सबद
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आगाज़


हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था
व्यक्ति को मैं नहीं जानता था
हताशा को जानता था
इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया
मैंने हाथ बढ़ाया
मेरा
हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ

मुझे
वह नहीं जानता था

मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था

हम दोनों साथ चले
दोनों
एक दूसरे को नहीं जानते थे

साथ
चलने को जानते थे। 

 ***

[ यह कविता हिन्दी के मूर्धन्य कवि विनोदकुमार शुक्ल की है। 
सबद की शुरुआत इन्हीं शब्दों से।
गुफ्तगू उन सबसे है जिनका एक घर सबद निरंतर में भी है। 
जरिया सबद है। 
गरज इतनी कि लोगों का उससे सम्बन्ध और घना हो। 
ख़ुद भी लिखता रहूँगा और कोशिश रहेगी कि समर्थ रचनाकारों की नई-पुरानी रचनाओं को भी सबद के माध्यम से आपके सामने लाऊं, जिनका होना हमें कई तरह से समृद्ध करता है। ]
11 comments:

pheli post ki mubarkbad, ummid hai kuch accha karoge


तुम जानते हो यह कविता मुझे बेहद पसंद आई थी इसलिए मेरे हिसाब से इस कविता से अपने ब्लॉग की शुरुआत करके तुमने ब्लॉग प्रेमियों के लिए पहले ही ‌ओवर में छक्का मारने वाले बल्लेबाज वाला इंप्रेशन बनाने की जो कोशिश की है उसमें काफी हद तक तुम्हें कामयाबी मिलनी चाहिए। मेरा मानना है कि तुम्हारा ब्लॉग जरूर कुछ हटकर परॊसेगा। जो कुछ भी अच्छा छपा और छापा है हमें जरूर पढवाना। शुभकामनाएं।


बेहद ही खूबसूरत पंक्तियां....हकीकत यही है....
keep it up. congrats


ब्लॉग बनाने की बधाइयां और मुझे यक़ीन है कि आप लोगों के बीच शब्दों से जाने जाएंगे। बस, ऐसी ही कोशिशें जारी रखिए.....

सबद में जो बातें कही गई हैं वो वाक़ई ज़िंदगी की सबसे बड़ी हकीकत हैं।


anurag bhai,
blog shuru kar aapne bada achha kiya.aap sajag pathak aur samvedanshil rachanakar hain.isliye mujhe ummeed hai ki aapke blog par hamen shreshtha rachnayen padhne ko milengi.pahle post men vinod kumar shuklaji ki kavita iska praman hai.varshon pahle maine unki ek kavita (shirshak bhul raha hun) : nadi se milne jaunga kam ki tarah... aisha kuchh tha usme : mujhe kafi pasand aayee thi to maine unhe likha ki ise apani hastlipi me likh kar bhej den. unhonen likh kar bheji thi.
subhkamnayen.
dharmendra sushant


nye blog ki shuruaat par hhadik shubhkamnayen.in dino jo blog dekhne me aa rahe hain unme jyadatar kmakl logo ki bhadas hi nikalti hai.aise me agar main umeed kru ki isme kuch alag hoga to aap nirash nhi krenge.


वैसे तो आपके लेखन से परिचय पुराना है पर ब्लोग के माध्यम से आपको पढना एक नया एहसास दे रहा है । बधाइ स्वीकार करे ।


congrats fr the starting of a new journey....I hope this will be a mile stone in ur creative work...no doubt we all r busy with one or another work bt doing something like this in the field of literature is truly commendable...gud luck for Aagaz!


अनुराग भाई, सबद के आगाज की बधाई। शानदार शुरुआत। आशा है, सबद देशी-विदेशी रचनाकारों के शब्द-मर्मों के विभिन्न अर्थ-स्तरों को पाठक तक पहुंचाने में कामयाब होगा। शुभकामनाओं सहित, पुरुषोत्तम नवीन


bahut achi kavita padhane ke liye shukriya.main yahan der se pahunchi.


हमेशा से सोचता था कि "सबद" को शुरू से पढ़ना है..शुरू किया है..!

व्यक्ति और हताशा...और अंततः एक चिरंतन आशावाद...! शानदार तो आगाज ही था सबद का..!


सबद से जुड़ने की जगह :

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[ अपडेट्स और सूचनाओं की जगह् ]

आग़ाज़


सबद का प्रकाशन 18 मई 2008 को शुरू हुआ.

संपादन : अनुराग वत्स.

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