Friday, January 18, 2019

अंबर रंजना पाण्डेय की चार नई कविताएं




मृत्यु का अनुवाद सम्भव नहीं 

वीणावादक की मृत्यु से अधिक संगीतमय थी मृत्यु 
अनुवादक की क्योंकि पड़ौस की एक जूनी
बिल्डिंग में एक युवक इगोर स्ट्रविन्स्की का डी मेजर 
में वायलेन कॉन्सर्टॊ बजा रहा था। संगीत 
की तरह मृत्यु का भी अनुवाद सम्भव नहीं है। इस 
तरह अनुवादकों की मृत्युएँ असफल 
है जैसे वह बल्ब जल रहा था अनुवादक के सिर 
पर मरते समय उस बल्ब की रौशनी 
का अनुवाद दुनिया की किसी भी भाषा में सम्भव नहीं 
हालाँकि अपनी आँखों के बीच जलनेवाली 
असंख्य मोमबत्तियों से कितनी बार अनुवादक ने 
बल्ब के फ़िलामेंट का अनुवाद करने का 

असफल प्रयास किया अपनी अंतिम बीमारी में भी। 
अधखाया टमाटर रखा है; अनुवादक 
इसका अनुवाद इतालवी या चेक में कर सकता 
था, उससे पूर्व वह मर गया। अकेला था 

उस समय जब मरा। युवक वायलेन पड़ौस में 
बजाता रहा। अँधेरा घिरते एक के बाद 
बिल्डिंग की खिड़कियों में बत्तियाँ जल गई। बालकनी 
के दरवाज़े में मर रहे अनुवादक ने 
जलता हुआ, धीरे धीरे हिलता झूमर देखा। उसके 
स्फटिक धुँधले पड़ अनुवादक की आँखों  
में बुझ गए। टेक्स्ट अनुवादक के लिए इसी संगीत 
की तरह था पंजों के बल चलते निकल 
जाता था, शरीर भी कुछ ऐसे ही थे, वह एक के बाद 
दूसरे पर हल्के से पाँव रख चला गया ।
***

परिचय नहीं, पर प्रेम है

मुहम्मद अली रोड पर आते जाते, वहाँ कुछ देर
रुकता हूँ। शमा नाम है या शबाना; नहीं हूँ
जानता। परिचय नहीं है पर प्रेम है। भरे रहते
है पसीने से उसके बाल। दिनभर शीशा
फूँकने के कारण पलक नहीं उठती । देखने पर
लगती नहीं कि वह पन्द्रह साल की होगी।
गुग्गल सुलगता ही रहता है उसकी खिड़की पर।
मोटरकारों के धुएँ से नष्टप्रायः है उस

संकरी गली में प्रेम में पड़ने की सम्भावना। फिर भी
लगता है लोबान के पेड़ों से भरे जंगल
में मैं घोड़े पर सवार भटक रहा हूँ या लोबान से
भरे जहाज़ में बीच हिंदमहासागर के
डूब रहा हूँ। उसने कभी नीचे मेरी ओर देखा तक
नहीं और मैं उसके लिए रोज़ दफ़्तर से

आधा किलोमीटर दूर उतर पाँव पाँव चलता हूँ।
खोल पर कढ़ाई के बिरंगे धागे की लच्छी
लुढ़ककर गिरी उसके हाथ से, धागे का एक सिरा
उसके हाथ में, पुश्ते से बनी उसकी गट्टी
मेरे हाथ में, बस इतने पास हम आ पाए है एक-
दूसरे के। दुनिया की हवाओं के बराबर
मेरे फेफड़ों में उसके घर के गुग्गल का धुआँ भरा
है, मेरे मन में जग से थोड़ा ज़्यादा ही दुख

भरा है।  इससे ज़्यादा जीवन है भी क्या! इच्छाओं का लच्छा
गुत्थमगुत्था। लुढ़क जाए तो लुढ़क जाए ।
***


प्रमेय ले जाऊँगा संग

रातभर मशीनों की मंद्र किन्तु अनवरत गुंजन में 
जहाँ तापमान सात डिग्री, हमारे होटल के 
कमरे में बिल्ली रह गई। मीनाक्षी, तुम्हारे पाँव
के नखों ने सुदीर्घ  रेखा मेरी पिंडली से 
मेरे अंडकोश तक बना दी है। कहीं रक्त से द्रप्त,
कहीं प्रातःकाल चन्द्र सी इस रेख का ज्यामितीय 
अध्ययन इन तलों और बहुगुण के मापीय अंक अवकल, 
समाकलन कलनों के लिए मैं यहाँ किसी गणितज्ञ  
फ़ेमिनिस्ट ढूँढ रहा  हूँ—इस्पहानी की विद्यार्थी 
की सौत। बाहर चर्म-चक्षुओं से रेखा को नहीं 

नापा जा सकता है। मीनाक्षी तुम्हें क्या समाचार 
मेरी अंतरगति का! दो रातों का संग जिसका,
दिन एक भी नहीं है।एक रेखा को संग ले जाना 
असम्भव है। मैं बस 
प्रमेय ले जाऊँगा संग।
***

हृदय तक दाँतों को पहुँचने में तकलीफ़ होती है

पानी और प्यास (को यदि समुद्री ककड़ी मान लो, तब) इन्हीं दोनों के बीच का स्वाद है मेरे कोमल हृदय का। जीवन की अधिकांश दुपहरें मैंने इसे ही खाते हुए ख़त्म की हैं। प्रोभूजिन का स्वाद उतना अच्छा नहीं जितना वसा का इसमें। चिन्ता का स्वाद हमेशा अभी तोड़े हुए तरबूज़ सरीखा है, ताज़ा हालाँकि उतना मीठा नहीं। शिराएँ जो बाँधे हुए हैं, उन्हें चबाने में लम्बी देर लगती। अपने हृदय को खाने के दृश्य की करें आप कल्पना ; हृदय तक दाँतों को पहुँचने में कितनी तकलीफ़ होती है फिर पँसलियों को तोड़के वहाँ तक पहुँचना बहुत कठिन है; तो भी अपने सुकोमल हृदय को खाना बहुत दुष्कर नहीं और न ही कोई अनूठी बात है। हम सभी अपना हृदय खाते मित्रों, प्रेमियों, शत्रुओं और माँओँ को कभी न कभी मिले ही हैं। गरदन झुकाए अपने सीने पर झुके हुए, हड्डियों की शाखा पर नींबू से लटके हृदय को खाते हुए। अक्षत है हृदय का भण्डार कि खाते खाते भी ख़त्म न होता। ऐसा लगता है जिस तरफ़ का भाग हम खा नहीं रहे होते हैं, वह भाग बढ़ता रहता है संतरे की तरह। रक्त हृदय का रस है, जैसे दुख इसका रस। रस सूख जाने पर इसे निकाल, नमक और पानी में बहुत देर तक उबालकर खाया जाता है, किन्तु आजकल खाने की चीज़ों की कमी नहीं इसलिए बहुत ही कम लोग सूखे हुए हृदय को खाते हैं।
हृदय खाने की है सबसे सुन्दर ये बात-
खाते समय यह ज़ोर ज़ोर से धड़कता है और
इस कारण ही दुनिया की है सबसे अधिक स्वादिष्ट चीज़।
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(सबद पर अंबर की अन्य कविताएं यहां पढ़ें)