदाज है. और कवितायें सुनायें इनकी.
Thursday, 03 July, 2008
vyomesh bhaee ko badhaee. unhone jaldi apni kahan kee nyi bhangima pa lee hai, kahen ki apne nyepan me hi janma kvi....vyomesh idhar ke nye kviyon me sbse jyada sarthak aur mahatvpurn hain. unhe yah puraskar milna mujhe vyaktigat taur par bhi ahladkari lag rha hai.
Thursday, 03 July, 2008
vyomeshji ko meri ore se bhi badhai. unki kavitaon ki taazgi aakarshit karti hai. vyomeshji ki kavitayen parhwane ke liye anuragji aapko bhi badhai.
prabhat
Thursday, 03 July, 2008
पसंद आई कविताएं।
बहुत अच्छी बात
व्योमेश को बधाइयां खूब खूब।
शुक्रिया आपका भी।
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